Rising Rahul : वीरेन दा, आपसे तो मुझे न जाने कितने सालों पहले मिलना था, पर मैं खुद में बंद आदमी खुद से कभी इतना बाहर ही न आ पाया कि उस यायावरी से जुड़ सकूं, जिसने ताजिंदगी आपको बखूबी बरता। अभी भी मुझे खुद से बाहर आने में काफी दिक्कत है, पर सुख ये है कि अब आप खुद को फिर से पूरे दमखम के साथ सामने आने के लिए तैयार किए हुए हैं.
हालांकि अभी तक दिमाग में आपके वो शब्द गूंज रहे हैं और शरीर का हर रोंया खड़ा हो जा रहा है कि 'ये एक महीना जी गया तो जी जाउंगा।' पर मैं जानता हूं कि आप की साफगोई का नतीजा ये है कि आप न सिर्फ जिएंगे बल्कि कैंसर से लड़ रहे साथियों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में सामने आएंगे. आप को जीतना है, आप विजेता हैं.

हालांकि बात करते हुए आपने आगे न जोड़ा, न कहा, पर हमने समझ लिया और आपकी अनकही हम स्वीकार करेंगे वीरेन दा, कि आप फिर से बरेली को गुलजार करेंगे, वहां से पूरे देश में मनुष्यता का संदेश देते रहेंगे… हमें पता है वीरेन दा, बता दे रहे हैं अभी से। और हां, Yashwant को बोलने दीजिए एलियन एलियन… मुझे आप बहुत खूबसूरत लगे… ठीक उतने, जितने कि आप हैं।
पत्रकार राहुल पांडेय के फेसबुक वॉल से.
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