राजनीतिक पार्टियों की शह पर आपके लाइक्स खरीद रही हैं आईटी कंपनियां, आपका सिस्टम हो रहा है हैक…

Nadim S. Akhter : कोबरा पोस्ट ने शानदार खुलासा किया है. इंटरनेट की दुनिया में बहुत बड़ा रैकेट और फ्रॉड चल रहा है सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से. राजनीतिक पार्टियों की शह पर आपके लाइक्स खरीद रही हैं आईटी कंपनियां… आपका सिस्टम हो रहा है हैक… ये नई शताब्दी है, सो अब चुनाव के नतीजे भी सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से प्रभावित करने के तरीके अपनाए जा रहे हैं. लाइक्स और फोलोवर ढूढे जा रहे हैं. आपके लैपटॉप हैक किए जा रहे हैं और आपको पता भी नहीं चल पा रहा है.

और ये सब बहुत सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है. बड़ी आईटी कंपनी पॉलिटिकल पार्टियों-नेताओं से ठेका लेती हैं और छोटी कंपनियों को आउटसोर्स कर देती हैं. कई कंपनियां तो विरोधी खेमे के नेताजी को ठिकाने लगाने के लिए जासूसी तक करवा रही हैं. कई आईपी एड्रेस से काम हो रहा है, कई लेवल पर. कार्टून बनाने, टिप्पणी लिखने से लेकर उसे लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचाने तक का. Trajon जैसे वायरस की मदद ली जा रही है जो बिना बताए आपके सिस्टम में घुसकर आपकी राय चुराती है और उनको देती है. अगर तगड़ा अपडेटेड एंटी वायरस आपके सिस्टम में नहीं हैं, तो गए आप काम से. आपके दूसरे गोपनीय डेटा भी इनके हाथ लग सकते हैं.

सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नेताजी का इमेज मेकओवर करने के लिए ये कंपनियां सबकुछ करने को तैयार हैं. बताया जा रहा है कि बीजेपी के नेता इसमें सबसे आगे हैं. दूसरी पार्टियों के भी हैं. कुछ कंपनियों ने ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया है जो बूथ वाइज ये बता सकती हैं कि कहां किस धर्म-जाति के कितने लोग हैं. एक मामले में तो अल्पसंख्यकों को बूथ पर जाने से रोकने के लिए हल्के धमाके भी कराए गए ताकि वो घरों से बाहर ना निकलें. और उनको घर से बाहर नहीं निकलने का मैसेज सोशल साइट्स पर ये कम्पनियां छद्म रूप में दे रही हैं.

इन आईटी कंपनियों के गोरखधंधे का सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और साइबर कानून में जरूरी बदलाव किए जाने चाहिए. ये एक खतरनाक ट्रेंड की शुरुआत है, जिस पर लगाम नहीं लगा तो कल को सरकार को इसी बहाने सोशल नेटवर्किंग साइट्स को भी कंट्रोल करने का बहाना मिल जाएगा, जो सरकार चाहती भी है. वह अलग-अलग कारण गिनाकर पहले भी कह चुकी है कि इनका गलत इस्तेमाल हो रहा है. अगर ऐसा हुआ तो (हालांकि हो नहीं पाएगा) फिर आप यहां भी लिखने के लिए स्वतंत्र नहीं होंगे.

परमिशन लेकर लिखना होगा और अगर हाकिम को लगा कि आपका लेखन गलत है तो आप बुरे फंसे. अभिव्यक्ति की आजादी के लिए यह बहुत बुरा होगा. आप भी कोबरापोस्ट का स्टिंग पढ़िए और खुद फैसला कीजिए. किसी भी राजनीतिक पार्टी का पक्ष लिए बगैर सोचिए कि ऐसी आईटी कंपनियों पर तुरंत शिकंजा कसा जाना चाहिए या नहीं. मेनस्ट्रीम मीडिया को इस मामले में लंबी-चौड़ी बहस और खबर करनी चाहिए, जैसा वो तरुण तेजपाल के मामले में कर रही हैं.

तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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