राष्ट्रपिता की विधिक स्थिति क्या है?

हम सभी जानते हैं कि महात्मा गाँधी हमारे देश के राष्ट्रपिता हैं. यह एक सर्वविदित तथ्य है. यह भी सर्वज्ञात है कि उनका जन्मदिवस दो अक्टूबर पूरे देश में एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में घोषित है. लेकिन महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता की उपाधि कब दी गयी है, राष्ट्रपिता की उपाधि का अर्थ क्या हुआ, इसका कानूनी मतलब क्या हुआ जैसे प्रश्नों पर मैं एक लंबे समय से चिंतन तो कर रहा हूँ पर जानकारी नहीं हासिल कर पा रहा.

जब किसी से पूछता भी हूँ कि महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता कब घोषित हुए तो यही जानकारी मिलती है कि सर्वप्रथम उनके लिए ये शब्द महान देशभक्त नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा 6 जुलाई, 1944 को आजाद हिंद रेडिओ पर अपने भाषण के माध्यम से गाँधीजी से बात करते हुए प्रयोग लिया गया था. नेताजी ने जापान से सहायता लेने का अपना कारण और अर्जी-हुकुमत-ए-आजाद-हिंद तथा आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के उद्येश्य के बारे में महात्मा गाँधी को बताया और इस भाषण के दौरान, नेताजी ने गाँधीजी को राष्ट्रपिता बुलाकर अपनी जंग के लिए उनका आशीर्वाद माँगा. इस प्रकार, नेताजी ने गाँधीजी को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता बुलाया.

यह तो ठीक है पर सुभाष चन्द्र बोस द्वारा महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता बुलाना एक व्यक्तिविशेष का व्यक्तिगत कार्य था. लेकिन उन्हें देश का राष्ट्रपिता घोषित किया जाना निश्चित रूप से एक राजकीय कार्य रहा होगा. यह किसी अधिनियम, नियम, शासकीय आदेश, मेमोरंडम आदि के जरिये हुआ होगा. लेकिन मुझे तब बड़ा आश्चर्य हुआ जब मैं इंटरनेट पर इस सम्बन्ध में काफी खोजने पर कोई भी जानकारी हासिल कर सकने में नाकाम रहा. बस यही जानकारी मिल सकी कि नेताजी ने सर्वप्रथम यह शब्द महात्मा गाँधी के लिए प्रयोग किया.

मैं समझता हूँ शायद हममें से ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते होंगे कि किस विधिक तरीके से महात्मा गाँधी औपचारिक रूप से भारत के राष्ट्रपिता घोषित किये गए. क्या यह किसी अधिनियम के माध्यम से हुआ, किसी नियम के जरिये हुआ, कोई शासकीय आदेश निर्गत हुआ अथवा बस अचानक एक दिन महात्मा गाँधी राष्ट्रपिता मान लिए जाने लगे. यदि ऐसा कोई आदेश हुआ तो वह किस तिथि को हुआ? अंतिम बात यह भी कि राष्ट्रपिता का विधिक अर्थ क्या हुआ? विधि के अनुसार राष्ट्रपिता की क्या आधिकारिक स्थिति हुई? हम सबों से राष्ट्रपिता के प्रति किस प्रकार के व्यवहार और आचरण की अपेक्षाएं कानूनी रूप से विहित हैं?

ये सभी ऐसे प्रश्न हैं जिनके उतर तो होंगे पर मैं नहीं जानता. दुर्भाग्य है कि इंटरनेट भी इसमें कोई विशेष मदद करता नहीं दिखता. मैंने जितने लोगों से व्यक्तिगत रूप से पूछा वे भी मेरी तरह इस बारे में अनजान से दिखे. शायद पाठकों में कुछ लोग इस विषय में विशेष जानकारी रखते होंगे. यदि वे यह जानकारी हम सबों से शेयर करेंगे तो मैं कृतार्थ समझूंगा.

अमिताभ

लखनउ

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *