वेबसाइटों पर नियम लागू कराने के मामले में भारत सरकार के इलेक्ट्रानिक सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका

भारत सरकार से खुद उसके द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करवाना आसान नहीं है. आईटी एक्ट 2005 के तहत बनाए गए इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी (इंटरमिडीएरी गाइडलाइन्स) नियम 2011 के नियम तीन में सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को अपने वेबसाईट पर यह स्पष्ट करना होता है कि उसके उपभोक्ता किस प्रकार की बातें नहीं लिख या प्रसारित कर सकते. इसी तरह नियम 11 के अनुसार उन्हें अपने वेबसाईट पर एक या अधिक शिकायत अधिकारियों के नाम और उनके संपर्क पते प्रकाशित करना अनिवार्य है. इन नियमों का पालन होने से इन्टरनेट उपभोक्ताओं को भारी राहत मिलेगी और उन्हें अपनी शिकायत दर्ज कराने और आपत्तिजनक बातों पर ऐतराज करने में बहुत सुविधा मिलेगी.

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने इस नियम का पालन करवाने के लिए  मई 2012 में इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में एक याचिका दयार की जिसमे जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस सईद उज-जमा सिद्दीकी की बेंच ने 09 मई 2012 के अपने आदेश द्वारा भारत सरकार को तीन महीनों में इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के आदेश दिये थे.

आदेश का पालन नहीं होने पर इन दोंनो ने पहले अवमानना याचिका और फिर नवंबर 2012 में दूसरी याचिका दायर की. इस पर जस्टिस उमा नाथ सिंह और जस्टिस वी के दीक्षित की बेंच ने इलेक्ट्रोनिक और आईटी विभाग को तीन माह में केन्द्र सरकार द्वारा न्यायालय में दी गयी प्रतिबद्धता का पालन करने के आदेश दिये.  इस आदेश का अब तक पालन नहीं होने पर याची नूतन ठाकुर द्वारा इलेक्ट्रोनिक और आईटी सचिव जे सत्यनारायण के खिलाफ अब दूसरी अवमानना याचिका दायर की गयी है.

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