राष्ट्रीय सहारा देहरादून का कमाल, एक ही एडीशन में नौ खबरें रिपीट

देहरादून। हमेशा चर्चा में रहने वाली राष्ट्रीय सहारा की देहरादून यूनिट में इन दिनों खासा हड़कंप मचा हुआ है। वैसे तो यहां के पूर्व संपादक एलएन शीतल को नोएडा अटैच किये जाने के बाद से इस यूनिट में कुछ शांति थी, लेकिन इस शांति को 20 दिन भी नहीं हुए कि यहां फिर कोहराम मच गया। दरअसल यूनिट में एक ऐसी घटना घटी कि एलएन शीतल के आदमियों को मानों अपने आका के खिलाफ हुई कार्रवाई का बदला लेने का मौका मिल गया।

हुआ यह कि पिछली 8 जुलाई को कुमायूं संस्करण में चार अलग-अलग पेजों पर कुल नौ खबरें रिपीट हो गयीं। इस भयंकर गलती से लगता है कि कुमायूं संस्करण के लोग या तो भांग खाये हुए थे या सभी चरसी हैं, क्योंकि रिपीट हुई इन खबरों में तीन खबरें अकेले पेज 3 पर लगी थीं। यानी एक ही खबर, एक ही पेज पर, एक ही शीर्षक से तीन जगह लगी थी। एक दूसरे समाचार पर भी इसी खबर का शीर्षक लगा दिया गया। मजेदार बात यह कि यही खबर पेज 9 पर भी लगा दी गई। कुमायूं के अन्य पेजों पर भी पांच खबरें रिपीट हुईं।

अपने होशोहवास में तो कोई प़़त्रकार ऐसा ब्लंडर नहीं कर सकता। वह भी तब जब कुमायूं संस्करण को तमाम वरिष्ठ निकाल रहे हों। कुमायूं एडीशन को एक डीएनई सुरेश कुमार, एक चीफ सब एडीटर ब्रजपाल चौधरी, एक सब एडीटर सुमन तिवारी, दो स्ट्रिंगर सरिता नेगी और निधि नेगी, पेज आपरेटर समीना मलिक निकालते हैं। डीएनई सुरेश कुमार और चीफ सब ब्रजपाल चौधरी कई अखबारों में वरिष्ठ पदों पर काम करने का दावा करते हैं। अपने इसी दावे के आधार पर दोनों राष्ट्रीय सहारा में वरिष्ठ पद भी पा गए।

बताते हैं एलएन शीतल डीएनई सुरेश कुमार को पसंद नहीं करते थे। बहरहाल खबरें रिपीट होते ही शीतल के आदमियों को मौका मिल गया और उन्होंने एक बेनामी चिटठी सीधे अखबार के छोटे मालिक जेबी राय के पास मय सबूतों के भेज दी। बेचारे नोएडा से नए-नए आए स्थानीय संपादक दिलीप चौबे के गले-गले आ गई है। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि देहरादून में कुर्सी संभालते ही ये मुसीबत गले पड़ जाएगी। उधर नोएडा मुख्यालय भी यह नहीं समझ पा रहा है कि भला इतनी बड़ी गलती कैसे जा सकती है? जो भी हो, सहारा मैनेजमेंट ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है और पूरे प्रकरण की जांच कराने के आदेश दिये हैं। मैनेजमेंट ने इस पहलू से भी जांच करने को कहा है कि कहीं शीतल गुट ने साजिश के तहत तो अखबार से छेड़छाड़ नहीं की।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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