राष्ट्रीय सहारा अखबार की खबर में मायावती को मां की गाली

सहारा समूह में काम करने वालों के बारे में कहा जाता था कि वे सरकारी नौकरी करते हैं. उनकी नौकरी जानी मुश्किल है. इसी दौर में इस संस्‍थान में ऐसे लोग भर गए जो काम कम राजनीति ज्‍यादा करते हैं. और दुर्भाग्‍य से ये सहारा के किसी एक यूनिट का नहीं सभी का ऐसा ही हाल है. फिलहाल अभी खबर राष्‍ट्रीय सहारा बनारस की. बनारस यूनिट में तो लग रहा है कि भांग घोल दिया गया है, हर कोई नशे में लग रहा है, तभी तो अखबार में क्‍या जा रहा है क्‍या नहीं जा रहा है, इसे देखने वाला कोई नहीं है.

ताजा मामला गाजीपुर एडिशन का है. अखबार में प्रकाशित एक खबर में पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती के लिए गाली लिखा गया है. अब सवाल यह है कि यह खबर कई स्‍तरों पर, कई नजरों से होकर गुजरी होगी, फिर भी इतनी बड़ी गलती पकड़ में क्‍यों नहीं आई. कंपोजर ने टाइप किया होगा, खबर देखने वाले ने खबर देखी होगी, पेज तैयार करने वाले ने भी खबर देखी होगी, फिर कैसे यह गलती अखबार में रह गई. इस खबर के बाद से बसपाई इस अखबार के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं.

मायावती को गाली छपने के बाद से प्रबंधन में भी हड़कम्‍प मचा हुआ है. इसी गाली वाली खबर का असर है कि राष्‍ट्रीय सहारा के स्‍थानीय संपादक स्‍नेह रंजन की विदाई होने जा रही है. लखनऊ से दयाशंकर राय को नया आरई बनाकर लाया जा रहा है. राष्‍ट्रीय सहारा, बनारस के सूत्रों का कहना है कि यह गड़बड़ी यूनिट से हुई है. जांच में गाजीपुर से खबर ठीक आई थी, यहां पर ही किसी ने खबर से छेड़छाड़ की है. यानी एक दूसरे को सबक सिखाने के लिए अखबार को ही मोहरा बना दिया गया. डाक एडिशन विनोद शर्मा के जिम्‍मे था. सूत्रों का कहना है कि उन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

गाजीपुर एडिशन में प्रकाशित इस खबर के बारे में बनारस के एक पत्रकार ने भड़ास को पत्र भेजकर सूचित किया है, जो इस प्रकार है…

''सच कहने की हिम्मत का नारा देने वाले अखबार राष्ट्रीय सहारा ने 26 मार्च यानी आज के अंक में एक इतिहास रच दिया है। वाराणसी संस्करण के गाजीपुर डाक वाले अखबार में एक खबर ऐसी लगी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को गालियां लिखी गई हैं। खबर की हेडिंग है संस्कृत शिक्षकों को युवा मुख्यमंत्री से उम्मीदें, इसके बाद अंदर खबर में पहले वाक्य के बाद भोजपुरिया अंदाज में मायावती को गालियां लिख मारी गई हैं। खबर सैदपुर डेटलाइन से लगाई गई है। मां की गालियां देते हुए लिखा गया कि उन्होंने संस्कृत शिक्षकों का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। खबर में गाली-ग्‍लौज का पता चलते ही सहारा प्रबंधन ने डैमेज कंट्रोल के लिए मार्केट से दोपहर बाद अखबार वापस समेटना शुरू किया, लेकिन कुछ सौ कापियां ही वापस ले जा पाए।''

 

 
 

 

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