वो इश्क जो हमसे रुठ गया… और …आम आदमी की जेब हो गई है सफाचट… (सुनें)

चक्रव्यूह फिल्म देखने लायक है. खासकर उन लोगों के लिए जो पूछते रहते हैं कि ये नक्सलवाद क्या होता है. ऐसे लोगों को बुनियादी रूप से यह समझ में आ जाएगा नक्सली किन हालात में बनते हैं और किन हालात में जीते हैं. चक्रव्यूह बनाकर प्रकाश झा ने अपने सरोकारी सिनेमा के मिशन को आगे बढ़ाया है. हां, यह अलग बात है कि इसी मिशन के माध्यम से वह पैसे भी ठीकठाक कमा लेते हैं. और यह बिलकुल सही है. आपका जो पैशन हो, उसे आप जीते हुए, उसे मिशन के रूप में चलाते हुए, पैसे भी कमा लेते हैं तो यह बड़ी बात है.

मतलब ये कि प्रकाश झा ने साबित किया है कि सिनेमा को सरोकार के साथ जीते हुए भी आप खूब पैसे कमा सकते हैं, कमाने के लिए जरूर नहीं कि आप चड्ढी खोल और माइंडलेस फिल्म ही बनाएं. इस चक्रव्यूह फिल्म के कुछ गाने बेहद अच्छे हैं. दो गाने नीचे दिए जा रहे हैं. एक अन्य गाना फरीदा खानम का है. वो इश्क जो हमसे रुठ गया, अब उसका हाल बताएं क्या… सुनिए और आनंद लीजिए. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


Chheen Ke Lenge apna haq… (Sukhwinder Singh)


aam aadmi ki jeb ho gayi hai safaachat… (कैलाश खेर)


wo ishq jo humse rooth gaya, ab uska hal bataayen kya… (फरीदा खानम)


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