यूपी में सस्पेंडेड दो आईपीएस और दस पीपीएस दोषमुक्त पाए गए

लखनऊ स्थित आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा प्राप्त सूचना के अनुसार पिछले लगभग चार सालों (01 जनवरी 2009 से 13 फ़रवरी 2013) में उत्तर प्रदेश में आईपीएस तथा 24 पीपीएस अधिकारी राज्य सरकार द्वारा निलंबित किये गए. निलंबित आईपीएस अधिकारियों हैं- अजय कुमार मिश्रा, तत्कालीन एसएसपी इटावा (24 मई 2009), ओपी सागर, एसपी प्रतापगढ़ (26 जून 2012), डी के राय, एसपी खीरी (14 जून 2011), जेएन सिंह, डीआईजी मेरठ (26 अप्रैल 2011) और आरपी चतुर्वेदी, एसपी जालौन (01 दिसंबर 2012).

इन पांच में से दो अधिकारियों की बाद में गलती नहीं पायी गयी और वे पूर्णतया दोषमुक्त हुए. इनमें जेएन सिंह दो महीने से भी कम समय में बहाल हो गए और उन्हें कोई आरोपपत्र तक नहीं दिया गया. अजय मिश्रा करीब पन्द्रह महीने निलंबित तो रहे पर वे भी विभागीय कार्यवाही में दोषमुक्त पाए गए. अन्य अधिकारियों की कार्यवाही अभी प्रचलित है.

पीपीएस अधिकारियों में 8 एडिशनल एसपी और 16 डिप्टी एसपी हैं. इनमें भी दस बाद में दोषी नहीं पाए गए. दोषमुक्त अधिकारियों में एडिशनल एसपी कुशहर, केके अस्थाना, अशोक कुमार वर्मा और डॉ. बीएन तिवारी और डिप्टी एसपी जालिम सिंह, अशोक कुमार सिंह, राम शंकर द्विवेदी, संतोष कुमार सिंह और मुकुल द्विवेदी शामिल हैं. यह भी ज्ञातव्य हो कि डॉ. बीएन तिवारी 25 सितम्बर 2012 को एसपी ट्रैफिक के रूप में एक पुलिस कॉन्स्टेबल से जूता बंधवाने के आरोप में निलंबित हुए और 19 अक्टूबर को बहाल भी हो गए, जब उनके विरुद्ध सभी आरोप प्रारंभिक जांच में ही गलत पाए गए. इन 29 मामलों में अब तक कोई भी अधिकारी दोषी सिद्ध नहीं हुआ है.

निलंबन का क़ानून यह है कि एक अधिकारी को तभी निलंबित किया जाए जब उसके खिलाफ गंभीर कार्यवाही अपेक्षित हो पर डॉ. ठाकुर द्वरा प्राप्त सूचनाओं से यही बात साबित होती दिखती है कि उत्तर प्रदेश में ताकतवर नेता मनमर्जी पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया करते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *