लखनऊ के दैनिक जागरण और हिंदुस्‍तान के लिए यह कोई खबर नहीं थी!

मुख्‍यधारा की मीडिया सरकार के भोंपू बनते जा रहे हैं. ये बात एक बार फिर साबित हुई पत्रकार संजय शर्मा द्वारा प्रमुख सचिव नियुक्ति के खिलाफ दाखिल की गई याचिका की खबर में इन अखबारों की भूमिका को देखकर. वीकएंड टाइम्‍स के पत्रकार संजय शर्मा की याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्‍य सरकार को नोटिस जारी करके एक सप्‍ताह में जवाब देने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट का यह आदेश कम से कम सिंगल कॉलम में ही सही यह खबर तो बनती ही थी, लेकिन आश्‍चर्य है कि लखनऊ में दैनिक जागरण और हिंदुस्‍तान के लिए यह कोई खबर नहीं है.

संजय शर्मा ने बताया कि अन्‍य कई बड़े-छोटे अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया वहीं उक्‍त दोनों अखबारों के लिए इस खबर का कोई महत्‍व नहीं था. उनके अनुसार इन दोनों अखबारों ने इस खबर को सिंगल कॉलम में भी प्रकाशित नहीं किया. इसके पहले याचिका दाखिल होने की खबर को भी दैनिक जागरण और अमर उजाला ने प्रकाशित नहीं किया था. जबकि हिंदुस्‍तान ने सिंगल कॉलम में खबर प्रकाशित की थी. इस बार अमर उजाला ने खबर छापकर अपनी गलती सुधारी तो हिंदुस्‍तान ने खबर ना छापकर अपनी गलती सुधार ली.

बताया जा रहा है कि ये बड़े अखबार तथा इनके मालिक-कर्मचारी सरकार तथा सरकार के बड़े नौकरशाहों से तमाम तरह की सुविधाएं पाते रहते हैं. लिहाजा अपनी सुविधा तथा हितों को देखते हुए ये अक्‍सर पत्रकारिता से समझौता करते रहते हैं, गिरवी रखते रहते हैं. आए दिन इसी तरह से पत्रकारिता की हत्‍या की जाती है. ये तथाकथित बड़े अखबार सरकार की गुणगान वाली खबरों को तानकर-फैलाकर प्रकाशित करते हैं वहीं आलोचनात्‍मक या फिर गड़बड़ी वाली खबरों को घोंटकर पत्रकारिता की हत्‍या कर देते हैं. बड़े अखबार सरकार को आईना दिखाने की बजाय उसकी आंखों पर पट्टी बांधने की कोशिश करते हैं.

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