लड़कों की बजाय, लड़कियों का आना अच्छा लगता है

Manisha Pandey : बहुत सारे लड़के मेरे दोस्‍त हैं और बहुत प्‍यारे दोस्‍त हैं। एकदम यारबाश। लेकिन फिर भी घर आकर पार्टीबाजी करें तो मजे के साथ-साथ बहुत गुस्‍सा आता है। जबकि लड़कियों का आना, रहना, पार्टी करना, दारू पीकर लोटना सब अच्‍छा लगता है।

कारण?

लड़के आते हैं तो लगता है जैसे घर में कोई तूफान आकर गुजरा है। किचन से लेकर रूम तक पूरा घर कबाड़खाना बन जाता है। प्‍लेट कहीं पड़ी है, बीयर की बोतल कहीं पड़ी है। जगह-जगह एश्‍ट्रे बिखरा पड़ा है। जो किताब बुक शेल्‍फ से निकाली, वहीं छोड़ दी। सब्‍जी के छिल्‍के, आटा, चावल पूरे प्‍लेटफॉर्म पर लोट रहा है। कहीं चिप्‍स का पैकेट उड़ रहा है, कहीं मूंगफली, नमकीन चादर पर विराजमान हैं। और तो और, कुशन और चादर पर दाग भी लग जाते हैं। पूरे घर में उथल-पुथल। सब ओर तबाही। पानी की बोतलें पी-पीकर खाली कर दीं और भरने का होश किसी नहीं।

और लड़कियां?

कितनी प्‍यारी होती हैं। कितनी अच्‍छी, सलीकेदार, सफाईदार, समझदार। सब्‍जी काटेंगी तो सारे छिल्‍के डस्‍टबिन में। पानी की बोतल खाली होने से पहले ही भरकर रख दी। कभी हम लोग बाहर से शॉपिंग करके आए तो एक स्‍कर्ट के साथ दस टॉप निकालकर पहन-पहनकर आईने के सामने मटक रहे हैं। पूरे बेड पर कपड़ों का ढेर लग गया। लेकिन फैशन परेड पूरी होते ही दस मिनट के अंदर बिना कहे मेरी दोस्‍त सारे कपड़े तह करके जगह पर पहुंचा देती है। ये पूछने की भी जरूरत नहीं कि इसे रखना कहां है। और लड़के चायपत्‍ती का डिब्‍बा आलमारी से उठाने के बाद आवाज लगाकर पूछते हैं कि अब इसे रखूं कहां?

अरे अपनी खोपड़ी पर रख लो। चरस।

लड़कों को ये सीखने की जरूरत है। उन्‍हें अपनी लापरवाहियां और नाकारापन ही अपना एसेट लगता है। ये कोई महान गुण नहीं है। तुम्‍हारी इंडियन, नॉर्थ इंडियन परवरिश का नतीजा है। क्‍या समझे बेटा?

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Manisha Pandey : लड़कियां काम करती हुई कितनी अच्‍छी लगती हैं। उस दिन पासपोर्ट ऑफिस में काम करने वाली सारी लड़कियां कितनी कमाल की लग रही थीं। कितनी स्‍मार्ट, खूबसूरत, एफिशिएंट। जिस लड़की ने मेरे डॉक्‍यूमेंट चेक किए, कितनी फटाफट सब काम कर रही थी और बिलकुल फोकस्‍ड। कभी किसी रिपोर्टिंग एसाइनमेंट में जींस और जूता पहले, 15 किलो का कैमरा अपने कंधे पर लादकर दौड़ती और शूट करती हुई लड़की को देखा है। अद्भुत। कितनी कमाल की लगती है, कॉन्फिडेंट और जिंदगी से भरी हुई।

साइकिल और बाइक चलाती, दौड़ती-भागती, काम पर जाती, बोलती, चीखती, लड़ती, जीती और अपने फैसले लेती हुई लड़कियां कमाल लगती हैं।

और पता है सबसे ज्‍यादा गुस्‍सा किन पर आता है।

फेसबुक पर मोहब्‍बती शायरी पोस्‍ट करने वाली लड़कियों पर।

वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया टुडे हिंदी मैग्जीन की फीचर एडिटर मनीषा पांडेय के फेसबुक वॉल से.

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