ये क्या किया पुण्य प्रसून बाजपेयी? तुमसे ये उम्मीद न थी, शेम! शेम!!

सरोकार और नैतिकता वाली पत्रकारिता के मसीहा बने फिरने वाले और बेबाक बोल बोलने के लिए चर्चित पुण्य प्रसून बाजपेयी के चेहरे से भी नकाब उठ गया. नौकरी की नैतिकता ने उनकी खुद की वैचारिक तेज को ढंक लिया और उन्हें सुधीर चौधरी व समीर अहलूवालिया की गिरफ्तारी पर जलेबी छानने को मजबूर कर दिया. पुण्य प्रसून जिस जी न्यूज चैनल में एंकरिंग करते हैं, उस चैनल के दो संपादकों को ब्लैकमेलिंग कांड में गिरफ्तार किए जाने के प्रकरण को वो आपातकाल से जोड़ कर देख रहे हैं, मीडिया के पैरों में बेड़ियां डाले जाने के रूप में देख रहे हैं.. क्या वे खुद के चश्मे से यह सब देख रहे हैं या फिर सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका के चश्मे का पावर चढ़ा हुआ है उनकी आंखों पर?

फेसबुक पर लोग पुण्य प्रसून बाजपेयी पर थू थू करना शुरू कर चुके हैं… अच्छा भी है, भ्रम जितनी जल्दी खत्म हो जाए, उतना अच्छा…  लोगों का कहना है कि सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया के बारे में तो लोग जान गए थे, पर इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद लोग पुण्य प्रसून बाजपेयी को भी जान गए कि वो कितने क्रांतिकारी हैं. पापी पेट का सवाल हो या जी के मालिकों के दुख के मौके पर उनका साथ देने की मजबूरी, जो भी हो, लेकिन पुण्य ने ठीक नहीं किया. वे शान से ऐसा प्रोग्राम एंकर करने से मना कर सकते थे और पूरे देश के पत्रकारों को जीवट व बहादुर होने का संदेश दे सकते थे. पर उन्होंने कमजोरी दिखा दी.  सुधीर चौधरी ने मालिक के कहने पर ब्लैकमेलिंग की. और पुण्य प्रसून बाजपेयी ने मालिक के कहने पर ब्लैकमेलर को बचाया. पूरे मुद्दे को मीडिया की आजादी से जोड़कर भ्रष्ट कारपोरेट मीडिया के कुत्सित चेहरे पर डेमोक्रेटिक फ्रीडम का मुलम्मा चढ़ाया..

फेसबुक पर Kumud Singh लिखते हैं- एक डकैत ने चोर को गिरफ्तार करवा दिया। पुण्य प्रसून जैसे पत्रकार यह कैसे कह सकते हैं कि डकैत ने गलत किया। सुधीर चौधरी की तो कोई साख थी ही नहीं। आज पुण्य प्रसून भी हाथ मलते अच्‍छे नहीं लगे।

इसी प्रकरण पर Naveen Kumar का कहना है : ज़ी न्यूज़ के संपादक गिरफ्तार… पुण्य प्रसून जी बता रहे हैं… मीडिया को बेड़ियों में जकड़ा दिखा रहे हैं…

Ankit Muttrija का वक्तव्य पढ़िए- ''क्योंकि एमरजेंसी के बाद से किसी संपादक की गिरफ्तारी नहीं हुई, क्योंकि राडिया टेप प्रकरण में कई बड़े बड़े पत्रकार-संपादक शामिल थे, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, क्योंकि आम आदमी सबूतों के साथ किसी संपादक के खिलाफ़ मुआमला दर्ज क्यों ना करवाए, गिरफ्तारी नहीं होती, पर आज हुई, इसलिए यह चिंता का विषय है….

Pushkar Pushp कहिन : पुण्य प्रसून ने आज अपनी पूरी साख खत्म कर ली. सुधीर चौधरी पर जैसे आज उन्होंने दस बजे की बुलेटिन पढ़ी और उनके बुलेटिन में वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी के बयान को तोड़ – मोड कर पेश किया . वह शर्मनाक था. हम सुधीर चौधरी के लिए नहीं पुण्य प्रसून के लिए दुखित हैं.

बी.पी. गौतम : जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलुवालिया को दिल्ली पुलिस ने साजिश रचने और ब्लैकमेलिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है, पर इससे कुछ नहीं होगा, इन दोनों की मुंह काला कर के और गले में जूतों की माला डाल कर बारात निकाली जानी चाहिए, क्योंकि अब नेता चीख कर बोला करेंगे कि पत्रकार कौन से हरिश्चन्द्र हैं? … पत्रकार की बोलती बंद और चोर नेता जिंदाबाद … इसकी भरपाई नहीं हो सकती

रजनीश के झा : निंदनीय! गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसके बाद फर्जी पत्रकारों की दी जा रही आपातकाल की दुहाई… अति निंदनीय।

Jamshed Qamar Siddiqui : मुझे ये समझ में नहीं आ रहा, पुण्य प्रसून जी इसे इमरजेंसी से क्यों जोड़ रहे हैं? और आखिर संपादक को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सकता।


Zee Jindal प्रकरण से जुड़ी समस्त खबरों, विश्लेषणों, स्टिंग, वीडियो के लिए नीचे दी गई तस्वीर पर क्लिक कर दें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *