ये है दिल्‍ली पुलिस का असली घिनौना चेहरा

 दिल्‍ली। 'दिल्‍ली पुलिस सदैव आपके साथ' का नारा देने वाली पुलिस की तस्‍वीर कुछ अलग ही हैं, हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और होते हैं। हुआ यूं आज दिनांक 27 मार्च, 2012 को करीब सुबह 10:55 पर गोल मार्केट सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सामने सड़क की पटरी पर खड़े मारुती सुजुकी कार, जिसका नंबर डीएल 5सीएच 6160 था, के पास कूड़े के ढेर के में आग लग गई।

धीरे-धीरे कूड़े के ढेर में सुलगती आग ऐसी दशा में पहुंच गयी कि वो कार के बीच का हिस्‍सा अपने चपेट में लेने लगी, कि इतने में किसी की नजर आग पर पड़ गयी, बहुत से दुकानदारों ने पानी की बाल्‍टी लेकर आग को बुझाया मगर फिर भी आग पूरी तरह बुझ नहीं पायी। कार के नीचे से धुंआ निकलना बंद नहीं हुआ। वहीं पर नौकरी कर रहे आरके गुप्‍ता ने वहां खड़ी पुलिस की जिप्‍सी जिसका नं. डीएल आईसीजे 4714 था, से मिन्‍नतें की कि थोड़ी आप मदद कर दें, जिससे आग पर काबू पाया जा सके तो पुलिस जिप्‍सी के ड्राइवर ने कहा कि हम क्‍या मदद करें क्‍या हम पानी लेकर बुझायें, ड्राइवर के बगल में बैठा पुलिस भी किसी तरह की मदद करने से इनकार कर दिया।

जरा सोचें कि दिल्‍ली पुलिस किस तरह की असंवेदनशील है यदि कार में आग लग जाती तो आस-पास के कार भी इसके चपेट में आ जाते, जिससे भारी क्षति हो सकती थी मगर भला हो वहां के दुकानदारों का जिनकी मदद से आग को बुझाया गया। बाद में स्‍थानिय पुलिस भी आ गई, मगर इस जिप्‍सी पर सवार पुलिसकर्मियों के कान पर जैसे कोई जूं ही नहीं रेंगा हो। जिस देश की पुलिस ऐसी हो भला वो देश कैसे आगे बढ़ेगा। पुलिस के नाते न सही मानवता के नाते वे कुछ तो सक्रिय हो ही सकते थे, मगर उन्‍होंने ऐसा नहीं किया।

राजीव कुमार

दिल्‍ली

 

 
 

 

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