अमर उजाला, मुरादाबाद से खबर है कि संपादक की गलती उनके कर्मचारियों पर भारी पड़ गई. 'वबाल' के बवाल के चलते प्रबंधन ने एडिटोरियल के सभी कर्मचारियों को इंक्रीमेंट और प्रमोशन न देने का फैसला किया है. पत्रकार उनकी गलती न होते हुए भी प्रबंधन के फैसले से नाराज हैं. उनका मानना है कि प्रबंधन को पैसे न देने का बहाना चाहिए था, जो संपादक की गलती के चलते उन्हें मिल गया है.
बताया जा रहा है कि मुरादाबाद के संपादक नीरजकांत राही ने कुछ दिन पहले एडिटोरियल के सभी कर्मचारियों को मेल भेजकर 'बवाल' की जगह 'वबाल' लिखने का निर्देश दिया था. कर्मचारी 'वबाल' लिखते समय हमेशा झिझकते थे, लेकिन संपादक का आदेश था तो उन्हें मानना ही था. काफी समय से अखबार में वबाल शब्द ही प्रकाशित किया जा रहा था. इसी बीच 22 जून को मुरादाबाद में किसी विवाद को लेकर बवाल हुआ. इस खबर को 23 जून के अंक में चार नम्बर पेज पर आठ कॉलम का लीड बनाकर छापा गया. इस खबर की हेडिंग में भी संपादक के निर्देशानुसार बवाल की 'वबाल' लिखा गया.

सूत्रों का कहना है कि नियमानुसार सभी यूनिटों के संस्करणों की मॉनिटरिंग प्रतिदिन नोएडा में संजय पांडेय करते हैं. उन्होंने इस गलती को पकड़ी तथा इसकी रिपोर्ट प्रबंधन के वरिष्ठ लोगों को दी. इस के बाद संपादक से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया. हालांकि संपादक ने इस की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए इसे अपनी गलती बताई. बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने इसके बावजूद इस गलती के सजा के तौर मुरादाबाद यूनिट के एडिटोरियल के सभी कर्मचारियों का इंक्रीमेंट तथा प्रमोशन रोकने का निर्णय ले लिया. यानी संपादक की गलती की सजा सभी कर्मचारियों को मिल गई.





