राजनेता अपना स्‍तर सुधारें तो मीडिया भी संयम बरते

: लोकमत समाचार के मालिक और राज्‍यसभा सांसद विजय दर्डा की किताब विमोचित : नई दिल्‍ली  : क्या भारत के राजनेताओं में अलोचना सुनने की क्षमता खत्म हो रही है? क्या मीडिया को बांधने की कोशिश में सारे राजनेता एकजुट हैं? कुछ ऐसे ही तीखे सवालों के कठघरे में बुधवार को देश के कई नेता एक साथ घिरे नजर आए। नेता विपक्ष अरुण जेटली, मणिशंकर अय्यर, लालू प्रसाद यादव, सीताराम येचुरी सहित पक्ष और विपक्ष के आधा दर्जन नेताओं ने मीडिया के हाथों ट्रायल पर रोक की तो मांग की लेकिन यह भी माना कि राजनेताओं को भी अपना स्तर सुधारना होगा। मीडिया और राजनेताओं के रिश्तों पर आयोजित परिचर्चा में नेता इस सवाल पर सफाई देते रहे कि राजनेताओं ने आखिर अपनी आलोचना को सहजता से लेना क्यों बंद कर दिया है?

नेता विपक्ष अरुण जेटली समेत अधिकतर वरिष्ठ नेताओं का तर्क था कि राजनीतिक वर्ग की आपत्ति आलोचना से नहीं लेकिन मीडिया और खासकर टीवी चैनलों के माध्यम से ट्रायल पर है। जेटली ने जोर दिया कि कार्टून पर विवाद को पैमाना न माना जाए क्योंकि राजनेताओं की ही सबसे अधिक आलोचना होती है और वो आलोचना को स्वस्थ तरीके से लेते भी हैं, लेकिन कुछ जवाबदेही मीडिया को भी तय करनी होगी। पूर्व पत्रकार व सांसद एचके दुआ ने भी कहा कि राजनेताओं को अपनी तारीफ संतुलित पत्रकारिता लगती है और आलोचना किसी एजेंडे का हिस्सा।

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में राज्यसभा सांसद विजय दर्डा की पुस्तक सीधी बात के विमोचन के मौके पर आयोजित परिचर्चा के मंच पर मौजूद मणिशंकर अय्यर ने स्वीकार किया कि संसद में अच्छी सकारात्मक बहस बंद हुई तो मीडिया ने उसका स्थान ले लिया। करीब डेढ़ घंटे चली विचारोत्तेजक बहस में नेताओं ने भी मीडिया को लेकर अपनी शिकायतों का पिटारा खोला। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की शिकायत थी कि टीवी बहसों के दौर में संयम की सीमाएं लांघ दी जाती हैं। माकपा नेता सीता राम येचुरी ने कटाक्ष किया कि देश का लोकतंत्र टीवी बाइट से संचालित हो रहा है। (जागरण)

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