वरिष्ठ ब्लागर, आयुर्वेद के डाक्टर और समाजसेवी डा. रुपेश श्रीवास्तव का मुंबई में हार्ट अटैक से निधन

भड़ास ब्लाग के शुरुआती सक्रिय सदस्यों में से एक डा. रुपेश श्रीवास्तव का मुंबई में निधन हो जाने की सूचना मिली है. उनका निधन 9 मई को मुंबई के पनवेल स्थित एक स्थानीय अस्पताल में हुआ. बताया जाता है कि डा. रुपेश श्रीवास्तव को हार्ट अटैक आया. 8 मई को हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. अगले दिन उनका निधन हो गया. ब्लागिंग से लेकर समाजसेवा तक में सक्रिय रहे रुपेश श्रीवास्तव की उम्र करीब 40 साल के आसपास थी. वे आयुषवेद समेत कई ब्लाग संचालित करते थे.

साथ ही मुंबई में हिजड़ों, उपेक्षितों आदि के बीच सक्रिय रहकर उनकी बेहतर जिंदगी के लिए लड़ते थे. बिल्डरों की मनमर्जी के खिलाफ डा. रुपेश ने कई बार आवाज उठाई जिसके कारण उन्हें बिल्डरों का भी कोपभाजन बनना पड़ा. एक दौर में डा. रुपेश पर हिंदी ब्लागिंग का जुनून सवार था. उन्होंने अपने सभी परिचितों के लिए ब्लाग बनाए और उन्हें लिखने को प्रेरित किया. सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक लेखने करने वाले डा. रुपेश की शादी नहीं हुई थी. वे समाजसेवा के वास्ते

डा. रुपेश श्रीवास्तव
डा. रुपेश श्रीवास्तव
कुंवारे रहने का फैसला कर चुके थे.

उनके सगे बड़े भाई मुंबई में लोकल रेलवे में नौकरी करते हैं. मूलतः यूपी के रहने वाले डा. रुपेश का कई भाषाओं पर समान अधिकार था. डा. रुपेश के निधन से मुंबई समेत पूरे देश में उनके जानने वाले, परिचित, रिश्तेदार आदि सन्न हैं. मात्र 40 वर्ष की छोटी उम्र में चले जाना किसी को भी पच नहीं रहा. हर कोई सूचना मिलने पर स्तब्ध हो रहा है.

डा. रुपेश के चले जाने के बाद सत्यप्रकाश मौर्या 12 मई को लिखते हैं- ''आँखों से बह गये अश्कों के धारे, तुम इतनी जल्दी क्यों हो गये अल्लाह को प्यारे. भड़ासी डा. रुपेश श्रीवास्तव की शोक सभा में अंजुमन इस्लाम हाल में लोगों के कलेजे फ़ट गये. आँखों से अश्रू के धारे बहते जाते थे, जो थमने का नाम ही नहीं लेते थे. लोगों के दिलों की भड़ास निकाल कर अपनी मीठी मीठी यादों की मिठास घोल कर कभी न वापस लौट कर आने के लिये हमें अलविदा कह कर चले गये डा.रुपेश जी. शोक सभा में मुंबई की तमाम नामचीन हस्तियां शामिल हुईं. रुपेश जी के नाम से अवार्ड और स्कूल खोलने की घोषणायें हुईं और उनकी जिंदगी के बारे में एक डाक्यूमेन्ट्री फ़िल्म भी दिखायी गयी.''

मुनव्वर सुल्ताना जी लिखती हैं- Dr. Rupesh Srivastava humesha humare sath apne kiye hue kaaryo ke sath zinda rahenge!! naa jaane konse chor raste se sabke dilo mein ghus gaye.. or amar hogaye

डा. रुपेश के करीबी साथी रजनीश झा लिखते हैं- डॉ. रुपेश कभी नहीं मर सकता, ये वो नश्वर है जो विचारों के साथ भड़ास के जरिए आत्मा तक में वास करता है, कौन कह सकता है कि मात्र 40 साल का यह युवा हृदयाघात से दुनिया छोड़ सकता है.

ब्लॉगर अविनाश वाचस्पति ने कहा… सहसा कानों में पारा घुलने जैसा अहसास हो रहा है। दो या तीन बरस पहले उनसे हुई मुलाकात कभी भूल नहीं सकता। जब मुंबई में पहले हिंदी ब्‍लॉगर मिलन समारोह में हुई थी। अगली बार दोबारा से मिलना संभव नहीं हो सका। पिछले बरस कल्‍याण के कॉलेज में आयोजित संगोष्‍ठी में उनके शामिल होने की सूचना परंतु वे किसी कारणवश नहीं आए। उनसे फोन पर फिर से मिलने की बात हुई थी। ऐसा बिंदास व्‍यक्तित्‍व, जुझारूपन, कहां सबमें देखने को मिलता है। उनके साथ मुंबई लोकल बस और लोकल ट्रेन में काफी लंबी यात्र की। लेकिन इस यात्रा पर वे अकेले ही चले गए। सच है कोई किसी को साथ लेकर नहीं जाता। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। नुक्‍कड़ के भी एक सेनानी रहे हैं वे, और अभी भी जुड़े हुए हैं।

ब्लॉगर अन्तर सोहिल ने कहा…. ओह… विश्वास नहीं हो रहा है… हिन्दी ब्लॉगजगत में उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती… अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि. ब्लॉगर डॉ टी एस दराल ने कहा… बहुत दुखद. एक जुझारू ब्लॉगर का अचानक चले जाना ब्लॉगजगत के लिए अपूरणीय क्षति है .

सबसे बाएं डा. रुपेश.

आयुर्वेद पर केंद्रित डा. रुपेश का ब्लाग आयुषवेद देखने के लिए क्लिक करें- www.aayushved.blogspot.in/

यशवंत के नेतृत्व में संचालित भड़ास ब्लाग से अलग होकर रुपेश ने अपना अलग भड़ास ब्लाग बनाया, जिस तक पहुंचने के लिए क्लिक करें- www.bharhaas.blogspot.in

डा. रुपेश ने मुंबई की एक हिजड़ा (हिजड़ों-किन्नरों को वे लैंगिक विकलांग कहते लिखते थे) मनीषा को ब्लागिंग के क्षेत्र में उतारा, देखें ब्लाग- www.adhasach.blogspot.in


डा. रुपेश के बारे में अगर आप कुछ लिखना चाहते हैं, कोई संस्मरण है, तो bhadas4media@gmail.com पर मेल कर दें.

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