वीके सिंह की जगह मोदी होते तो अन्ना गोपाल राय को इंडिया से बाहर भेज देते

Om Thanvi : ये अण्णा को क्या हुआ? गोपाल राय को गांव छोड़ने को कह दिया? झुंझलाहट असीम थी तो राय को सभा से विदा होने को कह सकते थे। गांव कोई रियासत तो नहीं होता। वीके सिंह ने अण्णा के सामने आप पार्टी पर हमला बोला। गोपाल राय तीव्र बचाव करने लगे। न जनरल को अण्णा के मंच पर इतना बड़बोला होना चाहिए था; न गोपाल राय को इतना नाजुकमिजाज। … पर वीके सिंह 'आप' के खिलाफ बोलें और अण्णा सुनते रहें, बल्कि जनरल की उग्र तरफदारी भी करें, तो कल इसके मायने क्या ये नहीं निकाले जाएंगे कि बीच में नरेंद्र मोदी की छाया में भी बैठ आए वीके सिंह अब अण्णा के नए सलाहकार और प्रवक्ता हो चले हैं?
 
Prem Prakash : अन्ना जी गाँधीवादी आदमी हैं,इसीलिए तो कल उन्होंने गोपाल राय को गाँव छोड़कर चले जाने को कह दिया. अब वो तो जनरल वीके सिंह थे मंच पर, इसलिए गाँव से निकालकर संतुष्ट हो गये अन्ना जी. कहीं खुद मोदी जी होते वीके सिंह की जगह तो अन्ना जी गोपाल राय को इंडिया से ही बाहर कर देते. गांधीवादी हैं आखिर. अब ये कौन तय करे कि अन्ना जी की आज जो हैसियत है, वो अरविन्द केजरीवाल ने बनाई थी या जनरल वीके सिंह ने..! या ये भी कौन तय करे कि अरविन्द केजरीवाल की जो हैसियत है आज,वो अन्ना ने बनाई है या अरविन्द ने खुद..?कल अन्ना जी के गाँव से जो खबर आई है, उसमें अच्छी बात एक ही है कि मोदी जी की जनता बहुत खुश है…खुश तो राहुल गाँधी की जनता भी है, लेकिन वो लोग ख़ुशी जाहिर नही कर पा रहे हैं….,अभी ताजा-ताजा मामला है न..दर्द बहुत है…
 
ओम थानवी और प्रेम प्रकाश के फेसबुक वाल से

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