विदेशी मीडिया के निशाने पर अब राहुल गांधी

 

पहले 'टाइम मैगज़ीन', फिर 'वाशिंगटन पोस्ट' और अब 'द इकोनॉमिस्ट'. ऐसा लग रहा है कि इन दिनों विदेशी मीडिया ने भारत की सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को अपने निशाने पर ले रखा है.  एक बार फिर एक विदेशी मीडिया ने कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को अपने निशाने लिया है और उनकी योग्‍यता पर सवाल खड़े किये हैं.
 
ब्रिेटेन की मशहूर पत्रिका 'द इकनॉमिस्‍ट' ने राहुल गांधी की राजनीतिक योग्‍यता को लेकर सवाल खड़े किये हैं. पत्रिका ने लिखा है कि राहुल गांधी में प्रधानमंत्री बनने की भूख है. आलेख का शीर्षक है "द राहुल प्रॉब्‍लम" (The Rahul problem). पत्रिका ने लिखा है कि राहुल गांधी उसी परिवार के वशंज हैं जिसका भारत पर शासन करने वाली पार्टी पर जबरदस्‍त प्रभाव रहा है. इस बात की पूरी संभावना है कि राहुल गांधी 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनाए जाएं.
 
पत्रिका ने आगे लिखा है कि अगले सप्‍ताह राहुल को पार्टी या सरकार में कोई अहम जिम्मेदारी मिल सकती है. संभवत: उन्‍हें मंत्री बनाया जा सकता है. द इकोनॉमिस्ट ने साफ लिखा है, "यह कोई नहीं जानता कि राहुल गांधी के पास क्‍या क्षमता है? इस बात का भी संदेह गहरा रहा है कि खुद राहुल गांधी नहीं जानते कि वह क्‍या चाहते हैं? ऐसे में उनके प्रधानमंत्री पद की उम्‍मीदवारी की योग्‍यता को लेकर संदेह खड़ा हो रहा है."
 
हाल के ही दिनों में यह तीसरी बार है जब विदेशी मीडिया ने कांग्रेस पर हमला बोला हो। इससे पहले टाइम मैगजीन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 'अंडर अचीवर' (कम सफलता पाने वाला) कहा था. उसके फौरन बाद ही अमरीकी समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट ने मनमोहन सिंह को 'नाकाम नौकरशाह' करार दिया था.

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