रसाज टाइम्‍स के संपादक के विरुद्ध एफआईआर की खबर जागरण ने क्‍यों नहीं छापी?

रईस अहमद बदायूं के मूल निवासी हैं और मुंबई में रहते हैं, वहाँ इनका बड़ा कारोबार बताया जाता है. पिछले कुछ दिनों से इनकी गतिविधियां बदायूं में बढ़ गई हैं. राजनीति में भी रुचि दिख रही है. लोकसभा क्षेत्र बदायूं से विभिन्न दलों से टिकट मांगने की चर्चा होती रही है. सामाजिक कार्यों में भी बढ़ कर भाग लेते दिख रहे हैं. पिछले दिनों हुये बदायूं महोत्सव में सह-संयोजक थे. चर्चा है कि लाखों रुपए देकर यह पदवी मिली थी, साथ ही मीडिया में भी आ गए हैं.

रसाज़ टाइम्स नाम से साप्ताहिक अखबार निकालने लगे हैं. कंटेंट और ले-आउट की बात छोड़िए. खास बात यह है कि अमर उजाला की बरेली प्रेस में छपता है. इस अखबार का दूसरा संस्करण मुंबई से निकलता है. खैर, होली-दिवाली के मौके पर पत्रकारों पर भी मोटी मेहरबानी दिखाते रहे हैं, सो कई पत्रकार इनके खास चेले हैं. एक जमीन पर कब्जे को लेकर थाना सिविल लाइन में इनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ, जिसे आज हिंदुस्तान ने पेज-3 की लीड खबर बनाया है. वहीं अमर उजाला ने खबर छाप कर कर्तव्य की इति श्री की है, लेकिन जागरण पूरी खबर ही हजम कर गया. जागरण की यह हरकत दिन भर चर्चा का विषय बनी रही.

अमर उजाला
हिंदुस्‍तान

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