वह पत्रकार भांग के पेड़े बेचता था

फुर्सत के समय मैं इंटरनेट पर जिन चीजों की सबसे ज्यादा तलाश करता हूं वे हैं – दूसरे महायुद्ध से पहले की तस्वीरें, नई दुनिया का रास्ता खोजने वाले यात्री, दुनिया के बहुत पुराने पुस्तकालय और युद्ध में भाग लेने वाले सैनिक। पुरानी चीजों के प्रति मेरी दीवानगी ऐसी है कि मेरे संग्रह में सौ साल से भी ज्यादा पुरानी चीजें जमा हो गई हैं। मेरे पास कई सिक्के सवा सौ साल पुराने हैं।

एक किताब ने इसी साल अपने सौ वर्ष पूरे किए हैं। वह मेरे परिवार के एक सदस्य की तरह है। हर हफ्ते एक बार मैं उसे जरूर देखता हूं। पुरानी चीजें मैं कभी कबाड़ी को नहीं बेचता। कितना अच्छा होता अगर हम बीते हुए वक्त में वापस जा सकते। अगर इस दुनिया में कभी यह संभव हुआ तो मैं इसे जरूर आजमाना चाहूंगा। वह क्षण मेरे लिए बहुत रोमांचक होगा जब मैं 2013 में रात का खाना खाकर अच्छी नींद लूं। अगले दिन जब मैं Times of India पढूं तो मालूम हो कि आज 1883 की एक जनवरी है। मुझे लगता है कि एक दिन यह संभव होगा जब कुछ लोग बीते समय में जरूर जा सकेंगे। अगर ईश्वर ने मुझे इसका मौका दिया तो मैं सबसे पहले टाइटेनिक जहाज के कैप्टन से मिलना चाहूंगा। मैं उन्हें बताऊंगा कि जहाज रवाना न करें। इस तरह मैं जैक और रोज की जिंदगी बचा लेता।

दुनिया में कई अच्छे राष्ट्रपति हुए हैं, लेकिन मुझे जॉर्ज वाशिंगटन सबसे ज्यादा पसंद हैं। मैंने पढ़ा है कि वे बेहद विनम्र राष्ट्रपति थे। एक बार जब कुछ सैनिक लकड़ियों का बड़ा गट्ठर गाड़ी में रख रहे थे तो वे वहां पहुंचे। उस वक्त वहां मौजूद एक सैनिक अधिकारी सैनिकों को और जोर लगाने का आदेश दे रहा था। जब वाशिंगटन ने उससे कहा कि तुम इनकी मदद क्यों नहीं करते, तो वह बोला, ‘मैं इनकी मदद कैसे कर सकता हूं सर! मैं एक अधिकारी हूं।’

इस पर खुद वाशिंगटन ने सैनिकों की मदद की और अधिकारी को अपना कार्ड देते हुए कहा, ‘यदि भविष्य में भी तुम्हें इस तरह के काम में मेरी जरूरत हो तो संपर्क कर लेना।’ और वाशिंगटन अपने घोड़े पर बैठकर चले गए। अधिकारी ने कार्ड देखा। उस पर लिखा था – जॉर्ज वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति। यह कहानी मैंने कई बार पढ़ी। एक दिन ऐसा आया कि यह मेरी सबसे प्रिय कहानी बन गई। अगर मैं वाशिंगटन के साथ वहां मौजूद होता तो उनसे कहता, ‘सर, आपकी यह बात हमें स्कूलों में पढ़ाई जाती है और मैं आपसे हाथ मिलाना चाहता हूं।’ मुझे पूरा भरोसा है कि इतना विनम्र राष्ट्रपति कभी किसी को निराश नहीं कर सकता।

अफवाहों का भी एक लंबा इतिहास रहा है। हर अफवाह शुरू में सच लगती है। बाद में कुछ लोग उसे गलत साबित कर देते हैं। मैं नहीं जानता कि कौनसी बात कब अफवाह साबित होने वाली है। एक बार मुझे किसी ने बताया कि छोटे शंख को दूध में डुबोने से एक ही रात में वह बड़ा हो जाता है। यह प्रयोग मैंने कई बार दोहराया लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली। यदि मुझे महान वैज्ञानिक आइंस्टीन से बात करने का मौका मिलता तो उनसे जरूर पूछता कि शंख वाली बात सही है या कोरी अफवाह। मुझे लगता है कि सच्चाई जानने के लिए आइंस्टीन भी मेरा प्रयोग जरूर दोहराते।

चलते-चलते

अगर आपको बीते वक्त के किन्हीं पांच लोगों को दावत पर बुलाने का मौका मिले तो किसे बुलाना चाहेंगे? इस मामले में मेरी सूची पहले से तैयार है। मैं नेपोलियन, सिकंदर, महाराजा अशोक, महाभारत के पात्र बर्बरीक और सुभाषचंद्र बोस को जरूर आमंत्रित करूंगा। इस अवसर पर उनसे क्या बातें होंगी, वे मेरी कल्पना से बाहर हैं, लेकिन अगले दिन आपको मेरे ब्लॉग पर उनका इंटरव्यू जरूर मिलेगा।

इंटरव्यू से जुड़ी एक और बात है। किसी सामाजिक कार्यक्रम में मेरी मुलाकात एक अंकल से हुई। उन्होंने मुझे बताया कि अपनी जवानी के दिनों में वे बहुत बड़े पत्रकार रह चुके हैं और उन्होंने कई राजनेताओं के इंटरव्यू लिए। तब उनकी खबरों पर संसद में लंबी बहस होती थी। उन्होंने मुझे बताया कि लेखन में कौन-सी शैली पाठक ज्यादा पसंद करते हैं। उनकी बातों में मुझे दम लगा। एक दिन मैंने उनके बारे में किसी परिचित से पूछा तो मामला कुछ और निकला। असल में वे अंकल पत्रकार नहीं थे और उन्होंने पूरी जिंदगी में कभी अखबार नहीं पढ़ा। वे एक हलवाई थे और भांग के पेड़े बेचते थे। उस दिन भी वे एक पेड़ा खाकर आए थे, इसलिए उन्होंने मुझे इतनी महत्वपूर्ण जानकारी दी।

राजीव शर्मा

संचालक

गांव का गुरुकुल

ganvkagurukul.blogspot.com
 

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