वह बेबस रण्डी नहीं, वाकई रणचण्डी निकली

: इस कॉल-गर्ल के तेवरों में है स्त्रीसशक्तिकरण का असली मन्त्र : अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की उत्तर-कथा : सिकुची औरत छिनार हो जाती है, जबकि सतर्क वेश्या बन जाती है, अधिकार और आत्म-सम्मान सम्पन्न श्रमिक : एक बड़े होटल में इस महिला को तीन भेडि़यों ने रात भर नोंचा : इस मेहनत को रंडी कह कर पीटा गया, तो औरत ने कीमत वसूल ली : नेता जी उस औरत को बेबस समझ कर रण्डी कहा, लेकिन जब उसने तेवर दिखाये तो सरेआम उसका पैर छुआ और बहन कह कर माफी मांगी :

लखनऊ : जी हां, यह एक रण्डी की कहानी है, जो स्त्री सशक्तिरण की बेमिसाल बन गयी। मेरा मानना है कि दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों और आत्म-सम्मान को लेकर चल रहे घमासान-युद्ध इस महिला के सामने बेहद बौने हो जाएंगे। पूरी बात कहने-करने से पहले मैं इतना जरूर कहना-लिखना चाहूंगा कि यह महिला स्त्री सशक्तिरण के लाजवाब मशाल है, जबकि हमारे आसपास संकोच-शर्मीली महिलाएं अपने ऐसे ही स्वभाव के चलते पूरी जिन्दगी भर शर्मनाक शोषण का शिकार बनी रहती हैं।
दरअसल, मैं महिला सशक्तिकरण की दिशा से व्यथित हूं। अक्सर तो मनीषा पाण्डेय और निशा पाण्डेय जैसी महिलाओं के प्रवचनों से मन खिन्न हो जाता है। लेकिन कभी-कभी ऐसी महिलाएं मेरा हौसला बढ़ा देती हैं, जो जो रोजी-रोजगार के लिए उस क्षेत्र में झण्डा फहरा देती हैं, जो उसे घृणित-त्‍याज्य और शर्मनाक तक माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद ऐसे भी क्षेत्र में काम कर रहीं महिलाएं जब अपनी अस्मिता और खुद के होने पर आमादा हो जाती हैं, तो उनके प्रति बरबस वाह-वाह निकल कर उनके सामने सिर नवाने का मन हो जाता है।

ऐसी ही एक महिला मेरे संज्ञान में कई बरस पहले आयी थी। जिसने अपने कर्म और सम्मान को अलग-अलग देखा और गजब का हौसला दिखा दिया। सरेआम। मैं तो उसके हौसले के सामने झुक गया। यह किस्सा लिखने का मन हमेशा उमड़ता रहा, लेकिन मैं भी शील-संकोच के चलते समझ में नहीं पाया कि इस मामले को कैसे लिखूं। कहीं ऐसा न हो कि लोग मुझे भड़ुवा करार दे दें। लेकिन जब कल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित अनेक आयोजनों में महिला रूदन और चीत्कार को सुना-देखा, तो खुद को अब रोक नहीं पा रहा हूं। मेरा मानना है कि संकोच करने के चलते ही ज्यादातर महिलाएं शोषित होती रहती हैं।

मेरे बचपन का एक मित्र बड़ा उद्योगपति है। बड़ी हैसियत है और बड़े-बड़े लोगों में बड़े होटलों और देशों में चक्कर लगाते रहता है। यह किस्सा उसी ने सुनाया था, जो एक बड़े नामचीन होटल का है। हालांकि इस हादसे को बरसों-बरस हो चुके हैं, लेकिन यह माजरा सदाबहार है और चूंकि इससे जुड़े पात्र अभी तक जिन्दा हैं और यूपी की राजनीति में कई-कई पार्टियों से गुजरते होते हुए भी अभी तक सक्रिय हैं, इसलिए मैं समझता हूं कि इस प्रकरण को लिखने का सटीक मौका छोड़ना अब महिला अधिकार और सम्मान की दिशा में आपराधिक और बेशर्मी होगी।

तो किस्सा यह है कि यूपी के एक बड़े नेता अपनी औरत-खोरी के खासे शौकीन माने जाते हैं। चाहे वे कभी असरदार मंत्री की कुर्सी पर रहे या नहीं, अपने शौक को उन्होंने संजोये रखा। बड़बोलापन तो उनका खास शगल है। पत्रकार-बाजी की ही तरह। हमेशा की ही तरह एक दिन उन्होंने अपने दो चिंटू-पिंटू से अपनी ख्वाहिश बतायी। लेकिन यह भी बताया कि वे इस बार किसी हिरोइन-टाइप शक्ल-सूरत और अंदाज चाहते थे। पैसा चाहे कितना भी खर्च हो जाए।

अपने आका के हुक्म की तामीली के लिए यह दोनों चिंटू-पिंटू हवाई जहाज से मुम्बई रवाना हो गये। आपको बता दें कि यह दोनों ही लोग कई दलों में बड़े-बड़े ओहदों में रह चुके हैं और मौका-परस्ती उनके खून में डीएनए की तर्ज पर दर्ज है। हां, पूजा-नमाज का पाखण्ड तो खूब करते-दिखाते हैं। मुम्बई में इन लोगों ने एक बी-ग्रेड की एक कलाकार को पसंद किया। तय हुआ कि एक रात के लिए एक लाख रूपये और आने-जाने का हवाई जहाज व टैक्सी का टिकट। इस एक्ट्रेस को बताया गया कि नेता जी को किसी भी कीमत पर खुश करना होगा। अगर तुम नेता जी को खुश कर गयीं तो भारी बख्शीश भी मिलेगी।

बात फाइनल हो गयी और आधी रकम पेशगी में दे दी गयी। हवाई अड्डे पर टैक्सी लेकर यह दोनों नेता मौजूद थे। तयशुदा होटल में यह युवती पहुंचायी गयी और होटल के कमरे में उसे टिकाया गया। बाहर दोनों नेताओं की ड्यूटी पहरे पर लगाया गया।

नेता जी चूकि उस समय बड़े पद पर थे, इसलिए काले शीशे वाली गाड़ी में चुपचाप होटल पहुंचे और कमरे पर पहुंच गये। चूंकि नेता जी को जरूरी विभागीय बैठक में जाना था, इसलिए वे एक डेढ़ घंटे में फारिग हो गये और होटल से कूच गये। उम्र का तकाजा भी तो था ना, इसीलिए। लेकिन इसके बाद मोर्चा सम्भाला इन दोनों नेताओं ने उस औरत के साथ लगभग जबरिया दुष्कर्म किया। रात भर। जैसे किसी लाश को सियार झिंझोड़ते हैं। खूब नोची-खरोची गयी वह महिला। इन नेताओं ने उस औरत के साथ खाया कम, बिथराया ज्‍यादा की तर्ज पर व्यवहार किया।

सुबह इस महिला को इन नेताओं ने फ्लाइट का टिकट थमाते हुए 25 हजार रूपया दिया और बोले कि तुम्हारी परफारमेंस से नेता जी खुश नहीं थे, इसीलिए बकाया रकम काट लिया है। अब ऐतराज करने का मौका था औरत का। बोली:- नहीं रकम तो पूरी ही चाहिए। साथ ही चूंकि बात तुम्हारे नेता की थी, मगर तुम दोनों ने शिरकत थी। इसीलिए अब तीन लोगों के हिसाब से मेहनताना लूंगी। पूरा का पूरा तीन लाख रूपया।

अररररररररर्रे इस्‍्स्साली साली रंडी मादर— : नेता जी भड़के और नमाजी दाढ़ी वाले नेता ने एक करारा झांपड़ उस औरत के चेहरे पर रसीद दिया।

बोले :- निकल बहनचो— होटल से बाहर। वरना सारी सड़क पर नंगी करवा —— दूंगा।

अप्रत्याशित हमले के चलते यह महिला चक्करघिन्नी होकर दीवार से जा लड़ी और फर्श पर पसर गयी। चेहरे पर चोटें भी आ गयीं। होंठ फट गया तो हल्का खून रिसने लगा। लेकिन इन नेताओं ने उस पर रहम नहीं किया। अब दोनों उस महिला पर जुट गये और दो-चार लात-घूसों से पीट गया।

बेचारी इतनी मार खाने के बाद खामोश ही रह गयी। उसने अपने सारे कपड़े सम्भाला और बेड की चादर के साथ ही तौलिया वगैरह पैक कर बाहर निकल गयी। नेता-द्वय उसके आगे-आगे जा रहे थे। रिसेप्शन में पहुंच कर वे डे-ड्यूटी डेस्क पर पहुंची और थोड़ी ऊंची आवाज में रिसेप्शनिस्ट से बोली:- जरा पुलिस कंट्रोल-रूम को फोन कर दीजिए प्लीज। इस होटल में मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया गया है। बलात्कार करने वाले तीन में से दो लोग यही खड़े लोग हैं। और उनका सारा वीर्य जिस चादर-तौलिया में दर्ज है, वह मेरे पास बैग में है।

उपसंहार: इस हादसे से बेहद सकपकाये एक नेता ने अपनी पैंट में ही पेशाब कर लिया और माजरा भांप कर दाढ़ी नेता ने उस महिला के पैर पकड़ कर फौरन बोला: बहनजी माफ कर दो। बातचीत शुरू हो गयी। होटल की प्रतिष्ठा का भी सवाल था। सो, तय-तोड़ हुआ और एक घंटे के भीतर पूरा का पूरा दस लाख रूपया इस महिला के हवाले कर दिया गया।

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के बेबाक और वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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