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लड़कियों को आगे कर कारोबारियों को फंसाने व उनसे उगाहने वाला आगरा का यह फोटोग्राफर कौन है?

आगरा से प्रकाशित एक नए अखबार का फोटोग्राफर फंस गया है। अमर उजाला में खबर छपी है लेकिन घटनाक्रम में इस फोटोग्राफर का नाम नहीं है। पर जांच में उसकी भूमिका सामने आ गई है। यह फोटोग्राफर गैंगस्टर है और युवतियों के जाल में धनाड्यों को फंसाकर उनसे लाखों वसूल लेता है। गिरोह में दो दरोगा और दो युवतियां हैं। मामला गर्म है। दरोगागण मथुरा और अलीगढ़ में तैनात हैं। आगरा में तैनात रह चुके हैं।

आगरा से प्रकाशित एक नए अखबार का फोटोग्राफर फंस गया है। अमर उजाला में खबर छपी है लेकिन घटनाक्रम में इस फोटोग्राफर का नाम नहीं है। पर जांच में उसकी भूमिका सामने आ गई है। यह फोटोग्राफर गैंगस्टर है और युवतियों के जाल में धनाड्यों को फंसाकर उनसे लाखों वसूल लेता है। गिरोह में दो दरोगा और दो युवतियां हैं। मामला गर्म है। दरोगागण मथुरा और अलीगढ़ में तैनात हैं। आगरा में तैनात रह चुके हैं।

आगरा से प्रकाशित एक नए अखबार के फोटोग्राफर ने नए संपादक के साथ ही अखबार ज्वाइन किया था। दैनिक उजाला, हिंदुस्तान में काम कर चुके इस फोटोग्राफर की चर्चाएं आजकल गर्मी पैदा कर रही हैं। अमर उजाला ने 14 फरवरी के अंक में खबर छपी थी कि आगरा के ग्रामीण क्षेत्र से आए अग्रवाल परिवार के एक धनाड्य ने युवती को कार में लिफ्ट दी और वहां नंबरों का आदान प्रदान हुआ। फिर सस्ता मकान दिलाने के बहाने उसे बुलवाया। अश्लील हरकतें करते हुए फोटोग्राफर से फोटो खिंचवा लीं। पहुंचे दारोगाओं ने तभी छोड़ा जब चार लाख रुपये वसूल कर लिये गए। और धन की मांग की गई तो यह धनाड्य एक बड़े अखबार के क्राइम रिपोर्टर के पास पहुंचा।

बाद में मामला पुलिस तक पहुंचा। फोटोग्राफर के मोटापे, हकलाने, एक नेता की स्कार्पियों, टोपी का जिक्र छिड़ा तो पता चल गया कि यह फोटोग्राफर कौन है। यह फोटोग्राफर एक नए अखबार में फोटोग्राफर के रूप में काम करता है। फेसबुक पर फोटो देखकर धनाड्य ने न केवल फोटोग्राफर बल्कि साथ वाली युवती को भी पहचान लिया। युवती और उसके गोवा में बीच के फोटो फेसबुक पर लोड थे। पूरा मामला एसएसपी के सामने हुआ। एसएसपी ने दो दरोगाओं को जिम्मेदारी दी कि वह फोटोग्राफर को बुलवाएं ताकि अनौपचारिक रूप से शिनाख्त हो जाये परंतु फोटोग्राफर पहुंचा ही नहीं। एक सिपाही ने फोन किया और बहाने से नाई की मंडी बुलाया। पर उसने अपने असिस्टेंट फोटोग्राफर को भेज दिया।

बाद में एक दूसरे अखबार के फोटोग्राफर ने उसे एक घटनाक्रम की फोटो खींचने के लिए कहीं बुलवाया तब वहां उसकी शिनाख्त हो गई। फोटो खींच रहे फोटोग्राफर की फोटो खींचकर दिखाई गई। एसएसपी की नजर में फेसबुक के साक्ष्य ही काफी हैं और अब तो पीड़ित ने पहचान भी लिया है। जांच कर रहे इंस्पेक्टर बुला रहे हैं। फोटोग्राफर उनसे मिलने भी नहीं जाता, बस सिर्फ कार्यालय आता है, फील्ड में नहीं जाता। वह अखबार प्रबंधन को समझा रहा है कि दूसरे अखबार उससे पुराने एक मामले में बदला ले रहे हैं। मामला अखबारों से जुड़ा है इसलिये आईजी खुद इस मुद्दे को देख रहे हैं। देखना है कि क्या कार्रवाई होती है। वैसे इस मामले की आगरा के मीडियाकर्मियों के बीच खूब चर्चा है।

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