राष्‍ट्रीय सहारा की नई खोज : कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक जाता है जीटी रोड

राष्‍ट्रीय सहारा में ऊपर से लेकर नीचे तक उठापटक का दौर रहा है. इस असर अखबार पर तो पड़ता ही है कि संस्‍थान की छवि भी खराब होती है. ताजा मामला चंदौली जिले में है. यहां लंबे समय से उठापटक चल रही है. ब्‍यूरोचीफ की कुर्सी एक और दावेदार तीन लिहाजा यहां हमेशा एक दूसरे को सलटाने की कोशिशें जारी रहती हैं. जो हेड ऑफिस में अपने समीकरण सही ढंग से फिट करता है वो कुछ दिन के लिए अखबार में, समीकरण गड़बड़ाते ही बाहर.

पिछले लंबे समय से आनंद सिंह, राजीव गुप्‍ता और सैयद फिरोजुद्दीन के बीच उठा-पटक चल रही है. आए दिन इन लोगों को हटाया-बैठाया-उठाया जाता है. इसका असर अखबार पर भी पड़ता है. अपने अपने लोगों को फिट करने के लिए ऐसे लोग भर दिए जाते हैं जिन्‍हें तथ्‍यों तक की जानकारी नहीं होती है, लेकिन खबर लिख मारते हैं. अब तक जो सामान्‍य जानकारी है कि अखंड भारत में जीटी (ग्रांड ट्रक) रोड का कोलकाता से पेशावर तक जाता है.  

हालांकि इसका विस्‍तार बांग्‍लादेश के चिटगांव से शुरू होकर आफगानिस्‍तान के काबुल तक है. लेकिन वर्तमान भारत में यह सड़क कोलकाता से लेकर अमृतसर तक जाती है. पर राष्‍ट्रीय सहारा ने इस सड़क को कश्‍मीर से खींचकर कन्‍याकुमारी तक बनवा दिया है. जीटी रोड को कोलकाता से अमृतसर तक जानने वाले पाठक परेशान हैं कि किस सरकार ने जीटी रोड को कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक खिंचवा दिया. कई लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि जीटी रोड का ट्रांसफर इधर कब हो गया.

जाहिर है कि राष्‍ट्रीय सहारा की आपसी उठापटक का असर अखबार के कंटेंट पर पड़ रहा है. अनपढ़ जाहिल टाइप के लोग पत्रकार बनाए जा रहे हैं. बिना पैसे के काम करने वाले लोग पत्रकार बना लिए जा रहे हैं और उनसे बंधुआ मजदूरों जैसा काम कराया जा रहा है. आप भी देखिए राष्‍ट्रीय सहारा की नई खोज या फिर ताकत, जो भी उचित लगे सम‍झते रहिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *