राजीव नयन बहुगुणा की बांसुरी और माधो दास की उदासीनता (देखें दो वीडियो)

Yashwant Singh : माधो दास जी उदासीन क्यों हैं? ये मैंने जाना उनके एक दिनी दिल्ली प्रवास के दौरान. तब ठीकठाक सर्दियों के दिन थे. फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती दिल्ली में मुलाकात के बाद और प्रगाढ़ हुई. एक दूसरे के मन-मिजाज को नजदीक से जानने का मौका मिला. माधो दास जी उदासीन संप्रदाय से जुड़े हुए हैं. भिक्षाटन करके भोजन करते हैं.

बचपन में उन्हें गुरुजी को सौंप दिया गया था. जवान हुए तो एक मोबाइल कंपनी में नौकरी कर दुनियादार बने. लेकिन देर तक न टिक सके. वापस आश्रम लौट आए. बचपन, नौकरी, जीवन, आश्रम, भिक्षाटन, उदासीनता, संयम आदि विषयों पर माधोदास उदासीन जी से बातचीत हुई. माधो दास जी कई कल्याणकारी कार्य करते हैं. बच्चों को पढ़ाते लिखाते हैं. सब कुछ जानिए इस इंटरव्यू को देख-सुन कर … क्लिक करें.. http://www.youtube.com/watch?v=DKLmnVja8-Y

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Yashwant Singh :  मैं Rajiv Nayan Bahuguna से कभी मिला तो नहीं लेकिन उनके बिंदास, बेबाक और संवेदनशील स्वभाव का प्रशंसक हूं. Rajiv ने अपने जोरदार पत्रकारीय संस्मरण लिखे हैं कई पार्ट में.. उसे पढ़ कर और उनके एफबी स्टेटस देख-देख कर उनके बारे में राय बना पाया हूं कि वे अदभुत जीव हैं. होली से ठीक पहले उन्होंने अपना एक वीडियो रिलीज किया है. बांसुरी बजाते और गाते… मजा आ गया… आप भी आनंद लीजिए.. क्लिक करिए…http://www.youtube.com/watch?v=XDL5JsXLko8

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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