विजय बहुगुणा ने उत्तराखंड में जमीनें बिकवाने और यहां के पहाड़ों को नष्ट करवाने के अलावा कुछ नहीं किया

Shambhunath Shukla : मैं नीचे दो फोटो दे रहा हूं। पहली फोटो छह दिन पहले की है जब मैं ऋषिकेश गया था और वहां गंगा किनारे बने परमार्थ निकेतन आश्रम में ठहरा था। वहां की कर्ताधर्ता मां भगवती के विशेष आग्रह पर मैने शाम को होने वाली गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था। यहां जिस घाट पर गंगा आरती होती है उसके ठीक सामने गंगा जी की धारा के बीच यह शिवमूर्ति स्थापित है। यह फोटो मैने खुद खींची थी। यहां तीन साल पहले जो मूर्ति स्थापित थी वह सन् २०१० की बाढ़ में डूब गई थी तब इसे और ऊँचा किया गया था ताकि भविष्य में गंगा जी में चाहे जितना पानी आए यह मूर्ति नहीं डूबे।

दूसरी फोटो आज मेरे एक मित्र ने मेल की है। आज शाम चार बजे गंगाजी में पानी ने ऐसा उछाल मारा कि शिवमूर्ति डूब गई। उत्तराखंड में हर दूसरे तीसरे साल होने वाली इस तबाही के पीछे उत्तराखंड की सरकारों द्वारा किए जा रहे प्रकृति के अंधाधुंध दोहन और विनाश ही असल वजह है क्योंकि पर्यटकों को आराम देने के लिए उत्तराखंड की सरकारें यहां विनाशलीला कर रही हैं। पहले थोड़ा उत्तराखंड का इतिहास जान लें।

सन् २००० की नवंबर में उत्तर प्रदेश के पर्वतीय इलाके को अलग कर एक नया प्रदेश बनाया गया उत्तरांचल। उस समय केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री थे। वे खुद मध्य प्रदेश के थे इसलिए उन्हें यूपी से कोई भावनात्मक लगाव नहीं था। वे यह भी नहीं समझ पाए कि जिस राज्य को वे अलग कर रहे हैं उसके पास आय के कोई स्रोत नहीं हैं। उधर उनकी पार्टी के नेताओं को लग रहा था कि यूपी तो उनके पास से सदा के लिए गया इसलिए इसके पर्वतीय इलाके को अलग करा कर वे अपनी लाज बचाए रख सकते हैं। क्योंकि इस पर्वतीय इलाके में सबसे ज्यादा आबादी बांभनों व ठाकुरों की ही थी।

उधर इस पर्वतीय इलाके के लोगों में भी अलग होने की हूक मची थी। उन्हें लगता था कि यूपी वाले उनका हक मार रहे हैं। उनके विकास के रास्ते में आड़े आ रहे हैं। हालांकि आजादी के पहले और बाद में यूपी में कांग्रेस की जो सरकारें बनीं उनमें से सात बार मुख्यमंत्री इसी पर्वतीय इलाके का ही नेता बना।

अलग होने के बाद उत्तरांचल में भाजपा ने जो पहला मुख्यमंत्री यहां बनाया वह पंजाबी था। और इसके बाद आए कोश्यारी जो पहाड़ के ब्राह्मणों के रणकौशल के आगे अपने को बचा नहीं सके। २००२ में सरकार चली गई और कांग्रेस सत्तारूढ़ हुई। जिन बुजुर्ग कांग्रसी नेता को यहां का मुख्यमंत्री बनाया गया उनके लिए यह शर्म की बात थी कि कहां तो बेचारे पूरे देश का प्रधानमंत्री बनने का सपना पाले थे क्योंकि इसके पूर्व वे उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रांत के चार दफे मुख्यमंत्री रह चुके थे, वे बना दिए गए इस पांच लोकसभा सीटों वाले राज्य के मुख्यमंत्री। उन्होंने पहला काम तो यह किया कि उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया। और उत्तराखंड का पूरा मैदानी इलाका बाहर के लोगों से बसा दिया।

फिर भाजपा आई जिसने मुख्यमंत्रियों को बदलने का खेल खेला और ऐन चुनाव के कुछ दिन पहले एक ऐसे व्यक्ति भुवन चंद्र खंडूरी को मुख्यमंत्री बना दिया जिसे चुनाव हरवाने में महारत थी। नतीजा कांग्रेस की सरकार बनी और दस, जनपथ के इशारे पर वहां एक ऐसा मुख्यमंत्री थोपा गया जिसका अपनी ही पार्टी में भारी विरोध था बस यही बात विजय बहुगुणा के लिए प्लस हो गई।

कांग्रेसी आलाकमान एक ऐसा मुख्यमंत्री चाहता था जिसकी जड़ें न हों और पहाड़ के ब्राह्मणों की भी पूरी कोशिश थी कि किसी भी तरह एक ठाकुर हरीश रावत मुख्यमंत्री न बनने पाए। विजय बहुगुणा का उत्तराखंड से सिर्फ इतना ही नाता है कि उनके पूर्वज यहां के थे वर्ना वे यहां कभी नहीं रहे। उनके पिता यूपी के मुख्यमंत्री थे और खुद उन्होंने जीवन भर सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। एक बार जज भी बनाए गए पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में रहे फिर मुंबई में पर सुना जाता है कि उन पर आरोप लगे और उन्हें जजी से इस्तीफा देना पड़ा। इन महाशय ने उत्तराखंड में जमीनें बिकवाने और यहां के पहाड़ों को नष्ट करवाने के अलावा कुछ नहीं किया। यहां तक कि वहां की वन संपदा व वन्य जीव जंतु भी खतरे में हैं।

हरिद्वार से ऋषिकेश जाने के लिए राजाजी अभयारण्य के भीतर का रास्ता भी खोल दिया गया है जहां यूपीकाल में आप गाड़ी लेकर घुस नहीं सकते थे। जब प्रकृति का विनाश होगा तो बाढ़ और तबाही को कौन रोक पाएगा?

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

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उपरोक्त पोस्ट पर फेसबुक पर आईं कुछ टिप्पणियां इस प्रकार हैं..

Zishan Haider bhayawah. rongte khade ho gaye dekh kar. main gaya hun aur mujhe vishvas nahi ho paa raha hai ki itni vishal murti paani ke neeche hai
 
Sharma Sonu sir iski photo aaj mainey b dekhi h. track par noida se upload ki gai thi jo ki live thi. rishikesh ke photo journalist ne better snap li thi
 
Sanjay Singh Sir ji mai apki baat se sahmat hu,uttarakhand me abi tak jo b CM hua,sab k sab lutne wale..pichhle sal mai nainital gya tha,chuki pahadi gaon muje bahut achche lagte h isliye mai udhar hi ghumne nikla,ak chay ki dukan pe waha k logo se khub bate hue,sabi log ak hi bat kahe,hm jaha the wahi h,kuch nhi badla h.maine kaha ap logo ki rajdhani to garwal(gainsen) me sift hogi.apke vichar se kaisa h,ak sajjan gusse me bole ye sabi pagal ho gye h,janta ki pareshani se inhe kuch lena dena nhi h,hme dehradun jane me hi dikkat hoti h,nyi rajdhani to hmme se kitne kabi nhi dekh payege,hmare liye lucknow sabse achcha tha.
 
Manoj Kumar I agree.But the people of Uttarakhand and UP have to fight this exploitative trend.
 
Siddharth Dubey Manu sahi baat hai mama ji
 
Om Shanker Porwal Sir, tej bahav main shiv ji ki murti bah gayi hai shayad…tv pe dikha rahe the.
 
Navin Chandra Aayaa pahaad oont(camel) ke neeche…
 
Dheerendra Chauhan what a think sir ji
 
Mahender Awana Shukla ji- गंगा हमारी कहे बात ये रोते-रोते, राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते………. गंगा के सुरम्य तट कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहे हैं।
 
Vaibhav Vats ye to shuruvat hai srishti ke vinaash ki Sir…….. jab is vinash ne use hi nahi bakhsha jisne iski utpatti ki hai to hum insaan(but aj ke samay me janvar rupi, coz bhagvan ne to insaan banaya tha but insaan janver khud hi bana)hi kya hai is vinaash ke samne…
 
Uma Singh ok
 
Manoj Sharma param satya hai sir
 
Manav Mitra ye to shuruvat hai agar manav ne prakrati se chhedchhad band nahi ki to vo din door nahi jab sampoornd jagat ke vinash ka karan hum nanav hi hongi..ab bhi samay hai .jag jao.mitra

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