रविसंकरा पगला गया है, पढ़िये, इसने कैसा बयान दिया है

एक श्रीश्री श्रेणी के रविशंकर हैं, जो खुद को श्री श्री रविशंकर कहते कहलाते हैं. इन्होंने बड़ा भद्दा बयान दिया है. इसने कहा है कि सरकारी स्कूलों से निकलते हैं नक्सली. इस कथित आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर का कहना है कि सरकारी स्कूल नक्सली पैदा कर रहे हैं. समाचार एजेंसियों ने इस बाबा का बयान जारी किया है. आर्ट आफ लीविंग सिखाने वाले इस आदमी ने जयपुर में कहा कि अक्सर देखने में आता है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लड़के नक्सलवाद और हिंसा की राह पर चल पड़ते हैं.

उनका कहना है कि निजी स्कूलों से निकले बच्चों के मामले में ऐसा नहीं होता है, वे आगे बढ़ते हैं और इसके लिए शिक्षक जिम्मेदार हैं. उन्होंने ये भी कहा कि भारत के सभी स्कूलों का निजीकरण कर देना चाहिए और स्कूल चलाने में सरकार की भूमिका नहीं होना चाहिए. इस बयान के बाद फेसबुक पर भी लोग रविसंकरा को गरिया रहे हैं. नए बने एक फेसबुकी ग्रुप जनसत्ता में Pramod Kumar Srivastava लिखते हैं- ''आर्ट ऑफ़ लिविंग का धंधा चलाने वाले रविशंकर ने कहा है की सरकारी स्कूलों को बंद कर देना चाहिए क्योंकि वहां से ही नक्सल्वादी पैदा होते हैं. जबकि निजी स्कूलों से आदर्शवादी व संस्कारित बच्चे पैदा होते हैं. क्या यह भारत के नौजवानों को शिक्षा के आधार पर बाटने की साजिश नहीं है. ऐसे वक्तव्य देने वाले किस आर्ट ऑफ़ लिविंग की शिक्षा दे रहे हैं. लोग इनका boycott क्यों नहीं कर रहे हैं.'' इस पर दर्जन भर से ज्यादा कमेंट आए हैं, जो इस प्रकार हैं-

        RakeshKiran Rakesh : I boycott frm. this very moment ..In wait others aslo do asap
 
        Ashish Awasthi : हिन्दोस्तान आदि काल से सपेरे बाबाओं लुटेरे और मदारियों का देश रहा है …… इन का खुल के विरोध होना चाहिए …… ऐसे ही एक और बाबा है बाबा निर्मल गज़ब है यह देश और इसकी आवाम
 
        Sandeep Verma : ये आदमी चांदी कि थाली में खाना खाता है ,संपन्न बनिए इसका पेट भरते हैं इसको देख कर तो सोंचता हूँ अब वालमार्ट आ ही जाना चाहिए. इतना गन्दा वक्तव्य छापनें के बाद पत्रकारों को अपनी कलम तोड़कर विरोध करना चाहिए .
   
        Ashish Awasthi : रविशंकर के आगमन पर हर अकबार लगभग धार्मिक कर्मकांड की तरह होने वाले आयोजनों को लिखता है … सम्लित लोगो की प्रतिक्रिया छपता है .. इसके बरक्स तमाम ऐसे गतिविधि जो समाज और आम चेतना को आगे लेजाती है को हासिये पे दाल देता है या गायब कर देता है
    
        Sandeep Verma : वैसे यह तो घोषित रूप से संघ का चेहरा है , उसी नें इसे बड़ा बनाया है .
     
        Anamika Shimla : बाबा रामदेव ,अन्ना के बाद अब रविशंकर
      
        Ashish Awasthi : ९० के बाद से ब्रांडेड चैनल का वरदहस्त पाए बाबाओ और ममता मयी माओं में अचानक वृधि देखि गयी है … कारन स्फास्त है

        Anamika Shimla : नब्बे फीसद बच्चे सरकारी स्कूल से निकलते है .रविशंकर ने इस देश की बड़ी और गरीब आबादी का भी मजाक उड़ाया है
 
        Sandeep Verma : अन्ना को संघ का चेहरा कहना गलत है ,अन्ना के पीछे संघ आया ,जैसे जेपी या वीपी के पीछे आया था . मगर रामदेव और रविशंकर को तो संघ नें ही पैदा किया है .
        
        Ashish Awasthi : अन्ना घोषित संघ का आदमी है … अब तो सब फास फास हो चूका है … कहने का कोई अर्थ नहीं है
       
        Sandeep Verma : भ्रस्ताचार ज्यादा बड़ा मुददा हैं ,अगर इससे जित जायेंगे सम्प्रदायिका से तो चुटकियों में निपट लेंगे .आने दीजिए संघ को इस् लड़ाई में , संघ के डर से भ्रष्टों का घुला छुटाना ठीक नहीं . ..साप्रदायिकता भी एक भ्रस्ताचार ही है सामाजिक भ्रस्टाचार .ईमानदार समाज में उसकी तो जगह ही नहीं है ,
      
        Pankaj Srivastava : श्री श्री रविशंकर का विरोध करने वाले अहमक हैं…ये भी नहीं देखते कि वो डबल "श्री' हैं…मेरी राय है कि उन्हें योजना आयोग का सदस्य बनाया जाए…..मनमोहन-मंटोक की जोड़ी को उनका जैसा मार्गदर्शक मिल गया तो गरीबी के बाद अशिक्षा भी उड़नछू हो जाएगी…वैसे भी सरकारी स्कूलों पर खर्च करना फिजूलखर्ची ही है ….. जंबूद्वीप में पैदा होने वाला हर बच्चा पैदाइशी पंडित यानी विद्वान है…..दास कबीर भी कह गए हैं कि पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया ना कोय…तो सरकार इस पाप में क्यों शामिल हो….जो ना मानें वो प्राइवेट स्कूल में पढ़ें….माया के चक्कर में पड़ें…पर जीने की कला उन्हें आएगी नहीं..जय हो इस श्री..श्री..श्री…सिरी..सिरी…सिड़ी …..की.
     
        Sumant Bhattacharya : श्री श्री रविशंकर को पद्मश्री दिया जाए..तुकबंदी अच्छी बैठ रही है श्री श्री रविशंकर पद्ममश्री

 

 
 

 

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