‘लव जेहाद’ की हकीकत

संघ परिवार का 'थिंक टैंक' नए-नए मिथक गढ़ता में बहुत माहिर है। मुसलमानों के बारे में संघ परिवार ऐसे-ऐसे मिथक गढ़ता है कि कभी हंसी आती तो कभी उस पर तरस आता है। बहुत पहले से संघ परिवार ने 'लव जेहाद' का मिथक गढ़ रखा है। शुरू में तो यही पता नहीं चल पाया कि यह 'लव जेहाद' बला क्या है। धीरे-धीरे पता चला कि संघ परिवार ने एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत यह अफवाह फैलाई कि मुस्लिम लड़के अपनी पहचान छिपाकर भोली और मासूम हिंदू लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उनसे शादी करते हैं और बाद में उनका धर्म-परिवर्तन कराते हैं।

यहां तक झूठ बोला गया कि हिंदू लड़कियों को आतंकवादी कार्यवाई में हिस्सा लेने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसा लगता है कि संघ परिवार को यही नहीं पता कि यह इक्कसवीं सदी चल रही है। इस सदी में वह सब कुछ हो रहा है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी। आज की तारीख में भारत में मल्टीनेशनल कम्पनियों की बाढ़ आई हुई है। इन कंपनियों में हिंदु और मुस्लिम लड़कियां और लड़के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। सहशिक्षा ले रहे हैं। साथ-साथ कोचिंग कर रहे हैं। इस बीच अन्तरधार्मिक, अन्तरजातीय और एक गोत्र के होते हुए भी प्रेम होना अस्वाभाविक नहीं है। प्रेम होगा तो शादियां भी होंगी। समाज और परिवार से बगावत करके भी होंगी।

अब कोई हिंदु लड़की किसी मुस्लिम लड़के से प्रेम और शादी कर लेती हैं तो संघ परिवार 'लव जेहाद' का राग अलापना शुरू कर देता है। जबकि सच यह है कि मुस्लिम लड़कियां भी हिंदु लड़कों से अच्छी खासी तादाद में शादियां कर रही हैं। इसे संघ परिवार क्या नाम देना चाहेगा? शायद इसमें भी संघ परिवार यह कहना चाहेगा कि मुस्लिम लड़कियां हिंदू लड़के का भी धर्म-परिवर्तन कराकर 'लव जेहाद' को अंजाम दे रही हैं। मेरठ के एक गैर सरकारी संगठन ने उन हिंदू और मुस्लिम लड़कियों से बातचीत की थी, जो विपरीत धर्म के लड़कों से प्रेम करती थीं। उस बातचीत में यह निकलकर आया था कि वे लड़के का धर्म पहले से जानती थीं, लेकिन दिल के हाथों मजबूर थीं।

लड़के और लड़की की जिद के चलते अब तो परिवार की रजामंदी से भी अन्तरधार्मिक शादियां हो रही हैं। कुछ साल पहले जब मैं अपने छोटे भाई की शादी के लिए शादी कार्ड लेने बाजार गया तो सेम्पल के तौर पर जो कार्ड दुकानदार ने मुझे दिखाए थे, उनमें एक कार्ड अन्तरधार्मिक शादी का कार्ड भी था। उस दिन मेरा यह मिथक टूटा था कि अन्तरधार्मिक शादियां केवल समाज और परिवार से बगावत करके की संभव हो सकती हैं। मेरे एक रिश्तेदार के लड़के का स्कूल के जमाने में ही एक हिंदू लड़की से अफेयर हो गया था। मेरे रिश्तेदार बहुत परेशान हो गए थे। लेकिन वह इस बात से आश्वस्त थे कि किशोर उम्र की प्यार की खुमारी वक्त के साथ खुद ही दूर हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लड़के ने दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी ज्वायन कर ली। लड़की अपनी एजुकेशन पूरी करके घर में रही। लेकिन दोनों का प्यार कम नहीं हुआ। दोनों ही ने कहीं और शादी करने से साफ इनकार कर दिया। दोनों परिवारों ने आपसी रजामंदी से दोनों के कोई गलत कदम उठाने से पहले दोनों को शादी की रजामंदी दे दी। अब इसे 'लविंग जेहाद' कहें या यह कहें कि 'जोड़ियां स्वर्ग में तय होती हैं।'

अन्तरधार्मिक प्रेम और शादियों की वजह क्या है। ऐसा भी नहीं है कि ऐसा कभी हुआ ही नहीं। यह अलग बात है कि मीडिया के फैलाव और संघ परिवार की हायतौबा के चलते यह ज्यादा लगने लगा है। मुगल बादशाह अकबर ने जोधाबाई से शादी की थी। फिल्मों मे अन्तरधार्मिक शादियों को सिलसिला भी पुराना है। नर्गिस ने सुनील दत्त से शादी की। किशोर कुमार ने मधुबाला से शादी की, जो मुस्लिम थीं। सुनील शेट्टी की पत्नी मुस्लिम हैं। इसी तरह शाहरुख और आमिर खान ने हिन्दु लड़कियों से शादी की। मशहूर फिल्म निर्देशक फरहा खान और तब्बू की बहन ने हिन्दू से शादी की है। बॉलीवुड की यह कुछ मिसालें हैं। यदि बात की जाए राजनीति की तो इंदिरा गांधी ने एक पारसी फिरोज से शादी की थी। राजीव गांधी ने ईसाई से शादी की। उमर अब्दुल्ला ने एक हिन्दू परिवार में शादी की तो सचिन पायलट की पत्नि उमर अब्दुल्ला की बहन हैं। लविंग जेहाद का मिथक गढ़ने वाले संघ परिवार के सदस्य लालकृष्ण आडवाणी की भतीजी और बाल ठाकरे की पोती ने मुसलिम से शादी की। भाजपा के मुसलिम चेहरे कहने जाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन की पत्नियां भी हिंदू हैं अब पता नहीं, वह लविंद जेहाद था या नहीं?  अफसानों पर यकीन मत किजिए हकीकत का सामना करें।

लेखक सलीम अख्तर सिद्दीकी मेरठ से प्रकाशित हिंदी दैनिक जनवाणी में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. उनसे संपर्क saleem_iect@yahoo.co.in या 09045582472 के जरिए किया जा सकता है.

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