लखनऊ में थाना प्रभारी ताश के पत्ते की तरह फेंटे जा रहे, कोर्ट के आदेश की धज्जियां

यूपी के पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 दिसंबर 2010 को शासनादेश द्वारा थानाध्यक्ष का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष किया था और इससे पहले हटाये जाने पर तबादले का स्पष्ट कारण लिखित रूप से अनिवार्यतः अंकित करने के निर्देश दिये थे. इसके विपरीत जमीनी स्थिति बिलकुल अलग है. आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा एसएसपी लखनऊ द्वारा लखनऊ जिले में वर्ष 2011 और 2012 की 80 पृष्ठों की सूचना के अनुसार जिले के 42 थानों के लिए दो सालों में थानाध्यक्षों के तबादले सम्बंधित कुल 72 आदेश जारी हुए जिसमे 215 थानाध्यक्ष का तबादला हुआ और 154 थाने इससे प्रभावित हुए.

इस अवधि में डी के ठाकुर, आशुतोष पाण्डेय और आर के चतुर्वेदी लखनऊ के एसएसपी रहे और तीनों ने खुलेआम शासानादेश की धज्जियां उडाई. ठाकुर साल 2011 में पूरे समय नियुक्त रहे और उन्होंने साल भर में 37 आदेश किये जिसमे 77 थानाध्यक्ष का तबादला हुआ और 62 थाने प्रभावित हुए. आशुतोष पाण्डेय ने मार्च से जुलाई 2012 के अपने कार्यकाल में 23 आदेश में 89 थानाध्यक्षों का तबादला किया जिससे 56 थाने प्रभावित हुए. अगस्त 2012 से आगे चतुर्वेदी ने 12 आदेश में 49 थानाध्यक्षों के तबादले किये जिससे 36 थाने प्रभावित हुए.

इस दौरान एक ही थानाध्यक्ष का कई बार तबादला भी किया गया. शारंग धर द्विवेदी क़ानून व्यवस्था में फेल होने पर 30 जुलाई 2011 को बाजारखाला से हटाये गए और डेढ़ माह बाद उसी एसएसपी द्वारा नाका के इन्स्पेक्टर बना दिये गए और इसी आधार 08 मई 2012 को वजीरगंज से हटाये गए वीर सिंह 30 अक्टूबर को महानगर तैनात कर दिये गए. रविन्द्र नाथ राय 10 फ़रवरी 2011 को निगोहा के एसओ बनाए गए, 18 मार्च को विकासनगर भेज दिये गए और 24 अप्रैल 2012 को सर्वेलांस सेल भेजे गए. ब्रजेश कुमार सिंह 23 मार्च 2011 को इटौंजा, 08 जून को बीकेटी और 22 अक्टूबर को गोसाईगंज के एसओ बनाए गए. निरीक्षक कुलदीप कुमार 21 जून 2011 को हसनगंज, 22 सितंम्बर को हुसेनगंज और 22 अप्रैल 2012 को अमीनाबाद गए. राम विशाल यादव 08 अप्रैल 2012 को पुलिस लाइन से पारा भेजे गए, उसी दिन तबादला निरस्त हुआ लेकिन दो दिन बाद फिर पारा एसओ बन गए. राम सनेही यादव 24 मई 2012 को चिनहट, 09 जुलाई को मोहनलालगंज, 31 अगस्त को पुलिसलाइन और 12 सितम्बर को कृष्णानगर के इन्स्पेक्टर बनाए गए. विनोद यादव 25 मार्च 2012 को सरोजिनीनगर, 09 जुलाई को आलमबाग, 12 सितम्बर को तालकटोरा और 22 दिसंबर को बीकेटी एसओ बने. नोवेंद्र सिंह 08 अगस्त 2012 को विभुतिखंड से चिनहट,  12 सितम्बर को अलीगंज और 20 अक्टूबर को गाजीपुर के एसओ बने. ठाकुर ने इस स्थिति को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताते हुए देवराज नागर, डीजीपी, यूपी से सम्बंधित एसएसपी के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग की है.

Letter written to DGP, UP–

सेवा में,
श्री देवराज नागर,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश
विषय- लखनऊ जिले के थानाध्यक्षों के स्थानांतरण विषयक  
महोदय,

कृपया निवेदन है कि यूपी के पूर्व डीजीपी श्री प्रकाश सिंह द्वारा मा० सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 दिसंबर 2010 को शासनादेश द्वारा थानाध्यक्ष का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष किया था और इससे पहले हटाये जाने पर तबादले का स्पष्ट कारण लिखित रूप से अनिवार्यतः अंकित करने के निर्देश दिये थे.

इसके विपरीत जमीनी स्थिति बिलकुल अलग है. मेरे द्वारा लखनऊ जिले में वर्ष 2011 और 2012 की अस्सी पृष्ठों की सूचना, जो आशुलिपिक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, लखनऊ के पत्र संख्या एसटी/एसएसपी ज०सू०अ० (24)/2013 दिनांक 21/02/2013  द्वारा प्राप्त हुई है, के अनुसार जिले के 42 थानों के लिए दो सालों में थानाध्यक्षों के तबादले सम्बंधित कुल 72 आदेश जारी हुए जिसमे 215 थानाध्यक्ष का तबादला हुआ और 154 थाने इससे प्रभावित हुए. इस अवधि में श्री डी के ठाकुर, श्री आशुतोष पाण्डेय और श्री आर के चतुर्वेदी लखनऊ के एसएसपी रहे और तीनों ने खुलेआम शासानादेश की धज्जियां उडाई. श्री ठाकुर साल 2011 में पूरे समय नियुक्त रहे और उन्होंने साल भर में 37 आदेश किये जिसमे 77 थानाध्यक्ष का तबादला हुआ और 62 थाने प्रभावित हुए. श्री आशुतोष पाण्डेय ने मार्च से जुलाई 2012 के अपने कार्यकाल में 23 आदेश में 89 थानाध्यक्षों का तबादला किया जिससे 56 थाने प्रभावित हुए. अगस्त 2012 से आगे श्री चतुर्वेदी ने 12 आदेश में 49 थानाध्यक्षों के तबादले किये जिससे 36 थाने प्रभावित हुए.

इस दौरान एक ही थानाध्यक्ष का कई बार तबादला भी किया गया. श्री शारंग धर द्विवेदी क़ानून व्यवस्था में फेल होने पर 30 जुलाई 2011 को बाजारखाला से हटाये गए और डेढ़ माह बाद उसी एसएसपी द्वारा नाका के इन्स्पेक्टर बना दिये गए और इसी आधार 08 मई 2012 को वजीरगंज से हटाये गए श्री वीर सिंह 30 अक्टूबर को महानगर तैनात कर दिये गए.

श्री रविन्द्र नाथ राय 10 फ़रवरी 2011 को निगोहा के एसओ बनाए गए, 18 मार्च को विकासनगर भेज दिये गए और 24 अप्रैल 2012 को सर्वेलांस सेल भेजे गए. श्री ब्रजेश कुमार सिंह 23 मार्च 2011 को इटौंजा, 08 जून को बीकेटी और 22 अक्टूबर को गोसाईगंज के एसओ बनाए गए. निरीक्षक श्री कुलदीप कुमार 21 जून 2011 को हसनगंज, 22 सितंम्बर को हुसेनगंज और 22 अप्रैल 2012 को अमीनाबाद गए. श्री राम विशाल यादव 08 अप्रैल 2012 को पुलिस लाइन से पारा भेजे गए, उसी दिन तबादला निरस्त हुआ लेकिन दो दिन बाद फिर पारा एसओ बन गए. श्री राम सनेही यादव 24 मई 2012 को चिनहट, 09 जुलाई को मोहनलालगंज, 31 अगस्त को पुलिसलाइन और 12 सितम्बर को कृष्णानगर के इन्स्पेक्टर बनाए गए. श्री विनोद यादव 25 मार्च 2012 को सरोजिनीनगर, 09 जुलाई को आलमबाग, 12 सितम्बर को तालकटोरा और 22 दिसंबर को बीकेटी एसओ बने. श्री नोवेंद्र सिंह 08 अगस्त 2012 को विभुतिखंड से चिनहट,  12 सितम्बर को अलीगंज और 20 अक्टूबर को गाजीपुर के एसओ बने.

मैंने यहाँ कुछ ही ऐसी बानगी प्रस्तुत की है जबकि इन सूचनाओं में ऐसे ना जाने कितने अन्य दृष्टांत बिखरे पड़े हैं. मुझे विश्वास है कि कमोबेश यही स्थिति पूरे प्रदेश में होगी. यह स्थिति शासनादेश का उल्लंघन होने के साथ-साथ मा० सुप्रीम कोर्ट की सीधी अवमानना है.

अतः उपरोक्त के दृष्टिगत मैं डॉ नूतन ठाकुर, आरटीआई एक्टिविस्ट, आपसे यह निवेदन करती हूँ कि लखनऊ जिले की इस सूचना के आधार पर सभी सम्बंधित एसएसपी के खिलाफ कार्यवाही किये जाने का कष्ट करें ताकि मा० सुप्रीम कोर्ट के वामानाना की स्थिति को रोका जा सके. साथ ही इस सम्बन्ध में पूरे प्रदेश से भी सूचना एकत्र करा कर इस सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही करना सुनिश्चित करें. यह भी निवेदन है कि लखनऊ तथा शेष प्रदेश के जिलों में इस स्थिति को तत्काल रोका जाना भी सुनिश्चित करने की कृपा करें.

डॉ नूतन ठाकुर

पत्र संख्या-
NT/SO Transfer/01
दिनांक-  20/07/2013

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