लोन के विज्ञापन के बहाने जनता को लुटवा रहे हैं अखबार

ऐसा लगता है मानो सरकार ने भोले-भाले जरूरतमंदों को लूटने का लाइसेंस कुछ लोगों को दे दिया है. इस गोरखधंधे में बड़े अखबारों, न्यूज़ चैनलों की भी हिस्सेदारी नज़र आती है. भोले-भाले गरीब इनकी चाल में फंसते जा रहे है. दुःख तो इस बात का है कि इनकी फ़रियाद तक सुनने वाला कोई नहीं है. उल्टा उपदेश दिया जाता है कि जैसा किया है वैसा भोगो… मध्यप्रदेश में ऐसे 'ज्वेलथीफ' अमीर होते जा रहे हैं और जनता गरीब. सरकार मौन है. मीडिया की मिलीभगत के चलते कोई लगाम की सोच भी नहीं सकता.

मध्यप्रदेश के अधिकांश इलाके में कम पढ़े लिखे लोग हैं. यहाँ आदिवासियों की आबादी ज्यादा होने से लूटने वालों के लिए यह इलाका 'प्रोटेंशियल' वाला लगता है. एक तो कम पढ़े- लिखे, उपर से भोले. सो लूट की छूट जारी है. कुछ ताज़ा घटनाओं की तरफ आपका ध्यान लाना जरूरी है-

१- मोबाइल टावर में लूट : नामी न्यूज़ पेपर में विज्ञापन छपता है. अपनी खाली जमीन और खेत में मोबाइल कम्पनियों के टावर लगवाएं. बदले में ७ लाख नगद और परिवार के एक सदस्य की नौकरी पायें. इस विज्ञापन का असर ये हुआ कि लोगों ने अपनी कमाई लूटा दी. टावर लगाने की प्रोसेस की शुरुआत में ही पार्टी से ५ हजार रुपये स्टेट बैंक के खाते में जमा करवा लिए. कुछ दिनों में टावर लगाने वाले रफूचक्कर हो गये. उनके मोबाइल नम्बर बंद हो गये. चूँकि यह सारा खेल मोबाइल पर चल रहा था, इसलिए लोग इन 'नटवरलालों' को कैसे खोजे? यह भी एक समस्या है. पुलिस में सुनवाई नहीं होती. ठगे गये अभी तक भटक रहे हैं.

२- गरीब महिला शकीला लोन से अपनी और अपने दो बच्चों की किस्मत बदलना चाहती थी. वह उजाला फाईनेंस, चंडीगढ़ के फेर में आ गयी. बकौल शकीला, मैंने सोनू वर्मा नाम के व्यक्ति के खाते क्रमांक ३२७२६३५५२३७, जो स्टेट बैंक में है, में पहले ३६००/- फिर २०००/- जमा कराए. लोन १ लाख रुपये का चाहा था, इसलिए सोनू ने फीस के नाम पर ये रकम जमा करा ली. (देखें रसीद) शकीला की आर्थिक स्तिथि ठीक नहीं है. उसका सोच था कि लोन के रुपयों से कुछ काम हो जायेगा किन्तु उसे चपत लग गयी.

३- इन दिनों रकम दुगना करने का फंडा खूब चल रहा है. ५ हजार के १५ दिन में १० हजार बनाने का मन्त्र देकर लूट की दुकानें जम गयी है. पुलिस के पास इनकी खबर लेने की फुर्सत नही है.

दिलीप सिकरवार

09425002916

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