राज्‍य सभा में आमिर खान की सीट पक्‍की!

Om Thanvi आमिर ख़ान के टीवी अवतार में देश के लिए प्यार है या व्यापार, इसे छोड़िए; मेरे मित्रों रवीश कुमार और अजीत अंजुम से लेकर विनीत कुमार तक की गहन टीकाएँ इस पर आप पढ़ चुके हैं. मेरा तो फ़िलहाल इतना ही कहना है कि यह (जयते) कुछ गीला ज़्यादा है. बहरहाल, एक भविष्यवाणी ज़रूर करना चाहता हूँ, कि राज्यसभा में आमिर की सीट पक्की. और ऐसा हुआ तो वे वहां धर्मेन्द्र-हेमामालिनी से यक़ीनन बेहतर साबित होंगे. क्योंकि वहां न उदय शंकर होंगे, न रोने-पीटने वाले दर्शक, न तुरता विश्लेषक. बाज़ार के लिए और समाज के लिए असर पैदा करने वाली आवाज़ों का फ़र्क़ तब पता चलेगा.

Pc Acharya : desh ki sabse badi panchaayt mai AAMIR kitna kr paayge.intzaar rahega.bahut sateek tipnni, sadhuwaad sir…….

Rishi Kumar Singh : लोगों ने ऐसे कहा कि जैसे पूरे मामले पहली बार कोई बात की गई हो…और समस्या पूरी की पूरी गायब हो गई हो। कितनी जल्दबाजी में रहते हैं लोग…..ताज्जुब होता है..

Arvind Singh Sikarwar : Sara media bhi to lag gaya hai branding krarne .Let see hota hai kya

Vibhuraj Chaudhary : बाजार और सरोकार दोनो अलग अलग चीजें हैं…. दोनो का कोई रिश्ता नहीं है…. मीडिया में आमिर के चारण इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहें हैं तो उनकी अपनी मजबूरियां और स्वार्थ हैं…. सरोकार और संवेदनाओं के बाजार का दोहन नया शगल है… आमिर बस यही साबित कर रहे हैं कि इस बाजार से भी विज्ञापन राजस्व की उगाही की जा सकती है….

Sanjay Thakur : omji apke liye hamare mn me bdi ijjat hai. 15 saal pahey janstta k chalte aapki b amir ki bhanti nayak ki chhavi hai. so please apne se kmtr baat krne se prhej brten. no doubt amir business kr rhe hain. lekin amir ke program ko dekhkr ek b admi ka hrdya privrtit hota hai to amir ko vijeta mana jana chahiye.

Vineet Kumar : आपकी इस बात से पूरी सहमति है कि आमिर खान अगर राज्यसभा जाते भी है तो हेमामालिनी और धर्मेन्द्र से बेहतर करेंगे.

Pankaj Shukla : लेकिन, वह तो खुद कह चुके हैं कि उन्हें राज्यसभा नहीं जाना। सरकारें राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार न करने वाले लोकप्रिय लोगों का फायदा और कैसे उठाती हैं? कोई संदर्भ, प्रसंग या व्याख्या हो तो ज़रूर बताएं।

अंशुमाली रस्तोगी : बहुत संभव है…

Aditya Samdershi : I agree with Sanjay Thakurji. Please for God sake hamlog itne Judgemental ku ho rahe hain. Personally, I did not like the concept though I am admirer of Aamir Khan, nonetheless no one could ignore the fact that in this country you have 15+ religious tv channels, 15+ business news channels, and almost 15+ Bollywood gossip channels. Atleast someone is trying something for social cause, as he said that he had spent 2 yrs for 13 episodes of this tv serial. Lets see what it results. Please Om Thanvi sir give him some time, give him some space.

Parmeshvar Sharma : yeh sab usi ke liye ho raha h thanvi ji… u r right…

Maneesh Vyas : Whilst not undermining the work being done by various social workers, NGOs and volunteers, this issue has suddenly and simultaneously become a national issue, thanks to Aamir. Time will tell how soon it fades , but for now it has kindled fire in a lot of hearts.

Asrar Khan : पूंजीवादी व्यवस्था के पास आमिर खान जैसे बहुत से छक्के-पंजे हैं तभी तो तमाम जुल्मो-सितम के बाद भी इन्कलाब की तारीख टलती जा रही है

Laxmi Sharan Mishra : superlike sir

Sp Sharma : I agree with you sir समस्या पूरी की पूरी गायब ?

Ajit Anjum : थानवी जी, आपकी बातों से पूरी तरह सहमत होते हुए कुछ साथियों और उनकी स्थापनाओं से कुछ असहमतियां दर्ज करा रहा हूं ….कई साथी इस बिनाह पर आमिर की कोशिशों को खारिज कर रहे हैं कि आमिर बाजारू हैं, सेलिब्रिटी हैं और ऐसे लोग हर काम सिर्फ अपने मुनाफे -फायदे या बाजार के लिए करते हैं …चलो मैंने मान लिया. आप सही कह रहे हैं. आमिर कम से कम अपने पैसे से चैरिटी तो नहीं कर रहे हैं लेकिन अगर बाजार में रहकर, बाजार के पैसे से ही वो कुछ ऐसे काम कर रहे हैं तो आपको एतराज क्या है …ये कैसे तय हो कि सरोकार वाला काम वही कर सकता है जो झोला लेकर घूमे, सभा-सेमिनारों में जाता रहे और मुखलिसी और सुविधायुक्त जीवन (बीपीएल और एपीएल) के बीच बनी रेखा पर हीं टिककर जिंदगी गुजार रहा हो. आमिर की मंशा चाहे जो भी हो, राज्यसभा जाने की हो या देश की नजरों में खुद को सरोकारी दिखाने की हो …उनके कार्यक्रम के नतीजों पर क्यों नहीं बात होनी चाहिए ….. मुझे लगता है कि कई बार हम सिर्फ इसलिए विरोध करने लगते हैं कि फलां तो बाजार में ऊंची कुर्सी लगाकर बैठा है …तो फिर उसे कैसे हक है कि कुछ ऐसी बात करे या फिर ऐसा काम करे …साथी लोग लगातार आमिर की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं …क्योंकि वो आमिर खान हैं ……और कितने ऐसे लोग हैं जो कर्म करो फल की चिंता न करो की मानसिकता से काम करते हैं …..हर आदमी तो नोटिस लिए जाने के लिए मरा जा रहा है ….दान देने वाला चाहते है कि उसका नाम बोर्ड पर लिखा जाए …किताब लिखने वाला चाहता है कि उसकी किताब का भीड़ में सामूहिक पाठ हो ..

Ajit Anjum :  कॉलम लिखने वाला चाहता है कि उसे सबसे अधिक पढ़ा जाए …एनडीओ चलाने वाला चाहता है कि मीडिया में उसका इंटरव्यू होता रहे …जो जहां जो कुछ भी कर रहा है वो नोटिस लिए जाने की कोशिश भी कर रहा है …कुछ अपवाद भी हो सकते हैं …मैं अपवादों की बात नहीं कर रहा हूं ..

Akbar Rizvi ‎: Ajit Anjum जी आपकी बात से पूरी सहमति है लोग काम से ज्यादा नाम में व्यस्त हैं इसीलिए बदलाव की बयार बहने की बजाय हमेशा से ही उमस का माहौल अपने सिर ओढ़े रखती है।

Sandeep Deo : मीडियाकर्मी राज्‍यसभा से ज्‍यादा कुछ सोच भी नहीं सकते, क्‍योंकि पत्रकारों की अंतिम ख्‍वाहिश यहीं आकर ठहरती है। ता उम्र जुगत भिड़ाते रहते हैं कि राज्‍सभा पहुंच जाएं और अपना हर काम और अपना कलम भी भी इसी आधार पर चलाते हैं। काम का सुख कोई हासिल नहीं करना चाहता, बाजार बनने को हर कोई तैयार है। राज्‍यसभा एक बाजार ही तो है…जहां पहुंचने के लिए खरीद-बिक्री से लेकर, ब्रांडिंग-मार्केटिंग सब चलता है।

Asrar Khan : अरे अजित अंजुम भाई लगता है कि किसी के कमेन्ट से काफी नाराज हो गए और उसके बाद यह भी भूल गए कि असेम्बली में बम तो भगत सिंह ही फेंक सकते थे क्योंकि वे भारत को अंगरेजी से मुख्त कराना चाहते थे …कोई सुल्ताना डाकू नहीं थे …इसलिए ये घाल मेल अच्छी बात नहीं है ….सच्चा समाज सुधारक वही है जो कारपोरेट जगत के सड़े -गले माल का विज्ञापन नहीं करता बल्कि बी डी शर्मा की तरह झोला लेकर जंगलों में लुटे जा रहे लोगों की आवाज़ को बुलंद करता है …

Manish Kumar : आपने बिलकुल सही बोला है सर…

Rajesh Patil : बाज़ार के लिए और समाज के लिए असर पैदा करने वाली आवाज़ों का फ़र्क़ तब पता चलेगा.

Dilip Khan : आमिर खान की मंशा-वंशा मुझे नहीं पता। लेकिन हीरोइज़्म का जो पुट पापुलर कल्चर ने पैदा किया है उसे पहले मीडिया ने चमकाकर लोगों के बीच उतारा और अब वही मीडिया हमे ये बताने की कोशिश कर रहा है कि मुद्दों को उठाने में इन स्टार्स का कितना बड़ा हाथ होता है! एक आम जनामानस में अवतार तुल्य हीरो की तस्वीर किसने बनाई है, जो हर समस्या पर बोलने वाला जादूगर हो, ये अहम सवाल है?

Asrar Khan : थानवी जी मुझे तो यही लगता है कि हमारी व्यवस्था ने सामाजित बुराईयों के खिलाफ संघर्षों का भी व्यवसायीकरण कर दिया है इसीलिए उसने भारत की एक बहुचर्चित सामाजिक समस्या के लिए ब्रांड अम्बैस्डर को बाज़ार में उतारा है ….इसके पीछे व्यवस्था की मंशा सच्चे करान्तिकारियों और समाजसेवियों को अपमानित करने की है जो सर्वथा निंदनीय है …

Ajit Anjum : थानवी जी, मैं तो एक चैनल में हूं इसलिए मैं बहुत से ऐसे सरोकारी चेहरे वाले लोगों के बारे में जानता हूं ( एक वरिष्ठ संपादक के नाते आप भी जानते होंगे और हम जैसे कनिष्ठों से ज्यादा जानते होंगे ) जो सिर्फ गाल बजाने के लिए साल में एक दो सेमिनार …करते हैं . इधर -उधर से चंदा लेते हैं . पांच को मंच पर बिठाते हैं , सौ को सामने बिठाते हैं . चाय -समोसे के साथ लंबी -लंबी सरोकारी बातें करते हैं . रात उसी चंदे वाले पैसे से ब्लैक लेवल के साथ चिकन उदरस्थ करते हैं और हम जैसों को फोन कर करके जीना हराम कर देते हैं कि भाई साहब -देखिएगा जरा खबर चल जाए ….अपनी बाइट चलवाने के लिए खास तौर से लालायित रहते हैं …मैं ऐसे न जाने कितने लोगों को निजी तौर पर जानता हूं कि सरोकारी लबादा -खोल ओढ़कर धी पी नहीं रहे हैं , बल्कि घी से खेल रहे हैं … साल में ऐसे दो चार सेमिनारों में न चाहते हुए मैं भी जाता हूं …एकाध बार तो गुड़गांव की तरफ रिसार्ट में होने वाले चिंतन शिविरों में भी जाने का मौका मिला है …देशी – विदेशी चंदे पर गांवों की तस्वीर बदलने के लिए चिंतन बैठक में हम जैसे कुछ लोग थे और बमुश्किल चालीस -पचास लोग . सुना है उन्हें चिंतन बैठकों और शिविरों के लिए मोटे पैसे मिल जाते हैं …आयोजक महोदय का सरोकारी कद भी ठीक ठाक है लेकिन …..कम कहना ज्यादा समझना ….सर , ऐसे बहुत से लोग हैं …हमारे -आपके बीच ….मैं आमिर खान का प्रवक्ता नहीं हूं लेकिन अगर आमिर या ऐसा कोई शख्स ऐसी कोई मुहिम चलाता है तो मैं उसके साथ हूं …उसकी मंशा का पोस्टमार्टम करने में कोई हर्ज नहीं …करना भी चाहिए लेकिन अगर कुछ सकारात्मक है तो उसे स्वीकार करना चाहिए ….क्या इरफान खान, अनुराग कश्यप, नसीर , ओमपुरी, मनोज वाजपेयी अनुपन खेर से लेकर ऐसे तमाम लोग क्या फ्री में बिना अपना नफा-नुकसान देखे कोई काम करते हैं …नहीं …और मैं जब नफा का मतलब सिर्फ ये नहीं होता कि उससे कितने करोड़ कमाए जा रहे हैं . ब्रांडिग और पोजीशनिंग का ख्याल रखकर काम करना भी एक किस्म का कैलकुलेशन ही है ….लेकिन ऐसे लोगों को हम आप बाजार से नहीं जोड़ते कई बार ….फिर आमिर ही क्यों …

Hasan Jawed : दिग्‍गजनों के बीच खटपट में टीआरपी नहीं है, अपन आमिर के साथ है, क्‍योंकि एक कलाकार ने मुद्दे को गर्मा दिया है, आगे आप हम सोचें क्‍या करना है, बाकी चैनल वालों को पता ही नहीं है कि देश की डिमांड क्‍या है, मैं मेघायल में हू और नेशनल चैनल पर दिल्‍ली नगर निगम चुनाव की खबरें देख रहा हूं… मीडिया कंफ्यूज, देश कंफ्यूज है… बस एक काम का आदमी है तो वो है निर्मल बाबा… आप सब पर कृपा बनी रहे, कोख में हत्‍या अभिशाप ही है

Sudhir Kumar Pandey : ajit sir ki baat se sehmati jatate hue aamir ke alochko se chota sa jawab AGAR DUSERE STAR KI TARAH AAMIR TRP WALA KHEL KHELU SHOW LE AATE TOH KOI UNKA KYA BIGAD LETA? LEKIN AGAR WOH SAMAJIK SAROKAR KI BAAT KAR RAHE HAIN TOH SAMAJ KE THEKEDAR DUKHI KYU HO RAHE HAI? ACCHA HOTA AAMIR 20 YA 30 KA DUM LE AATE…KAI LOGO KI NEEND NA KHARAB HOTI…

Yogesh Bhardwaj : ye rajya sabha bayai isiliye gyai he

Asrar Khan : हसन जावेद साहब आप का कमेन्ट सहज और रोचक है इसके लिए हम आप के आभारी हैं लेकिन आप से इतना पूछने की गुश्ताखी कर रहा हूँ कि कोख मे बेटियों की ह्त्या का मामला क्या अभी-अभी प्रकाश मे आया है …मैं समझता हूँ कि प्रिंट मीडिया में तथा गोष्ठियों इत्यादि में या मुद्दा पता नहीं कब से विशेष रूप से चर्चा में है ..सरकारी विज्ञापनों में तथा अम्मा जी वाले सीरियल में भी इसे बहुत प्राथमिकता से उठाया गया …इसलिए ये कहना की आमिर खान की वजह से यह मुद्दा गरमा गया है …सच नहीं है …इसी तरह आप को याद होगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे साहब को मैदान में उतारा गया और उसके पीछे मीडिया ..तथा देश का वही भ्रष्ट कारपोरेट खडा था इसके अलावा उनको पापुलर बनाने में मनमोहन सिंह खुद भी शामिल थे …कहने का मतलब ये है कि अन्ना भी इस व्यवस्था द्वारा प्रायोजित थे वरना इसी दिली में भ्रष्टाचार के खिलाफ लाखों लोग लाल झंडा लेकर प्रदर्शन करते हैं और उनकी खाबे जनसत्ता को छोड़कर शायद ही किसी अखबार में छपती हों जबकि अन्ना को २४ घंटे लाईव दिखाया जा रहा था …  जावेद भाई मुझे तो याद है की कमसे कम मैं खुद व्यक्तिगत तौर पर १९७० से उपरोक्त बुराईयों के खिलाफ लड़ रहा हूँ जब हमारी उम्र मुश्किल से १२-१३ साल की रही होगी …तो क्या वह हमारी इंडिविजुअल लड़ाई थी नहीं वह किसी पार्टी का कार्य क्रम था …जिस पार्टी में होने के नाते हम लड़ रहे थे …..

Asrar Khan : सुधीर जी यहाँ कोई भी व्यक्ति आमिर खान का विरोधी नहीं है बल्कि आप गौर फरमाएंगे तो पायेंगे की आज क्या कारन है कि मुद्दे से ज्यादा आमिर खान की चर्चा हो रही है …? क्या आमिर खान की ज्यादा चर्चा होने से यह समस्या खत्म हो जायेगी …या कि इस पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा चर्चा होनी चाहिए जिसकी उपभोक्तावादी मंशा की वजह से औरत को उपभोग की बस्तु बनाए जाने तथा उन्हें अश्लीलता फैलाए जाने का साधन बनाए जाने की वजह से और धार्मिक अंधविश्वास, मेल स्वामिनिज्म तथा दहेज देने के डर से ऐसा हो रहा है ….? मुझे तो लगता है कि पूंजीवाद को दीर्घायु करने के लिए ऐसी चीजों को पेश किया जाता है जिससे व्व्यवस्था परिवर्तन की बात करने वालों को हासिये पर धकेल दिया जाय …

Rani Badhan : Sudhir ji.. Jab jab kisine apni aam zindagi se uth kar kuch karne ki koshish ki hai use in sab mushkilo se guzarna pada hai,, aamir ji na to kisi hindu ke liye na kisi muslim ke liye lad rahe hain, wo to ek sache insan hain, jo insano ki bnai is khokhli duniya mai,, insaniyat keliye unke haq keliye aawaz utha rahe hain.. Beshak duniya apni aankhen band karle per khud apne zameer ko maar kar wo kya hasil kar lenge.. Sirf do waqt ki roti per dil ke sukun ka kya? Jo raat din hume pareshan karta hai ke kab brun hatya band hogi, kab tak dahej ke naam pe hatya hoti rahegi, kab coraption khatam hoga.. Dosto aap bhi to is desh ka hissa hain to aap kyun sath nahi dena chahte,, Satyamev jayte ke zariya hai badlaw lane ka to plz sahyog de aamir ji ka… Jai hind jai bharat…

Ajit Anjum : असरार खान जी , ठीक इसका उल्टा ये भी है कि असहमतियां जताने वाले भी आमिर के नाम की वजह से ही असहमतियां जता रहे हैं ….कौन कह रहा है कि मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है …जिस भी चैनल पर चर्चा हो रही है , वहां मुद्दा ही प्रमुख है …लेकिन आमिर अगर मुद्दे की एंकरिंग कर रहे हैं तो उन्हें काट भी तो नहीं सकते …ये तर्क भी कहां तक सही है कि हम तो न जाने कितनी सदियों से ये बात कह रहे हैं आज आमिर ने कहा तो क्या कह दिया या आमिर ये किया तो क्या हुआ …ठीक है मान लिया . आमिर ने कोई नया मुद्दा नहीं उठाया …सदियों से ये बेटियों को कोख में मारा जा रहा है …सदियों से लोग इसकी बात भी कर रहे हैं और न जाने कब तक ये बात होती भी रहेगी …लेकिन अगर आमिर की आवाज की गूंज कुछ लोगों की आवाज पर भारी है तो इसमें एतराज किस बात का ….मारिए गोली आमिर को …मुद्दे पर ही बात करिए …मान लीजिए कि आमिर के साथ आप नहीं , आमिर आपके साथ हैं …एतराज इस बात पर सिमट रहा है कि आमिर कहां के सरोकारी हो गए …बाजारू आमिर खान के बोलने -कहने का क्या मतलब है ..

Sudhir Kumar Pandey : asrar ji aamir sukhiyo mei hain zarur lekin ek bade tabke ke nishane par hain…bhai asrar aap aamir ke prayas to itni moti tagri baaton se jodege toh confusion he create hoga…aamir celebrity hain zahir hai woh chikege toh khabar banegi aur satyamev to dama ban gaya hai…asrar bhai log abhi tak ni jaagetoh isme aamir ki kya galti? aap prog par baat karein lekin zyada baat aamir par hogi toh unki kya galti? badalna hune hain…aamir toh masha allah badle actor hain..

Ajit Anjum : इस देश में सराकोरों का भी एक बाजार है . इस बाजार में भी पूंजी है . सरोकार बेचकर भी बहुत लोग माल कमा रहे हैं . सरोकार -सरोकार खेलकर भी कुछ लोग माल कमा रहे हैं ,सिर्फ लबादे का फर्क है . सरोकार के खोल में रहकर खेल करने वाले लोग कम नहीं . चंदे के पैसे पर बुद्धिविलास करने वाले बहुत से भाई लोगों का बैंक बैलेंस भी ठीक ठाक है . फर्क ये है कि उन्होंने अपने लबादे की ब्रांडिंग कर रखी है ….( Disclaimer – मेरी बातों का generalisation का न किया जाए . बहुत से लोग उम्मीद जगाते हैं . बहुत से लोग वाकई मायावी दुनिया में रहकर भी सरोकार से जुड़े होते हैं . )

Surender Sagar : mujhe is baat se kaafi heraani hai ki samsyaa ki jad tak kyo nahi pahuchaa jaa rahaa hai , ye saari samaajik samsyaae ek tantr ke byproduct hai . is desh me kaabliyat ki jo paribhasha banaa di gai hai uske hisaab se to sab kuch sahi hai …

Pushkar Pushp : एक इंटरटेनर का सरोकारी अवतार. लेकिन इसके बावजूद यदि आमिर के कहने से समाज पर कुछ असर पड़ता है तो 'सत्यमेव जयते' का स्वागत ही है. ठीक उसी तरह जैसे अन्ना के आंदोलन से असहमति के बावजूद बहुत सारे लोग इस आश में साथ थे कि इससे भ्रष्ट व्यवस्था में शायद कुछ सुधार आ जाए. लेकिन क्या वाकई में ऐसा हुआ? फिर मामला सरोकारी चीजों के बाजारीकरण से भी जुड़ा हुआ है.

Sudhir Kumar Pandey : asrar miya se chota sa sawal  AAJ DESH POLIO MUKT HAI ISKA 1PERCENT CREDIT KISI NE AMITABH KO DIYA…MAINE TOH NI SUNA?  AGAR NI DIYA TOH AAMIR PAR UNGLI KAISE UTH RAHI HAI…AMITABH NE TOH PAISE BHI NI LIYE THEA…

ओम थानवी के फेसबुक वाल से साभार.

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