लेखिका ज्योति को मौकापरस्त, पुरातनपंथी, महत्वाकांक्षी एवं चालबाज कहने वाले सुनें

Mohammad Anas : आपकी प्रगतिशीलता दरअसल औरत को उसकी सहमति से बिस्तर तक ले जाने तक ही सीमित रह पाई है. वही औरत जब खुद पर हुए यौन हमले के खिलाफ लामबंद होती है तो आप घबरा जाते हैं और उस औरत में आपको मौकापरस्त, पुरातनपंथी, महत्वाकांक्षी एवं चालबाज आदि डिस्कोर्स नज़र आने लगते हैं. भूलिए नहीं की ज्योति ने जो आरोप लगाए हैं राजेन्द्र यादव के ऊपर उन राजेन्द्र यादव की ढकी और छुपी हर बात को समाज बेहतर तरीके से जानता है.

आपको संशय है तो कीजिए लेकिन संशय यहीं क्यों हुआ? यह संदेह शाहजहाँपुर वाली उस बच्ची पर आपने क्यों नहीं किया जब उसने आसाराम जैसे बड़े व्यक्तित्व के घिनौने कृत्य पर आवाज़ उठाई थी. कामरेड, आपका ज्योति को महत्वाकांक्षी कहना, आपकी पोंगापंथी सोच की पोल खोलता है और यह बताता है कि आप भी मामलों को लेकर किस हद तक संकुचित हैं.

        Pankaj Singh afsosjanak…sharmnaak ! par Mohammad Anas bhai, aise log aur kuchh ho sakte hain…Pragatisheel kattai nahi. Aise bahut hain huzoor. amaa laanat bhejo.
 
        Dev Kumar ये सब फेँकू है मित्र !  
 
        Anil Janvijay सबसे पहले ज्योति का समर्थन करना हमारा कर्तव्य है। उसके बाद देखेंगे ग़लती किसकी थी। मैं ज्योति के साथ हूँ हर तरह से। वह पीड़ित है और जो भी लोग उसे महत्त्वाकांक्षी बता रहे हैं, वे बगुलाभगत हैं और रेत में अपना मुँह छुपाने की कोशिश कर रहे हैं।
    
        Abdullah Aqueel Azmi ज्योतिकुमारी की आपबीती पूरी पढ़ी, अफसोस हुआ. दुःख भी। सचमुच, साहित्य के इस आशाराम का एक गन्दा चेहरा सामने आया है जितनी निंदा की जाये कम है
 
        Rumman Faridi kon jane kya sach hai??? hammam me sab nange hain???
 
        Ali Bahadur such or huq baat bolne wale bahut kam log hote he.
   
        Kishor Jha राजेँद्र यादव का व्यक्तिगत चरित्र उनके साहित्यिक चरित्र का उलटा है। उनके जानने वाले कहते हैँ उन पर मनोहर कहानियोँ का एक विशेषाँक आ सकता है!
 
        Kamal Pant ज्योती की कहानी पहले पढी … एक महानुभाव मुझे उलाहना दे रहे थे कि आपकी मीडीया आसाराम जैसे संत का घंटो का प्रोग्राम चलाती है ..पर जब अपने ही लोगो की बात आती है तो खामोश हो जाती है…. आखिर क्यों खामोश है इस पर मीडीया ?
 
        Rahul Chauhan राजेंद्र यादव ने अगर कभी किन्ही शब्दों, विशेष शब्दों में अपनी हरकतों, इच्छाओ, क्रियाओ का जिक्र किया हो तो मेरी नजरो में वो ज्यादा दोषी नहीं, सेक्स-व्यहवार इंसान का सबसे नैसर्गिक गुण है.
   
        Mohammad Anas छपास रोग है ,लेखक गैंग है ,हंस ब्रांड है ..इसलिए कुछ ज्ञानी गोबर्धनों को ज्योति में 'औसत से कम दर्जे' की काबिलयत नज़र आ रही है और वे इस कारण से उसके ऊपर हुए यौन हमले को जस्टिफाय कर रहे हैं .यौन हमले की शिकार महिला के लिए जब ऐसे शब्द का इस्तेमाल कोई करता है तो ज्यादा देर नहीं लगनी चाहिए आपको यह समझने में की 'एक्चुअली ही इज़ ट्राईंग टू डू क्रांति '.
     
        Vinod Kumar Singh 'Actualy he is traying to do kranti' ye chuni huyee pratibadhtaye hain jo jhansaram se to sawal karti hain kintu kisi Rajendr yadaw ko khud ke gadhe hue sansayon ke aadhar par n keval twarit mukti deti hain balki peedita ko hi katghare me khada karti hain
      
        Pradeep Paliwal … अनस सर ! साहित्यिक गलियारे में 'छलात्कारी' शब्द पहले से मौजूद है ! जो कभी राजेन्द्र जी के लिए ही गढ़ा गया था !

युवा पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.


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जब मैं समझ गई कि राजेंद्र यादव के घर से बच कर निकलना नामुमकिन है, तब मैंने सौ नंबर मिलाया

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राजेंद्र यादव ने तरह-तरह के एसएमएस भेजे, वे साहित्यिक व्यक्ति हैं, इसलिए उनकी धमकी भी साहित्यिक भाषा में थी

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