राजदीप और आशुतोष पहुंच रहे इंदौर लेक्चर देने… आप सब इनका विरोध करें, नारे लगाएं

धन्य हैं राजदीप सरदेसाई और आशुतोष. इन लोगों ने अपने चैनलों में काम करने वाले चार-पांच सौ लोगों को अभी कुछ ही रोज पहले निकाल बाहर किया और अब ये लोग 'पत्रकारिता का नया दौर और चुनौतियां' नामक विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद में लेक्चर देने जा रहे हैं. अंबानी के इन दोनों दलालों का भाषण इंदौर में 28 सितंबर को सुबह साढ़े दस बजे होगा, इंदौर के विजयनगर में स्थित होटल फार्च्यून लैंडमार्क में. इस कथित राष्ट्रीय परिसंवाद में वो राष्ट्रीय लायजनर भी है, जिसका नाम अनुराग बत्रा हुआ करता है.

ये अनुराग बत्रा देश का बड़ा लायजनर और मार्केटियर है. जाहिर है, राजदीप और आशुतोष जैसों का साथ ऐसे ही लोग देंगे. मेरा सवाल ये है कि क्या इंदौर में इस आयोजन में कोई ऐसा वीर पुत्र होगा जो भरे आयोजन में इन दोनों, राजदीप और आशुतोष के संभाषण-प्रलाप के दौरान सवाल उठाएगा कि आखिर उनने कैसे अपने यहां के सैकड़ों लोगों की अकारण छंटनी को बर्दाश्त कर लिया और क्या उन्हें पता है कि उनके यहां से निकाले गए लोग किस मुश्किल में जी रहे हैं… साथ ही यह भी कि क्या वे दोनों, राजदीप और आशुतोष अंबानी के दलाल हैं या नहीं हैं… अगर नहीं हैं तो वे अंबानी के इशारे पर की गई पत्रकारों के सामूहिक कत्ल के दौरान चुप्पी क्यों साधे रहे? क्या उनका फर्ज नहीं बनता था कि वे अपने साथियों के साथ खड़े होते और पूंजीपतियों-कारपोरेटों के इस शोषण-उत्पीड़न का विरोध करते?

भाइयों, उठो, चेतो. यही दौर है जब हम आप इन जैसों को पब्लिक में एक्सपोज कर सकते हैं अन्यथा ये लोग दोनों हाथों में लड्डू थामे खुद को महाप्रभु मानते रहेंगे. इन लोगों ने अगर अंबानी के पाले में होना स्वीकार किया है तो इन्हें कोई हक नहीं है पत्रकारिता पर बोलने का. इन्हें मैनेजमेंट के सवालों पर होने वाले सेमिनारों में बुलाया जाना चाहिए जिसका विषय हो कि ''कैसे बल्क में छंटनी कराएं और सब कुछ शांति से निपटाएं'' या फिर ''कैसे मुखौटा पहनकर पत्रकार भी कहलाएं और मालिक के दलाल भी बने रह जाएं''. इंदौर की जनता से आह्वान है, इंदौर के रीढ़ वाले मीडियाकर्मियों से आह्वान है, इंदौर के युवाओं से आह्वान है कि 28 सितंबर को जब ये राजदीप और आशुतोष बोलने के लिए उठें तो इनसे इतने सवाल करो कि ये बोल न पाएं, इन्हें शेम शेम कहो, इन्हें अंबानी के दलाल कहो, इन्हें पत्रकारिता के खलनायक कहो, इन्हें कारपोरेट के लठैत कहो, इन्हें बाजारू पत्रकारिता की अवैध संतान कहो… इन्हें इतना कुछ कहो कि इन्हें सोते जगते ये नारे याद आएं और ये आगे से फिर किसी पत्रकारिता के लेक्चर कार्यक्रम में जाने से घबराएं..

देखना है कि इंदौर की धरती पर कोई वीर है या नहीं.. अगर दिल्ली में इन दोनों का कोई कार्यक्रम हुआ और मुझे पता चला तो मैं तो कार्यक्रम में घुसकर नारे लगाऊंगा… जो कि हमारा आपका लोकतांत्रिक अधिकार है… हमें गलत करने वालों का विरोध करने का हक है.. और ये हक हमें लोकतंत्र ने दिया है.. इस अधिकार, इस हक का हमें उपयोग करना चाहिए अन्यथा ऐसे ही चिरकुट लोग दिन ब दिन अपने गलत कारनामों के बल पर आगे बढ़ते रहेंगे और हम आप केवल टुकुर टुकुर ताकने देकने का काम करेंगे.. इसलिए हे इंदौर के वीर सपूतों.. उठा जागो और ललकारो…

यशवंत

एडिटर

भड़ास4मीडिया

मोबाइल 09999330099

मेल yashwant@bhadas4media.com

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