हल्द्वानी : भाकपा, माकपा और भाकपा(माले) साझा कार्यनीति के साथ एकताबद्ध रूप से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। माकपा के राज्य सचिव का. विजय रावत, भाकपा के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य का. समर भण्डारी व भाकपा(माले) के उत्तराखण्ड प्रभारी का. राजा बहुगुणा ने एक संयुक्त बयान में यह बात कही। भाकपा(माले) राज्य कार्यालय में हुई बैठक के बाद तीनों नेताओं ने कहा कि,‘‘उत्तराखण्ड में भाजपा-कांग्रेस के खिलाफ कोई भी कारगर विकल्प बिना वामपंथी पार्टियों के नहीं बन सकता है। बिना वामपंथी दलों को केन्द्र में लिये बना कोई भी मोर्चा लम्बे समय तक नहीं टिक पायेगा।‘‘
उन्होंने कहा कि,‘‘ उत्तराखण्ड बनने के बाद पिछले 11 सालों में भाजपा-कांग्रेस ने लूट-खसोट को संस्थाबद्ध करने का काम किया है। भाजपा और कांग्रेस ने दलाली और कमीशनखोरी की जो राजनीतिक संस्कृति शीर्ष से लेकर पंचायतों तक पैदा की है उसकी शिकार उत्तराखण्ड की अधिकांश राजनीतिक ताकतें हो गयी हैं। इसलिये भाजपा-कांग्रेस की इस राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ जिस सशक्त विकल्प की जरूरत है वह वाम पार्टियां ही दे सकती हैं।
भ्रष्टाचार-लूट-कमीशन की भाजपाई-कांग्रेसी संस्कृति के खिलाफ अन्य ताकतों की विश्वसनीयता तभी जनता के बीच साबित होगी जब वे वाम पार्टियों को मोर्चे के केन्द्र में रखेंगी। वामपंथी नेताओं ने कहा कि आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारत की कम्युनिस्ट पार्टी -माले(सीपीआई-एमएल) एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार नही उतारेंगी।

इस चुनाव में तीनों पार्टियॉ न्यूनतम 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार खडे़ करेंगी। साथ ही भाजपा-कांग्रेस के खिलाफ बनने वाले वाम – लोकतांत्रिक ताकतों के व्यापक मोर्चे के लिये तीनों पार्टियां हरसंभव प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा-कांग्रेस से किसी भी सूरत में न तो चुनाव से पूर्व और न चुनाव के बाद कोई भी समझौता -ऐसे वाम जनवादी व्यापक मोर्चे की प्राथमिक शर्त होगा। इस तरह के वाम जनवादी मोर्चे के लिये तीनों पार्टियों ने तय किया है कि वे अंतिम समय तक यथासंभव प्रयास करेंगी।
प्रेस विज्ञप्ति





