रंगबाजी के पांच साल यानी भड़ास4मीडिया के 5 साल

Shambhunath Shukla : रंगबाजी के पांच साल यानी भड़ास4मीडिया के 5 साल… भड़ास ने अपने पोस्टर में लिखा है- ''रंगदारी के 5 साल, रंगबाजी के 5 साल, भड़ास के 5 साल''। मैं भड़ास के संचालक और सीईओ श्री यशवंत सिंह से कहना चाहता हूं कि आप इसमें से रंगदारी और भड़ास शब्द को हटा दें। सिर्फ रंगबाजी के 5 साल रहने दें। पिछले 5 वर्षों से यशवंत जी ने पूरी रंगबाजी के साथ अपना यह फक्कड़पन वाला अंदाज जिंदा बनाए रखा है।

भड़ास उनके ब्लाग और साइट का नाम है लेकिन यह भड़ास वह भड़ास नहीं है जैसा पोस्टर में लिखा गया है। भड़ास का एक अर्थ है अपनी भड़ास निकालना यानी बगैर तथ्यों के कुछ भी ऊटपटांग बोलना लेकिन यशवंत के भड़ास में पिछले 5 वर्षों में एक भी पोस्ट गलत नहीं निकली तथा भड़भड़िया नहीं निकली।

उन्होंने जो कुछ लिखा वह सौ प्रतिशत सही निकला। हां रंगबाजी के 5 साल सही हैं क्योंकि बगैर किसी नियमित आय के स्रोत के वे यह साइट चलाते रहे। ठीक कबीर की तरह जो घर फूंके आपना चले हमारे साथ। यही है रंगबाजी कि कोई समझौता नहीं और कोई दीनता नहीं। यशवंत के इस भाव कि न दैन्यं न पलायनं को तो सलाम करना चाहिए। यह रंगदारी का नहीं रंगबाजी का इतिहास है।

    Pawan Shukla हमें भड़ास से बहुत प्रेम है……. इसकी शैली आकर्षक है…..

    Mangaldas Yadav रंगदारी का मतलब होता है कि गुंडई करना। बड़े शहरों खासकर मुंबई और कोलकाता में रंगदारी दादा और मस्तान लोग करते हैं लेकिन रंगबाजी तो ठेठ अवधी का शब्द है जिसका मतलब होता है फटेहाल रहकर भी मूल्यों से समझौता न करना। यशवंत भाई के जज्बे को सलाम।
 
    Purnima Awasthi aise shaks ko hamara bhi salaam…yehi prarthana ki unki rangbaaji kaayam rahe ……..bin avrodh ke chalti rahe ….smoothly.
   
    Ashish Dixit ysa nahi hi hai ki koi post galat nahi nikali.
    
    Syed Quasim yshwant bhia ki himmat ko salam/
     
    Pradeep Awasthi bahut bahut badhayi
     
    Yashwant Singh शुक्रिया सर. मैं तो सोचता था कि लोग मेरे बारे में बुरा ही सोचते हैं, पर यह देखकर अच्छा लग रहा है कि हम लोगों के काम को जानने-समझने-मानने वाले लोग भी हैं.. गल्तियां हम लोगों से भी हुई हैं, और होंगी भी. क्योंकि मनुष्य जब प्रयोग करता है, हिम्मत करता है, नया कुछ करता है तो उसमें हमेशा असफल होने, गलत होने के खतरे होते हैं. महत्वपूर्ण ये होता है कि हम खुद को कितना खुले दिल दिमाग वाला बना पाते हैं ताकि अपनी गल्तियों को कुबूल करने और खुद को दुरुस्त करने की क्षमता रख सकें. आप सभी को दिल से धन्यवाद.
     
    Aasmohammad Kaif accha likha…
     
    Aasmohammad Kaif haan kyunki yahi hai satya….jeewan ka daund aur sirf daund ..har samay ..samay samay
     
    Mohit Sharma seriously…hats off u Yashwant Sir..
     
    Pavnesh Mishra Ham jante hain is 5 ke aage abhi bahut sare 0 lagne hain, Sadar Shubhkamna.
     
    राकेश कुमार सिंह सौ प्रतिशत सही निकला। बेजुबान की आवाज बने, जो खबरे बल पूर्वक दबाई जाती है उन्हें भडास ने छापा मेरा एक व्यक्तिगत अनुभव रहा है ये बात अलग है की मैं वक्त पर सलीके से अपनी बात भडास से नहीं कह पाया। अन्यथा रूपये के प्रतीक का कलंक देश पर नहीं लग पाता।
     
    Choudhary Neeraj यशवंत जी को इतनी लोकप्रियता के बावजूद घमंड छू भी नहीं पाया है….आज भी जमीन से जुडे़ व्यक्ति हैं। भड़ास 4 मीडिया की तरह कई लोगों ने साइट बनाई पर सफल न हो सकीं।
     
    Subhash Tripathi Exactly correct sir.
     
    Sanjaya Kumar Singh रंगबाजी और रंगदारी तो यशवंत ने जेल से आने के बाद लिखना शुरू किया। उनपर रंगदारी मांगने का आरोप लगा तो उन्होंने भड़ास को दिए जाने वाले सामान्य चंदा और शुल्क को भी रंगदारी का नाम दे दिया और बाकी यह सब तो वो रंगबाजी से करते ही रहे हैं। इसलिए भड़ास और रंगबाजी के तो पांच साल हो गए। तकनीकी तौर पर रंगदारी के पांच साल पूरे नहीं हुए हैं। यशवंत इस रंगदारी के भी पांच नहीं पचास साल पूर्ण करें। शुभकामनाएं।
     
    Amit Kumar Bajpai 100% Right sir.

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.


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