रामदेव और बालकृष्‍ण के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए याचिका

बदायूं। धर्म के नाम पर लोगों की भावनाओं का दुरुपयोग करने एवं लोकतंत्र के विरुद्ध वातावरण तैयार करने का आरोप लगाते हुए स्वामी रामदेव और बालकृष्ण के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराने का निवेदन करते हुए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया है। सीजेएम पवन प्रताप सिंह ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए पुलिस को आख्या देने का आदेश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख 16 जून निश्चित की है।

वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश चन्द्र सक्सेना ने बताया कि पत्रकार बी.पी.गौतम की ओर उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। आरोप है कि स्वामी रामदेव आर्य समाज पद्धति और विचाराधारा का दुरुपयोग कर रहे हैं। वह आर्य समाज के आंदोलन को गति देने की बजाये आर्य समाजी होने की बात को छुपाते हुए स्वयं को हिंदू संत प्रचारित कर रहे हैं और समूचे हिंदू समाज की आस्था एवं श्रद्धा का दुरुपयोग करने में लगे हैं, जबकि आर्य समाज का मूल कार्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध समाज को जागरुक करने का रहा है, जबकि रामदेव की कार्यप्रणाली में यह सब दूर तक नहीं दिख रहा।

श्री सक्सेना ने बताया कि हिंदू संत कहने वाले रामदेव के पंतजलि योग पीठ में एक भी हिंदू देवता का मंदिर नहीं है। स्वामी रामदेव प्राचीन योग का भी दुरुपयोग कर रहे हैं। वह जगह-जगह अपने कैंप लगा कर सिर्फ व्यायाम सिखाते हैं, जबकि प्राचीन योग क्रियायें किसी अदृश्य शक्ति या ईश्वर से जोडऩे का कार्य करती हैं, जो सामान्य व्यक्ति के लिए कर पाना बेहद कठिन है। कहा जाता है कि योग क्रियाओं को सिद्ध करने के बाद व्यक्ति प्राणायाम के द्वारा सीधे समाधी में चला जाता है और ईश्वर से एकाकार कर लेता है, जबकि योग गुरू कहलाने वाले यह सब स्वयं रामदेव को भी नहीं आता है, इसलिए वह प्राचीन योग के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। धार्मिक ग्रंथों में जिन बातों का उल्लेख किया गया है, उन पर हिंदुओं को अटूट विश्वास है, उस विश्वास का रामदेव भरपूर दुरुपयोग कर रहे हैं।

रामदेव ने बदायूं सहित देश के विभिन्न जनपदों, शहरों व कस्बों में अपने फ्रैंचाइजी बना रखे हैं, जो तमाम तरह के प्रोडक्ट रामदेव के नाम से बेच रहे हैं, जिन पर एमआरपी लिखा होने के बाद भी भारत सरकार के नियमों के तहत वह टैक्स नहीं दे रहे हैं। वह टैक्स से बचने के लिए ट्रस्ट का भी दुरुपयोग कर रहे हैं, क्योंकि नियमानुसार ट्रस्ट आय कर के दायरे में नहीं आते हैं, लेकिन उनके प्रोडक्ट आय कर के दायरे में आने चाहिए, इस पूरे गोरखधंधे में उनके साथी बालकृष्ण भी बराबर के दोषी हैं। फ्रेंचाइजी रामदेव के पक्ष में स्थानीय स्तर पर भी वातावरण बनाते रहते हैं। यही लोग रामदेव के पैसे पर रामदेव द्वारा आयोजित किये जाने वाले धरना प्रदर्शन आदि में जनता को मूर्ख बना कर ले जाते हैं। इतना ही नहीं रामदेव ने पिछले दिनों लोकतंत्र के मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित संसद और गणमान्य सांसदों के विरुद्ध अशोभनीय और निंदनीय टिप्पणी की, जिस पर वादी को व्यक्तिगत तौर पर गहरा आघात लगा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि किसी सांसद ने अपराध किया है, तो उसे देश के कानून के प्रावधान के तहत न्यायालय सजा देगा, पर जनता ने जिन सांसदों को विधिवत चुन कर संसद भेज दिया, उनके विरुद्ध अशोभनीय टिप्पणी करना एक तरह से लोकतंत्र का अपमान करना ही है। इसके अलावा रामदेव के देश भर में फैले फ्रेंचाइजी और उनके अपने संगठन के लोग लोकतंत्र विरोधी गतिविधियों में लगे हुए हैं। इन लोगों के एकाउंट फेसबुक पर भी हैं, यह लोग रामदेव के गैर समर्थकों को अश्लील गालियां देते हैं। देश के प्रधानमंत्री के साथ अन्य गणमान्य मंत्रियों, नेताओं और दिवंगत महापुरुषों के अश्लील और अशोभनीय चित्र बना कर डालते हैं, फिर उन पर अशोभनीय टिप्पणियां करते हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में अशोभनीय टिप्पणियां करते हैं, उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे को महापुरुष बताते हैं। रामदेव के अवगुणों को उजागर करने वाले को सीधा कांग्रेस का एजेंट और दलाल आदि कह कर गालियां देते हैं। रामदेव और उनके संगठन के लोगों के ऐसे कुकृत्यों से देश को नुकसान हो रहा है, जिसका लाभ देश विरोधी ताकतों को ही मिलेगा। न्यायालय से लोकतंत्र विरोधी कार्य करने वाले स्वामी रामदेव, बालकृष्ण और उनके संगठन के तमाम सदस्यों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर कड़ी कानूनी कार्रवाई कराने की मांग की गयी है। सीजेएम पवन प्रताप सिंह ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थाना सिविल लाइन पुलिस से आख्या देने को कहा है एवं सुनवाई की तारीख 16 जून निश्चित की है।

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