वो मदारी कौन, जो खेल रहे थे ब्लैकमेलिंग का खेल?

देहरादून । उत्तराखण्ड सचिवालय में तैनात जेपी जोशी प्रकरण में आखिर वो मदारी कौन थे, जो पर्दे के पीछे से ब्लैकमेलिंग का खेल खेल रहे थे। भले ही पुलिस ने इस प्रकरण में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया हो, लेकिन इस प्रकरण का मास्टर माइण्ड अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं कांग्रेस की महिला नेत्री रितु कण्डियाल की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध नजर आ रही है। वहीं इस खेल के कुछ कथित पत्रकारों का भी घिनौना चेहरा इस प्रकरण में सामने आने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। 
 
जेपी जोशी ने पुलिस को दिए अपने बयान में साफ तौर से कहा है कि कांग्रेस नेत्री रितु कण्डियाल ने ही मामले को रफा-दफा करने की एवज में तीन करोड़ रूपये की पेशकश की थी, लेकिन जेपी जोशी को जिन लोगों ने पैसे के लिए फोन किया, उनके पत्ते अभी नहीं खुल पाए हैं कि यह फोन कॉल करवाने वाले वो मदारी कौन थे, जो पर्दे के पीछे से ब्लैकमेलिंग का खेल खेल रहे थे। 
 
उत्तराखण्ड की राजनीति में सैक्स स्कैंडल का तड़का हमेशा से ही सुर्खियों में रहता आया है। एनडी तिवारी, हरक सिंह रावत सहित कई अन्य नेताओं के स्कैंडल भी समय-समय पर उजागर होते रहे हैं और सचिवालय में तैनात कई अधिकारियों पर भी ब्लैकमेलिंग के जरिए धन की मोटी वसूली की जा चुकी है। उत्तराखण्ड में मीडिया की चादर ओढ़कर कुछ दलाल मदारी ब्लैकमेलिंग का खेल पिछले काफी समय से खेल रहे हैं और इनके निशाने पर अब तक कई राजनेताओं के साथ-साथ अधिकारी भी आए हैं, लेकिन जेपी जोशी प्रकरण में बनाई गई सेक्स सीडी का गठजोड़ किसके इशारे पर अंजाम दिया गया, इसकी परतें अभी पुलिस उधेड़ने में जुटी हुई है। पुलिस को जो जानकारी हासिल हुई है, उनमें कई चौंकाने वाले मोबाईल नंबर भी जांच के दायरे में चल रहे हैं और अभी कई चेहरों से नकाब उतरना बाकी है। इस प्रकरण में कांग्रेस की महिला नेत्री रितु कण्डियाल दुबई से वापस लौट आई हैं और पुलिस रितु कण्डियाल से पूछताछ करने के बाद इस मामले से कई लोगों का पर्दाफाश कर सकती है। 
 
बीते दिनों उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने इस प्रकरण में मास्टर माइण्ड की तलाश पुलिस द्वारा किए जाने की बात कही थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक उस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है, जिसके इशारे पर इस प्रकरण को अंजाम दिया गया। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस प्रकरण से ऐसे मदारियों के चेहरों से नकाब उतर सकते हैं, जो पर्दे के पीछे से बैठकर ब्लैकमेलिंग का खेलने में जुटे थे। इन मदारियों के द्वारा तीन करोड़ रूपये की पेशकश भी जेपी जोशी से की गई थी, जो पुलिस को पूछताछ में खुद जेपी जोशी ने बयां की है।
 
लेखक राजेन्द्र जोशी उत्तराखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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