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रजत शर्मा ने नरेंद्र मोदी के लिए सवालों का पर्चा लीक कर दिया था!

Sanjaya Kumar Singh : नरेन्द्र मोदी 'आपकी अदालत' में। रजत शर्मा बता रहे हैं यह इंटरव्यू करना उनके लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं था। और उन्होंने उनसे वो सारे सवाल पूछे हैं जो जनता उनसे पूछना चाहती है। और नरेन्द्र मोदी ने उनका जवाब भी दिया (इस दफा पानी नहीं मांगा)। रजत शर्मा इसे 'आपकी अदालत' के 21 साल का सबसे महत्त्वपूर्ण इंटरव्यू बता रहे हैं इसे और ये भी चाहते हैं कि जनता वोट देने से पहले इसे देख ले (हालांकि बड़ी देर कर दी आते-आते) और मैं तो वोट दे चुका। फिर भी, देख ही लिया जाए – रजत शर्मा को और नरेन्द्र मोदी को भी।

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Sanjaya Kumar Singh : नरेन्द्र मोदी 'आपकी अदालत' में। रजत शर्मा बता रहे हैं यह इंटरव्यू करना उनके लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं था। और उन्होंने उनसे वो सारे सवाल पूछे हैं जो जनता उनसे पूछना चाहती है। और नरेन्द्र मोदी ने उनका जवाब भी दिया (इस दफा पानी नहीं मांगा)। रजत शर्मा इसे 'आपकी अदालत' के 21 साल का सबसे महत्त्वपूर्ण इंटरव्यू बता रहे हैं इसे और ये भी चाहते हैं कि जनता वोट देने से पहले इसे देख ले (हालांकि बड़ी देर कर दी आते-आते) और मैं तो वोट दे चुका। फिर भी, देख ही लिया जाए – रजत शर्मा को और नरेन्द्र मोदी को भी।

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Sanjaya Kumar Singh : 'आपकी अदालत' में नरेन्द्र मोदी के प्रदर्शन को लोग बढ़िया बता रहे हैं। मुझे तो लग रहा था कि प्रश्नपत्र लीक हो गया है पर Chanchal जी ने बताया है कि कैसे एक बार राजेश खन्ना ने इस अदालत में आने से पहले तैयारी की थी। इसलिए, मान लेते हैं कि मोदी तैयारी करके आए थे, प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था। इंटरव्यू इस लिहाज से अच्छा हो सकता है कि जिस मकसद से था, उस मकसद में दोनों लोग कामयाब हुए होंगे। पर इंटरव्यू तब अच्छा होता जब उसके कायदे के जवाब दिए जाते। जैसा उन्होंने कुत्ते के बच्चे के सवाल के जवाब में दिया। 56 ईंच का सीना वाला मामला उन्होंने ठीक स्पष्ट किया पर ये नहीं बताया कि ये 56 ईंच आया कहां से। इसी तरह, हर हाथ लूट, हर होंठ झूठ जैसे जवाब ताली बजवाने के लिए ही ठीक होते हैं। इससे नया वोटर नहीं बनता। आनंद शर्मा के आरोप के बारे में उन्होंने कहा कि जांच करवा लें। ये कोई जवाब नहीं था। उनके कहने से कोई नहीं मानेगा कि पैसे खर्च नहीं हो रहे हैं या कम हो रहे हैं। उन्हें कहना चाहिए था कि सब सामने है, खर्च का हिसाब चुनाव आयोग रखता है, पार्टी हिसाब देगी आदि। इसी तरह, गुजरात में आरटीआई नहीं है के जवाब में उन्होंने पूछा कश्मीर में है क्या। उनके जवाब गंभीर नहीं, ताली बजवाने वाले थे। इसके अलावा जो सवाल नहीं पूछे गए वो अपनी जगह हैं।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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