वाशिंगटन में प्रणव ने अमेरिका से किया वादा, खत्म होगी हर तरह की सब्सिडी!

गरीबों की शामत! वाशिंगटन में प्रणव ने अमेरिका से किया वादा, अब खत्म होगी हर तरह की सब्सिडी! प्रणव के इन ऐतिहासिक बयानों के बाद ज्यादातर ब्रोकरों का मानना है कि अगले हफ्ते बाजार से कमाने का अच्छा मौका बना है। प्रणब मुखर्जी वॉशिंगटन स्थित शोध संस्थान पीटर जी पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकानॉमिक्‍स में आयोजित एक कार्यक्रम में सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए सभी एलपीजी ग्राहकों को बाजार दर पर गैस उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि लक्षित लाभार्थियों को उनके बैंक खाते में सबसिडी मुहैया कराई जा रही है। इसका क्रियान्वयन फिलहाल पायलट योजना के तौर पर किया जा रहा है। कुछ समय बाद इसे सभी जगह लागू किया जाएगा।

इसी तरह से सरकार उर्वरक और केरोसिन के क्षेत्र में सबसिडी के दुरुपयोग को रोकने की कोशिश कर रही है। कर कानून में पिछली तिथि से बदलाव से जुड़ी आशंकाओं को दूर करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि भारत कानूनी दायरे में अमेरिकी उद्योगपतियों की चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी उद्योग को कुछ संदेह है कि भारत की कर प्रणाली में स्थिरता है या नहीं। यह स्थिर है। मौजूदा संशोधन जिसके बारे में बहस हो रही है, उसकी प्रकृति स्पष्टीकरण जैसी है न कि इसके जरिये कानून में कोई व्यापक बदलाव किया जा रहा है।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, ''हम दोतरफा रणनीति पर काम करेंगे। पहले हम तकनीकों के जरिये लक्षित लाभार्थी तक सीधे सब्सिडी पहुंचाने और सब्सिडी दुरुपयोग को रोकने की कोशिश करेंगे। मैं पहले ही इस दिशा में कुछ कदम शुरू कर चुका हूं।'' गौरतलब है कि वित्तमं‍त्री प्रणब मुखर्जी ने संसद में बजट पेश करते सब्सिडी घटाने पर जोर दिया। प्रणब ने कहा कि एलपीजी, करोसिन पर सब्सिडी के नए तरीको पर विचार होगा। हमें ईंधन की सप्ताई पर ध्यान देना होगा। उन्होंने 50 जिलों में केरोसिन पर सीधी सब्सिडी भी देने का प्रस्ताव किया। प्रणब ने कहा कि खाद सब्सिडी को भी समझदारी से विचार करने की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि 2011-12 के बजट में सब्सिडी बिल 1.34 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान था, जो बढ़कर लगभग 2.8 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वित्त वर्ष 2012-13 में इसे 1.80 लाख करोड़ रुपये रखे जाने का बजटीय लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने नए बजट में घाटा घटाने और सब्सिडी कम करने पर जोर है, लेकिन रक्षा बजट में 17 फीसदी की वृद्धि हुई है। बजट घाटे को घटाकर 5.1 फीसदी की गई है।पिछले साल रक्षा बजट 1644 अरब रुपये था, जिसे इस साल बढ़ाकर 1904 अरब रुपये कर दिया गया है। पिछले साल की भारी महंगाई के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कठोर फैसलों की जरूरत है।वित्त मंत्री ने सरकारी कंपनियों की बिक्री से अगले साल 300 अरब रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। विनिवेश से पिछले साल सिर्फ 140 अरब रुपये इकट्ठा हुए। सरकारी बैंकों को वित्तीय हलचल से बचाने के लिए 160 अरब की नई पूंजी डाली जाएगी। देश में ढांचागत विकास को तेज करने के लिए सरकार 600 अरब रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर बांड जारी करेगी।

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि गठबंधन की राजनीति के दबाव के चलते भारत में कुछ आर्थिक सुधारों को लागू करने में देरी हो रही है। उनकी यह टिप्पणी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आई है, जिसमें कौशिक ने कहा था कि भारत में 2014 तक आर्थिक सुधारों की गति धीमी रह सकती है।अमेरिकी उद्योगपतियों की चिंता से जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि किसी खास मुद्दे पर हमारी सोच फिक्स नहीं है, लेकिन जो कुछ भी किया जायेगा अथवा किया जाना है वह पूरी तरह से कानूनी दायरे में होगा। पिछले दशक से भारत अपनी उच्च वृद्धि दर से दूर होता जा रहा है, लेकिन जिस तरह से वित्त मंत्री खर्चे कर रहे हैं, उससे आपको इस बात का तनिक भी एहसास नहीं होगा।

वैश्विक पूंजी और कारपोरेट इंडिया की सर्वोच्च प्राथमिकता पर जो आर्थिक सुधार का कार्यक्रम है, उसका चरम लक्ष्य गरीबों की पेट पर दे दनादनादन लातें मारना है ताकि खुला बाजार में सरकारी नियंत्रण नाममात्र का भी न रहे।मध्यवर्ग के उपभोक्ता नकद सब्सिटी पर निगाहें टिकाये हुए हैं और आधार कार्ड के भरोसे हैं। पर प्रणव दादा ने अमेरिका में साफ कह ही दिया कि सब्सिडी नाम की बला ही खत्म होने जा रही है। सब्सिडी का बोझ घटाने के खातिर ही गरीबी और गरीबी रेखा की परिभाषाएं लगातार बदली जा रही हैं। अगर खाद्य सुरक्षा बिल की बात करें तो इसमें किए गए प्रावधान के मुताबिक अमीर और गरीब, दोनों तरह के लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का प्रबंध करने की बात कह रही है, लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि अमीर लोगों को खाद्य सुरक्षा देने का मतलब क्या है? किस आधार पर अमीर लोगों के लिए सब्सिडी पर खाद्य सुरक्षा का प्रबंध किया जा रहा है।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत सहित विश्व की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाओं द्वारा नये कोष के लिए 430 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता के साथ, यूरोप के गहराते ऋण संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अपने संसाधनों को लगभग दोगुना कर दिया है।वाशिंगटन में आईएमएफ एवं विश्व बैंक की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने आए विश्व की शीर्ष 20 अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों की शुक्रवार को हुई बैठक में यह घोषणा हुई।आईएमएफ में सबसे बड़े भागीदार अमेरिका ने इसे और कोष उपलब्ध कराने में असमर्थता व्यक्त की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि देश वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए अन्य तरीके से योगदान कर रहा है।

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लगार्ड ने कहा, "यह कदम वैश्विक वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने एवं सुदृढ़ वैश्विक आर्थिक सुधारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मजबूत संकल्पशक्ति को व्यक्त करता है।" लगार्ड ने कहा कि रूस, भारत, चीन एवं ब्राजील ने आईएमएफ को आश्वासन दिया है, यद्यपि ये देश आधिकारिक तौर पर बाद में पूरे विवरण को जारी करेंगे। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबद्धताओं के साथ कुल राशि 430 अरब डॉलर होगी।लगार्ड ने विश्व की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर सुरक्षा दीवार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्व के नेताओं से अर्थव्यवस्था पर छाए खतरे के काले बादल से निपटने के लिए सामूहिक तौर पर नीतियां बनाने का निवेदन किया।

एक ओर आम आदमी की ऐसी की तैसी करने में सरकार, बाजार, मीडिया, अर्थशास्त्री , रिजर्व बैंक और अफसराने राजनेताओं के साथ ​लामबंद है।दूसरी ओर क्षत्रपों के आगे सियासी समीकरण के तहत सरकार के नीति निर्धारकों की हालत मासूम मेमने की हो जाती है। प्रणव मुखर्जी घटक दलों के दबाव के आगे आर्थिक मजबूरियों को नजरअंदाज करके सत्ता बनाये रखने के लिए एक के बाद एक समझौता करने के लिए​ सिद्धहस्त है। अब जबकि वाशिंगटन में अमेरिका और वैश्विक पूंजी को कौशिक बसु के खतरनाक बयान के बाद आर्थिक सुदारों के बारे में​ आश्वस्त करने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं , प्रणव दादा तो स्वदेश वापसी पर उनके लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है बंगाल की दीदी ने। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र से ब्याज स्थगन की मांग करते हुए शनिवार को 15 दिनों की मोहलत दी और कहा कि केंद्र का 'टालू रवैया' एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। उन्होंने केंद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) में राज्य के हिस्से से 15 अरब रुपये काटने के लिए भी केंद्र की आलोचना की।

ममता चाहती हैं कि केंद्र सरकार उनके राज्य पर कर्ज का सूद माफ करे। ममता ने मांग की है कि केंद्र को कम से कम तीन साल का सूद माफ करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम एक साल से प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन किसी भी बात की एक हद होती है। केंद्र ने सीएसटी में हमारे हिस्से से भी 15 अरब रुपये काट लिए हैं। ममता बनर्जी ने आज घोषणा की कि उनकी सरकार अपना अखबार और चैनल शुरू करेगी ताकि इसके कार्यों को उचित तरीके से लोगों के सामने पेश किया जा सके। ममता ने शनिवार को कहा कि अखबार का नाम 'दैनिक पश्चिबंग' होगा और यह किसी जमाने में राज्य का प्रमुख बंगाली अखबार रहे बसुमती के प्रेस का इस्तेमाल करेगा। रूपकला केंद्र में स्थित टीवी चैनल का नाम 'पश्चिमबंग' होगा। जाहिर है कि सिर्फ माकपा ही ममता की गलंदाजी की जद में नहीं है, वे कांग्रेस और केंद्र सरकार के लिए भी गोला बारुद जमा करने में लगी है।ममता बनर्जी ने लोगों से कहा है कि वे न्यूज चैनल देखने की बजाय फिल्म और गीत-संगीत के चैनल देखें। ममता का कहना है कि दो चैनल उनके खिलाफ गलत प्रचार कर रहे हैं, इसलिए उन दो चैनलों को लोग न देखें। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना इजाजत के मीडिया के अस्पतालों में घुसने पर भी पाबंदी लगा दी है। कार्टून कांड में हुई किरकिरी के बाद से ममता मीडिया पर भड़की हुई हैं।

ममता की मांग पर पहले से कांग्रेस का सुर नरम है। जिसे देखते हुए दूसरे् क्षत्रपों को भी राष्ट्रपति चुनाव से पहले, वित्तीय विधेयकों को पारित कराने के एवज में तनिक गरम मिजाज दिखाकर कुछ भी हासिल कर लेने का मौका ङाथ से न जाने देने का फैसला करने से क्या वित्त मंत्री रोक सकेंगे?ममता बनर्जी की यह मांग ऐसे समय में आयी है जब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता संसद में वित्त विधेयक को पारित कराने की है।कांग्रेस ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ब्याज भुगतान के बोझ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को दिये गये 15 दिनों के अल्टीमेटम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। केंद्र ने कहा कि प्रत्येक मुख्यमंत्री या राज्य की कुछ जायज अपेक्षायें और आकांक्षायें रहती हैं और वे अपने राज्य के लिए बेहतर संभावना चाहते हैं।कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अगर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के कुछ मुद्दे हैं और केन्द्र सरकार से उनकी कुछ अपेक्षायें और मांगे हैं तो मुझे भरोसा है कि सरकार उनके साथ बातचीत करेगी और इस बात पर गौर करेगी कि संवैधानिक दायरे में राज्य के विकास की अनिवार्यताओं से कैसे निपटा जा सकता है।

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए वार्षिक मौद्रिक एवं ऋण नीति की घोषणा करने के एक दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी सुब्बाराव ने ब्याज दरों में कटौती से संबंधित केंद्रीय बैंक की कार्रवाई को समर्थन के लिए सरकारी उपायों की जरूरत पर जोर दिया।मंगलवार को आरबीआई ने रीपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती करके इसे 8 फीसदी के स्तर पर ला दिया था, ताकि देश की आर्थिक वृद्घि में आ रही सुस्ती को थामा जा सके। विश्लेषकों और अनुसंधानकर्ताओं के साथ एक बातचीत में सुब्बाराव ने  कहा, 'यदि बजट में दिए गए संकेतों के मुताबिक सब्सिडी नहीं घटाई जाती है तो मांग का दबाव बना रहेगा और मौद्रिक नीतियों में ढील देने की गुंजाइश कम हो जाएगी।' देश में तेल कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के समय के मसले पर सुब्बाराव ने कहा, 'मैं मानता हूं कि कीमतों के नियंत्रण मुक्त करने से अल्पावधि में ईंधन के दामों में उछाल आएगी, लेकिन मैं भरोसा दिलाता हूं कि केंद्रीय बैंक इस बात पर पैनी निगाह रखेगा कि ऐसा करने से कहीं सामान्य मुद्रास्फीति तो नहीं बढ़ रही है।' उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना खत्म नहीं हुई है, लेकिन इसकी आशंका बहुत कम है। ब्याज दरों में कटौती की संभावना भी शून्य नहीं हुई है।

हज यात्रा पर जाने वाले मुस्लिमों को सब्सिडी अब जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगी। यह जानकारी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी है। अब तक पांच साल में एक बार सब्सिडी देने का प्रावधान है।केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में हलफनामा पेश कर नई व्यवस्था की जानकारी दी। इसमें कहा है कि कभी हज पर नहीं गए आवेदकों को सब्सिडी में प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने कहा कि यह बड़ा बदलाव है जो पहली बार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 फरवरी को हज सब्सिडी के संबंध में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि सरकार हज सब्सिडी पर विचार कर रही है क्योंकि कई मुस्लिम संगठनों ने इसे हटाने की मांग की है।

वित्त वर्ष 2013 में सरकार पर सब्सिडी बोझ की जबर्दस्त मार पड़ने वाली है। लेकिन सरकार ने अगले 3 साल में सब्सिडी को जीडीपी के 1.7 फीसदी के बराबर लाने का लक्ष्य तय किया है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में सब्सिडी बोझ को जीडीपी के 2 फीसदी से कम रखने का लक्ष्य तय किया है।वित्त वर्ष 2013 में सरकार पर कुल 77,784 करोड़ रुपये का सब्सिडी बोझ पड़ने वाला है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में फर्टिलाइजर सब्सिडी के तौर पर सरकार पर 60,974 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। फूड सब्सिडी के तौर पर सरकार पर 75,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। इसके अलावा सरकार ने बाजार से 5.69 लाख करोड़ रुपये की उधारी लेने का फैसला किया है।हालांकि वित्त वर्ष 2013 में अन्य दूरसंचार सेवाओं से सरकार को 58,217 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। वहीं वित्त वर्ष 2013 में स्पेक्ट्रम नीलामी से सरकार को 40,000 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होगा। लिहाजा सरकार को हासिल होने वाले इस राजस्व से सब्सिडी का बोझ कुछ हद तक कम होगा।

मुंबई से एएस विश्वास की रिपोर्ट

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