लखनऊ में नभाटा के पूर्व कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन किया

लखनऊ : देश प्रदेश के विभिन्न श्रम व कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कल नवभारत टाइम्स के छंटनीशुदा पत्रकारों व कर्मचारियों को सेवायोजक मैं. बैनेट कोलमैन एण्ड कम्पनी लिमिटेड द्वारा अब तक पुनः सेवा में न लिये जाने के विरोध में नवभारत टाइम्स कार्यालय के सामने धरना व प्रदर्शन कर एकजुटता प्रदर्शित की और उन्हें श्रम कानूनों के तहत सेवा में रखने की माँग की। इन संगठनों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से माँग की कि सरकार श्रम कानूनों का कठोरतापूर्वक पालन करा कर पिछले 20 वर्षों से निरन्तर संघर्षरत कर्मचारियों को न्याय दिलाएं।

सभा में प्रदेश के राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री से अपील की गई कि जब तक बैनेट कोलमैन का प्रबन्धन श्रम कानूनों का पालन कर के छटनीशुदा पत्रकारों व कर्मचारियों को सेवा में नहीं लेता है तब तक वे इनके किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा न लें। उल्लेखनीय है कि नवभारत टाइम्स का प्रकाशन बन्द करने के विरोध में 1993 में हुए आन्दोलन में कर्मचारियों के साथ घरने पर बैठने वाले विशिष्ट राजनीतिक नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह व अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी व मुलायम सिंह यादव भी शामिल रहे हैं जिनका सहयोग व समर्थन हमेशा रहा है।  

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के शैलेन्द्र दुबे, हिन्द मजदूर सभा के राष्ट्रीय सचिव गिरीश कुमार पाण्डेय, राजा राम यादव व पीयूष मिश्र, एटक के चन्द्रशेखर, यू.पी. बैंक इम्प्लाइज यूनियन के आर.के. अग्रवाल, उ.प्र. कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के प्रवक्ता बी.एल कुशवाहा, सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशर्नस एसोसिएशन के अमर नाथ यादव, लखनऊ वि.वि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजू व महामंत्री इच्छा शंकर अपने पदाधिकारियों के साथ नवभारत टाइम्सकर्मियों के समर्थन में धरने पर बैठे।

उ.प्र. हिन्द मजदूर सभा के महामंत्री उमाशंकर मिश्र ने कहा कि लखनऊ में समाचार पत्रों के कर्मचारियों को संगठित कर के उनके अधिकार दिलाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। टाइम्स कर्मचारी सभा के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान ने बताया कि 1993 से बन्द चल रहे नवभारत टाइम्स को पुनः लखनऊ से प्रकाशित किया जा रहा है परन्तु प्रबन्धन श्रम कानूनों के तहत छंटनीशुदा कर्मचारियों को पुनः सेवायोजन नहीं दे रहा है जिसके विरोध में हमें धरना प्रदर्शन करने को विवश होना पड़ा है।

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