लखनऊ में जागरण ने लांच किया ‘जागरण सिटी’ एडिशन

नवभारत टाइम्‍स के लखनऊ में आने की खबर से दैनिक जागरण प्रबंधन पूरे सकते में है. नवभारत टाइम्‍स ने तो नवाबों के शहर में कदम रखने से पहले ही नदीम जैसे पत्रकार को अपने साथ जोड़कर जागरण को बड़ा झटका दिया है. सबसे ज्‍यादा दहशत जागरण में ही है क्‍योंकि नदीम अब नवभारत टाइम्‍स के हिस्‍से हैं. नभाटा से खतरे को भांपते हुए दैनिक जागरण ने 26 मई से लखनऊ एडिशन के साथ चार पेज का 'जागरण सिटी' एडिशन लांच किया है.

'जागरण सिटी' की लांचिंग के मौके पर संपादक दिलीप अवस्‍थी ने एक अग्रलेख भी लिखा है, जिसकी आखिरी लाइनों में उन्‍होंने अपने डर की अभिव्‍यक्ति भी कर दी है कि कई अखबार आएंगे जाएंगे, जागरण को फर्क नहीं पड़ता, पर सच्‍चाई यही है कि जागरण ही नभाटा के आगमन से सबसे ज्‍यादा हिला हुआ है. इस अखबार की गुणवत्‍ता और विश्‍वसनीयता लगातार पाठकों में कम होती जा रही है, जिसका उदाहरण रहा है पिछले आईआरएस में घटे पाठकों की संख्‍या.

लखनऊ में जागरण ने चार पेज का जो सिटी एडिशन में लांच किया है, वह कहीं से भी धारदार नहीं दिखता है. इससे कहीं ज्‍यादा बेहतर अमर उजाला का 'माई सिटी' एडिशन है, जो स्‍थानीय खबरों को प्रमुखता तथा अलग तेवर के साथ प्रस्‍तुत करता है. अब देखना है कि नवभारत टाइम्‍स के लांचिंग से पहले 'जागरण सिटी' जागरण की सीटी बजने से रोक पाता है या इसकी सिट्टी पिट्टी गुम करता है. नीचे संपादक दिलीप अवस्‍थी का अग्रलेख… 

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