रवीश कुमार ने ज़मीन पर बैठे दलित पंचू को खाट पर बिठाकर सच्ची पत्रकारिता की

Mohammad Anas : रवीश ने ज़मीन पर बैठे पंचू को ही खाट पर नहीं बैठाया था बल्कि पंचू जैसे करोड़ों दलितों की अस्मिता/सुरक्षा और प्रेम को भी खाट पर बैठाया था. जियो रवीश. आप गंगा पार के उस ब्राह्मण बहुल गाँव में हैं जहाँ हर घर से एक आईएएस और दो पीसीएस ऑफिसर हैं. जब घर में रह रहे बुजुर्गों में ब्राह्मणवाद बचा रह गया है तो उन बच्चों में कितनी भीतर तक धंसा होगा जो देश के विभिन्न कोने में कार्यरत हैं. ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद!

Samar Anarya : रवीश कुमार और एनडीटीवी के कैमरों के सामने होने के बावजूद एक दलित को चारपाई पर बैठने में जो डर है (यह हिचक नहीं है) वह अपना असली रुझान 'सर्वे' टीमों को बताएँगे? बाकी गरिमा की यही लड़ाई प्रतिरोध बन असली वोटों में तब्दील होती है. इसी जनता का जवाब उत्तर प्रदेश में भाजपा को 51 सीट देने वालों के कान में 16 मई को सुगम संगीत सा बजने वाला है.

Anurag Anant : ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद!! देखो चेहरा ब्राह्मणवाद का घिनौना चेहरा…!! अभी अभी रवीश का प्रोग्राम एनडीटीवी पर चल रहा है. प्रोग्राम के बीच में एक दलित चलते हुए आये और एक मोटा पंडित बैठा हुआ था खटिया में, बेचारे पंचुलाल नाम के दलित बुजुर्ग जमीन पर बैठ गए. रवीश ने प्रतिवाद किया और कहा कि मैं आपको दुबारा छोड़ कर चला जाऊंगा अगर आप इन्हें खटिया में नहीं बैठाएंगे. तब कहीं जा कर कम दिमाग के ब्राह्मण ने उन बुजुर्ग को खटिया पर बैठने दिया. पूरा कुंठित ब्राह्मणवाद देखा जा सकता है अबी देखिये !! यही कारण है रवीश को मैं पत्रकारों का पत्रकार कहता हूँ. सच्चा भारत दिखता है ये आदमी….ब्राह्मणवाद हो बर्बाद !!

Shyam Tyagi : फूलपुर में दलित को ब्राह्मण की खाट पर बैठाकर रवीश कुमार ने पत्रकारिता की लाज बचा ली। मुझे लगा एक पत्रकार के सामने दलित जितना नीचे बैठेगा पत्रकारिता उससे ज्यादा नीचे चली जाएगी लेकिन रवीश पलटे और दलित को ब्राह्मण की खाट पर बैठाने को लेकर अड़ गए, उस एक दलित के जरिए रवीश ने पूरे देश के लोगों का सम्मान बढाया है।। जय हो….

(मोहम्मद अनस, समर अनार्या, अनुराग अनंत, श्याम त्यागी के फेसबुक वॉल से)

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