रमन कृपाल की स्टोरी पर डील करके तेजपाल ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था!

नई दिल्ली. 'तहलका' के कुछ सहयोगियों का मानना है कि तरुण तेजपाल वर्षों पहले पतन के रास्ते पर चल पड़े थे. आरोप है कि उन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री से डील करके अवैध खनन पर बनी खुफिया स्टोरी को नहीं चलने दी और जिस रिपोर्टर ने वह स्टोरी की थी उसे तहलका से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. तहलका के पूर्व पत्रकार रमन कृपाल ने साल 2011 में गोवा में 800 करोड़ के अवैध खनन का पर्दाफाश किया था. कायदे से वह स्टोरी तहलका मे छपनी चाहिए थी क्योंकि स्टोरी करते वक्त रमन कृपाल तहलका के पत्रकार थे. लेकिन वह स्टोरी छपी फर्स्टपोस्ट में. इस खास स्टोरी के बाद रमन कृपाल को तहलका से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. उसी समय ये खबर आयी थी कि स्टोरी दबाने के लिए तरुण तेजपाल ने गोवा के मुख्यमंत्री दिगंबर कामत से डील किया है.

गोवा में अवैध खनन पर बनी स्टोरी को रोकने की खातिर दिगंबर कामत और तरुण तेजपाल के बीच तथाकथित डील पर अटकलों का बाजार गर्म हो चुका था. और इसी समय पुणे के मशहर रंगकर्मी हरमन डिसूजा ने 27 अक्टूबर 2011 को हिंदुस्तान टाइम्स में एक लेख के जरिए तरुण तेजपाल पर सवालिया निशान लगाया. हरमन डिसूजा ने अपने पूरे लेख में कहीं भी तहलका या तरुण तेजपाल का नाम नहीं लिया था लेकिन उनके लेख के 3 दिन बाद 30 अक्टूबर 2011 को तरुण तेजपाल ने हिंदुस्तान टाइम्स के जरिए अपनी सफाई दी. फिल्मी अंदाज के हेडर के साथ कि- ''अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है?''

पढ़िए कुछ लाइनें…

''हरमन डिसूजा निश्चित रुप से एक सम्मानित शख्स हैं. लेकिन वो ऐसे एक शख्स हैं तो तथ्यों से दूर रहकर बातें करते हैं. साथ ही कल्पनालोक में जीते हैं. जब मैंने उनसे कहा कि गोवा में जो घर हमने लिया है उसकी कीमत दिल्ली में एक बेडरुम के घर से भी कम है तो वो कहने लगे कि वो भी आजतक गोवा में एक घर नहीं खरीद पाए. जब मैंने ये कहा कि जिस रिपोर्टर के बारे में उन्होंने लिखा है उसे खराब काम की वजह से निकाला गया है तो वो कहने लगे कि जल्दी ही ये दुनिया पानी, उर्जा औऱ खाने की कमी की वजह से खत्म हो जाएगी. जब मैंने कहा कि हम कोई खनन नहीं करते हैं. हमारे निवेशक खनन नहीं करते हैं. कोई खनन माफिया मेरा दोस्त नहीं है और ना ही हमने अपनी पत्रिका के थिंक फेस्टिवल के लिए गोवा के किसी खनन कंपनी से कोई पैसा लिया है तो वो कहने लगे कि दुनिया में जहां कहीं खनन होता है वो गलत है.''

तरुण तेजपाल ने इस लेख को लिखते समय फिल्मी अंदाज में लिखा था कि ''अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है''. हरमन डिसूजा को पहले गुस्सा आया था या नहीं. इसका पता नहीं. लेकिन तेजपाल के इस लेख को पढ़ने के साथ वो गुस्से से आग बबूला हो गये थे. और इस गुस्से की झलक दिखी थी 3 नवंबर 2011 को उनके लेख- an open letter to tarun tejpal में…

''मेरी जिंदगी में शायद ये पहला मौका है जब मुझे अफसोस हो रहा है कि काश मेरे पास एक स्मार्ट फोन होता तो मैं उसकी बकवास बातचीत को रिकॉर्ड कर लेता. तरुण तेजपाल मुझसे फैक्ट्स चाहते हैं. वो गौर से तथ्यों को देखें. जिस पत्रकार की खबर को उन्होंने तहलका में नहीं छपने दिया वो गोवा में फल फूल रहे अवैध खनन पर अबतक की सबसे मुकम्मल स्टोरी थी. उसने राज्य के 90 खानों में से 48 खानों में हो रही धांधलियों पर से परदा उठाया था. पिछले चार साल में 95 लाख टन लौह अयस्क के अवैध खुदाई की जानकारी दी थी. मतलब 800 करोड़ रुपये के अवैध खनन का सबूतों के साथ खुलासा किया था. अपने लेख में हरमन डिसूजा ने आगे खुलासा किया है कि कैसे इतनी बड़ी स्टोरी तहलका में छपते छपते रह गई थी. तहलका के रिपोर्टर (रमन कृपाल) 11 मार्च 2011 को पूरे मामले पर सीएम की प्रतिक्रिया जानने के लिए दिगंबर कामत से मिले. तब दिगंबर कामत ने उनसे पूछा कि तरुण तेजपाल गोवा कब आ रहे हैं. मुख्यमंत्री ने ये भी बताया कि तरुण तेजपाल ने दिल्ली के एक ताकतवर राजनेता के जरिए मैसेज दिया है कि वो गोवा आ रहे हैं. रिपोर्टर (रमन कृपाल) दिल्ली पहुंचे तो उन्हें स्टोरी में कुछ कमी बताकर फिर से गोवा भेज दिया गया. इसी समय हमें खबर मिली की या तो खुद तरुण तेजपाल ने या फिर उनके किसी आदमी ने सीएम दिगंबर कामत से मुलाकात की है. और उसी समय ये भी खबर आय़ी कि तहलका ने अपने थिंकफेस्ट कार्यक्रम के लिए गोवा सरकार से माल लिया है. उस समय गोवा के पर्यावरणविदों को ये जानकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ कि उस दौरान उस पत्रिका के प्रतिनिधियों ने गोवा सरकार औऱ खनन माफियाओं से संपर्क करके कहा कि पहले हमने अवैध खनन पर एक खबर की और फिलहाल उस खबर को रोक कर रखा है. उसी दौरान पत्रिका के मालिक ने गोवा के गांव में एक पुराना घर भी खरीद लिया.''

(कानाफूसी)

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