विनोद कापड़ी, साक्षी जोशी और दैनिक जागरण द्वारा लादे गए तीन मुकदमों की तीन इकट्ठी तारीखों पर पेशी से लौटते वक्त…

Yashwant Singh : आज नोएडा के सूरजपुर स्थित कोर्ट गया था. विनोद कापड़ी, साक्षी जोशी और दैनिक जागरण द्वारा लादे गए तीन मुकदमों की तीन इकट्ठी तारीखों पर पेशी के लिए. लौटते वक्त एक पत्रकार साथी मिल गए. तुरंत उन्होंने खिलाया-पिलाया और हजार रुपये की रंगदारी दी. जितना वकील को दिया था, वह मुझे तुरंत वापस मिल गया. आगे बढ़ा तो फिर एक मित्र मिल गए. वे अपने बच्चे को लेने सड़क पर खड़े थे.

उन्होंने सूचना दी कि ये देखिए, सामने वाला जो अपार्टमेंट है, वही विनोद कापड़ी का घर है. मैं गेट तक गया, देखा, टहला, लौट आया. मित्र से दुआ सलाम के बाद फिर आगे बढ़ा. एक सज्जन ने कागज थमाया, और बोले- देखिए, सुबूत. कोर्ट में किस कदर करप्शन है. एक सरकारी वकील इसलिए एक मामले की सुनवाई नहीं होने दे रहा क्योंकि उसे आरोपी से एक लाख रुपये रिश्वत चाहिए. कागज लिया और फिर आगे बढ़ा. चौराहे पर रुका तो मोबाइल में एक मैसेज गिरा, पढ़ने लगा. मैसेज कुछ यूं था- ''संजय दत्त अगले एक महीने में जिन फिल्मों को पूरा कर लेंगे उनमें कास्टिंग के दौरान उन दो जजों का नाम भी जाना चाहिए जिन्होंने उन्हें ये फिल्में पूरी कर आराम से जेल में जाने की छूट दी है''… फिर आगे बढ़ा तो एक फकीर चुपचाप जाता दिखा… उसके हिस्से का गाता वाला काम मैंने कार में बैठे बैठे कर दिया.. कि…

रहिए अब ऐसी जगह चलकर जहां कोई न हो…
हम-सुख़न कोई न हो और हमज़बां कोई न हो…
पड़िए गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार…
और अगर मर जाइए तो नौहा-ख़्वां कोई न हो…
बे दर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिए…
कोई हमसाया न हो ओर पासबां कोई न हो…

(( इस लिंक पर क्लिक करके इसे आप सुन भी सकते हैं… http://www.bhadas4media.com/edhar-udhar/7558-2012-12-29-11-11-23.html ))

मतलब ये कि मिलना-खोना, रोना-हंसना, जीवन-मौत, सुख-दुख… ये सारे कांट्रास्ट यूं ही आते-जाते रहते हैं… हम ही हैं जो कभी अहंकार से मस्त हो जाते हैं और कभी डिप्रेसन से पस्त हाल पाते हैं.. सो, अपन का फंडा यही है कि किसी से उम्मीद ना रखो, और किसी से नाउम्मीद मत होओ.. जो होगा अच्छा होगा.. बस, अपने हिस्से का करते जाओ, जीते जाओ, जो भी दिल-दिमाग को सही लगे..

     Sumit Gupta badiya!
 
     Harshendra Verdhan Bahut hee badiya, aapne ek ummed Jata Di hai..aapke Sabdon se khoob honsla mila hai
 
       राजेन्द्र दास मजाक हो रहा है ………. ऐसे बहुत से लोग है जिनके घरों में काम है और उन्हें जेल भी जाना है …सब को छुट दे देनी चाहिए ..
अमीर और गरीब का एह्साह आज करा दिया गाया है …….!!
 
     A.r. Somvanshi Bahut achchha. Bindaas abhivyakti. Mast rahiye…aur mai bhi kisi ko    lootne-paatne chalta hoon.
 
    Umesh Pathak Yashwant bhai.bp ke andaz me Kabeer ki jhalak aati hai.fakirana andaz..
 
    Sushant Porwal jiyo bhai jiyo
 
    Nitin Mathur //किसी से उम्मीद ना रखो, और किसी से नाउम्मीद मत होओ.. जो होगा अच्छा होगा.. बस, अपने हिस्से का करते जाओ, जीते जाओ, जो भी दिल-दिमाग को सही लगे// लाख टके की बात कही आपने
 
    Neeraj Tiwari हम ही हैं जो कभी अहंकार से मस्त हो जाते हैं और कभी डिप्रेसन से पस्त हाल पाते हैं.. सो, अपन का फंडा यही है कि किसी से उम्मीद ना रखो, और किसी से नाउम्मीद मत होओ.. जो होगा अच्छा होगा.. बस, अपने हिस्से का करते जाओ, जीते जाओ, जो भी दिल-दिमाग को सही लगे………..bhut khoob
 
    Narayan Pargain khud ki manjil ka betaz badsha yaswat
 
    Arvind Kumar Very nice lines
 
    Nil Nishu बहुत खूब रही आपकी न्यायालय यात्रा…….
 
    Arvind Kumar Kya kya khaye ye nhi btaaye bhaiya ji yaatra to bhut khoob rhi aapki mauj masti bhri yaatra thi jalwa kayam hai aur kayam rhega..
   
    Ahmad Raza बहुत खूब
    
     विभांशु दिव्याल जे बात
    
    Aashish Jain Aashu bahut shi bhai..
     
    Manoj Pandey aap loktantra k 4the astambh k sache prahri.
     
    Aamir Khan bilkul sahi bhai
     
    Manoj Pandey aap loktantra k 4the astambh k sache prahri.
     
    Vinayak Vijeta yaswant ji ghabrainahi aap to delhi wale ho main bihar wala hoker bhi tin bar tihar jail gaya..wo bhi sirf patarkarita ke karan hi.na koi chor, na hatya, na balatkar..ha balatkar kiya to kurshi per baithe vaise logo ki kargujariyo ka jinhe jinhe mere dwra kiye gaya balatkar se jayda dard ka ehsas hua..aap bhi aise logo se balatkar karne ke liye tatper rahen unhe dard hoga per such ko sakun milega.
     
    Raj Dubey this is the key of life happiness Yashwant ji.
     
    Puneet Kumar Malaviya बाबा कहीँ ये सब लिखने से आप पर ही न्‌यायालय की अवमानना का केस न चल जाए?
     
    Neelam Misra jeevan darshan….
     
    Srikant Saurav "मतलब ये कि मिलना-खोना, रोना-हंसना, जीवन-मौत, सुख-दुख… ये सारे कांट्रास्ट यूं ही आते-जाते रहते हैं… हम ही हैं जो कभी अहंकार से मस्त हो जाते हैं और कभी डिप्रेसन से पस्त हाल पाते हैं.. सो, अपन का फंडा यही है कि किसी से उम्मीद ना रखो, और किसी से नाउम्मीद मत होओ.. जो होगा अच्छा होगा.. बस, अपने हिस्से का करते जाओ, जीते जाओ, जो भी दिल-दिमाग को सही लगे.."
     
    Anurag Jagdhari like…
     
    माधो दास उदासीन जय हो
     
    Priyanka Gupta किसी से उम्मीद ना रखो, और किसी से नाउम्मीद मत होओ.. जो होगा अच्छा होगा.. बस, अपने हिस्से का करते जाओ, जीते जाओ, जो भी दिल-दिमाग को सही लगे…बिलकुल सही लिखा है आपने…सहमत हूँ…| वैसे कई बार खुद भी दिल और दिमाग की जंग झेलनी पड़ती है…सो जो दिल को अच्छा लगे, वो करो…|
     
    Sharad Yadav satya vachan
     
    Rakesh Soni Kya baat hai like it     
     
    Trilok Singh भोग में रोग का, उच्च-कुल में पतन का, धन में राजा का, मान में अपमान का, बल में शत्रु का, रूप में बुढ़ापे का और शास्त्र में विवाद का डर है। भय रहित तो केवल वैराग्य ही है।
     
    Aamir Pasha उस जज का नाम देश के गद्दारों की फेहरिश्त में भी स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाना चाहिए.
     
    Madhu Sudan bhiya ji u hi nahi kahte ki mera dash mahan . yaha sabhi ko kuch bhi karne kahne ka saman chuth hai . garv se kaho ham bhartiya hai
     
    Lalit Maini kursi chhodne ke baad neta giri ki bhoomika he bhai
     
    Abhi Nov मैं गर रुठ जाऊँ तो क्या या खुश हुआ-
    मुस्करता चला जाऊँ भी तो क्या…
    मैं अँधेरा हो गुजर जाऊँ या
    रोशनी बन बिखर जाऊँ भी तो क्या..
    कई बार सोचा इनके बीच
    आधा आधा बँट जाऊँ…
    मगर फिर वहीं ख्याल
    मैं जो दो टुकड़ों मे बँट भी जाऊँ तो क्या…. समीर लाल… जी कि कृति आपको समर्पित मेरी तरफ से…
    
    Pradeep Dey कौन कहता है कि आस्मा मे सुराग नही हो सकता
    एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो |

    आपने कम से कम पत्थर तो मारा है….
 
    Shravan Kumar Shukla आप तो आप ही हैं. वैसे जज के नाम का खुलासा किया जाना चाहिए. ताकि अगली बार ऐसा हर मामला उसी जज के कोर्ट में डलवाया जाए.. वैसे कापड़ी के घर की खिड़की तोडनी चाहिए थी. एक पत्थर मारकर.! लड़कपन का फ्लैशबैक समझकर.! हम तो भई ऐसे ही हैं !
 
    Prakash Hindustani बस अपने हिस्से का करते जाओ…..
   
    Dimple Misra sir apka sangharsh kai longo ko prerna deta hai, jab mai jiwan se hatash ho rahi thi to apke bare me padha aur himmat mili. sach hai duniya unhi ko yaad rakhti hai jo himmat dikhate hai,
    
    Shailesh Singh 100 me 80 beimaan phir bhi mera…………………….
     
    Ajeet Kamboj sahi kaha sir…
     
    Rakesh Ranjan bilkul sahi kaha apne ki..किसी से नाउम्मीद मत होओ.. जो होगा अच्छा होगा..
     
    Sarvesh Pathak लगे रहिये यशवंत भाई.. मुद्दों की तासीर घोलना ज़रूरी है..
    हिम्मते मर्दा ते मददे खुदा..!
    
    Pankaj Chaturvedi bindaas bhadaas yashvant
     
    Sanjeev Chauhan बहुत सही….
     
    Sanjeev Kumar true.
     
    Amit Kumar Bajpai आप भी आईये हमको भी बुलाते रहिये..दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिये..
     
    Pankaj Omar लगे रहो भाई साब …. इसी तरह की गुस्ताखी कर चूका हूँ और हवालात की हवा खा चूका हूँ वो भी बिना कुछ किये पर इस बार पुरे पक्के इरादे से वापस मैदान में आया हूँ …….देखता हु जॊर कितना बाजुए कातिल में है
     
    Vishal Sharma bahut hi behtreen use of words. and how true.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


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