रोबोट निपटा रहे हैं सहारा समूह के निवेशकों की फाइल

मुंबई : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) इस बात से चकराया हुआ है कि सहारा समूह से निवेशकों की सूचना के संबंध में ट्रकों में भर भर कर आए टनों दस्तावेज की छंटाई तथा सत्यापन का विशाल काम कैसे किया जाए। बाजार नियामक सेबी ने इन दस्तावेजों को एक विशाल गोदाम में रखवा दिया है जहां स्वचालित रोबोटिक प्रणाली लगी है और स्टोरेज वॉल्ट की व्यवस्था है।

बहुचर्चित सेबी-सहारा मामले में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) को निर्देश दिया है कि वह सहारा समूह की दो कंपनियों के निवेशकों का पैसा लौटवाए। इसके लिए सेबी को अनुमानित तीन करोड़ निवेशकों के निवेश के कागजात और उनकी पहचान आदि का सत्यापन करना है। सहारा समूह की दो कंपनियों ने न्यायालय के आदेश के बाद प्रतिभूति बाजार नियामक के मुख्यालय पर 31,000 कार्टन में 128 ट्रक दस्तावेज भेजे हैं ।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन दस्तावेजों के अपने किसी कार्यालय में भंडारण की दिक्कत को देखते हुए सेबी ने इन्हें स्टाक होल्डिंग कारपोरेशन आफ इंडिया लि. की सहायक इकाई एसएचसीआईएल प्रोजेक्ट्स के भंडारण गृह में रखा है। इस भंडारण गृह में दस्तावेजों के रखरखाव तथा उनको सुरक्षित वॉल्टों में रखने के लिए रोबोटिक प्रणाली लगी है। इससे बाजार नियामक दस्तावेजों की तेजी से छानबीन कर सकेगा।

अधिकारी ने हालांकि कहा कि इन दस्तावेजों का सत्यापन रोबोटिक प्रणाली से संभव नहीं होगा क्योंकि पेपरों का फार्मेट एक समान नहीं है। एसएचसीआईएल प्रोजेक्ट्स लि. भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय डाक और सेबी जैसे संगठनों को दस्तावेजों के संग्रह, जांच और रख रखाव की सेवाएं प्रदान करता है। यह उन दस्तावेजों का इलेट्रानिक प्रारूप भी तैयार कर उन्हें संरक्षित रख सकता है। इसके गोदामों में दस्तावेज को रासायनिक धुआं दिखा कर संग्रहीत किया जाता है ताकि कीड़े न लगें। (एजेंसी)

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