Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) यानि तीसरी आंख, जिसकी नजर है आपके फाइनेंस ट्रांजेक्‍शन पर

''बड़ा भाई देख रहा है'', ''प्रिज़्म कार्यक्रम'', ''स्नौडेन का खुलासा''। ये सभी वाक्यांश विभिन्न सरकारों द्वारा अपने ही नागरिकों की हो रही खुफ़िया निगरानी के बारे में खुलासे करते हैं और हम हमेशा इस निगरानी को बहुत नकारात्मक नज़रिए से देखा करते हैं। हम इसे हमेशा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के रूप में देखते हैं जबकि किसी भी निगरानी तंत्र का अभाव, निगरानी होने से ज़्यादा बुरी हालात को जन्म देता है। प्राचीन भारत के पहले शासक प्रबंध की शिक्षा देने वाले ग्रंथ कौटिल्य के अर्थ-शास्त्र में भी राज्य द्वारा गुप्तचरों के प्रयोग करने के विशद विवरण और निर्देश दोनों मौजूद हैं फ़िर सभी प्रकार की गुप्तचरी को राजनीतिक उत्पीड़न या विचारों के दमन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कहीं ना कहीं इससे जनकल्याण की भावना भी जुड़ी है। 
''बड़ा भाई देख रहा है'', ''प्रिज़्म कार्यक्रम'', ''स्नौडेन का खुलासा''। ये सभी वाक्यांश विभिन्न सरकारों द्वारा अपने ही नागरिकों की हो रही खुफ़िया निगरानी के बारे में खुलासे करते हैं और हम हमेशा इस निगरानी को बहुत नकारात्मक नज़रिए से देखा करते हैं। हम इसे हमेशा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के रूप में देखते हैं जबकि किसी भी निगरानी तंत्र का अभाव, निगरानी होने से ज़्यादा बुरी हालात को जन्म देता है। प्राचीन भारत के पहले शासक प्रबंध की शिक्षा देने वाले ग्रंथ कौटिल्य के अर्थ-शास्त्र में भी राज्य द्वारा गुप्तचरों के प्रयोग करने के विशद विवरण और निर्देश दोनों मौजूद हैं फ़िर सभी प्रकार की गुप्तचरी को राजनीतिक उत्पीड़न या विचारों के दमन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कहीं ना कहीं इससे जनकल्याण की भावना भी जुड़ी है। 
यह रिपोर्ट एक ऐसी ही बहुत छोटी संस्था जो भारत सरकार के आधीन कार्यरत है, के क्रियाकलापों और गतिविधि के बारे में बताती है। इस नामालूम सी संस्था का नाम है वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू). वर्ष 2004 में गठित यह यूनिट भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत है और अनेक स्त्रोतों से सूचना प्राप्त करती है,, किन्तु इसकी तुलना अन्य संगठनों जैसे आईबी या फ़िर डीआरआई से नहीं की जा सकती,  क्योंकि ना तो यह ज़मीनी स्तर पर जुड़ी हुई है और ना ख़ुद कोई सीधी कार्रवाई करती है। इसका गठन हाल में किया गया है।
 
इसका बजट और स्‍टॉफ किसी जिले की पुलिस जितनी भी नहीं है। लेकिन इसका अद्रश्य रूप और लघु आकार होना इसके कार्य की गंभीरता, लगन और कुशलता को न तो प्रभावित करता हैं और न ही इस पर किसी प्रकार का अविश्वास किया जाता है। विभिन्न सरकारी विभाग इसकी सूचनाओं को बेहद महत्व देते हैं और उन पर बराबर कार्यवाही की जाती है। इसकी सूचनाओं के आधार पर आयकर विभाग सर्च कर सकता है। वहीं एनआईए, सीबीआई, ईडी आदि संस्थाए इसे अपनी जरुरत के अनुरुप इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं।
 
गठन :इस संस्था का मुख्‍यालय नई दिल्ली में है और अपनी सभी गतिविधियां वहीं से चलाती है। यही पर देश के भीतर और बाहर से आई सूचनाओं को एकत्र करने, उसका प्रारंभिक विश्लेषण करने और उसे संबधित एजेंसी या विभाग को भेजने का कार्य किया जाता है। और यह सभी कार्य बामुश्किल तीस या चालीस लोगों का समूह करता है। यह बल नितांत पेशेवर है और इसमें मुख्य भूमिका निभाते है भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी गण।
 
एसटीआर-एफआईयू सूचना का सार : इस संगठन द्वारा जिस प्रारूप में सूचनाएं तैयार की जाती है उसे एसटीआर कहा जाता है जिसका अर्थ है संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट। इस रिपोर्ट का आधार होता है आर्थिक संस्थाएं एवं संगठन जैसे बैंक, म्‍युचुअल फंड, शेयर बाजार, क्रेडिट कार्ड और बीमा कंपनी में किए गए निवेश। इस संस्‍था को भारत से बाहर सूचनाएं मुख्य रुप से उन विदेशी एजेंसियों से मिलती हैं जिनके साथ भारत सरकार की किसी प्रकार की संधि हैं।
 
एसटीआर के विवरण: एक एसटीआर में जो विवरण होते हैं वे इस तरह हैं:
 
–  व्यक्ति का सामान्य परिचय, उसका पता, आयु, पेशा
– भूतकाल में किए गए लेन देन का संक्षेप।
– उन अमुक लेन देन का विवरण जो संदेहजनक है एवं उसका कारण।
– व्यक्ति के अन्य विवरण जैसे बैंक खाते, सम्पदा, उसका इतिहास इत्यादि।
 
एक एसटीआर अनेक कारणों से बन सकती है, कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:
 
– एक विदेशी छात्र दिल्ली में पढ़ता है। हर महीने उसके परिजन उसे खर्च के लिए 250 डॉलर भेजते हैं। अचानक एक दिन उसके खाते में एक लाख डॉलर आ जाते हैं जिसे वो तुरंत निकाल लेता है। यह पूर्णत संदेहजनक लेनदेन है कि किस कारण से उतना धन आया है, क्या वह भूमि खरीद रहा है या इस धन का कोई अन्य प्रयोग होगा? इसकी तुरंत जांच की आवश्यकता है।
 
– 40 वर्ष पार की एक महिला है जिसके बचत खातें में कभी दस–बारह हजार रुपए से ज्यादा राशि नहीं होती और साल में पांच या सात से ज्यादा लेनदेन भी नहीं होते। फ़िर एक दिन अचानक उसके खाते में लाखों करोड़ों का लेन देन हो जाता है। ऐसे में इस धन का स्त्रोत और प्रयोग दोनों ही जांच का विषय बन जाते हैं। एक एसटीआर का प्रयोग परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में संभव है हालांकि ज्यादातर इसके आधार पर सिर्फ जांच शुरू ही की जाती है।
 
यदि एक बार यह रिपोर्ट लिख दी जाए तो अगले सात सालों तक  इसका प्रयोग आयकर विभाग आपके खिलाफ कर सकता है वहीं दूसरी एजेंसी जो अपराध की जांच करती है इसका प्रयोग किसी भी समय यानी 100 साल तक कभी भी कर सकती है। ऐसी दशा में यदि आप कोई बड़ा लेनदेन कर रहे हैं और सोचते है कि मिलने वाला पैसा आप अपनी मां या दादी के बैंक खाते में रखकर चैन की बंसी बजाएंगे, कर चुकाने से बच जाएंगे या कोई गैर क़ानूनी काम करते रहेंगे और सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा एवं आपको कोई पकड़ नहीं पाएगा तो याद रखिये “वे सब जानते है” यह सिर्फ समय की बात है जब आपके दरवाजे पर दिन या आधी रात को कोई दस्तक देगा और आपसे हिसाब किताब मांगा जाएगा।
 
लेखिका अर्चना यादव स्वतंत्र पत्रकार हैं.

साभार- मोलतोल

 

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...