वो लोग ज्यादा चीख रहे हैं जिन्होंने ‘आप’ को वोट नहीं दिया

बिना शर्त समर्थन का गुलदस्‍ता पाकर भी Aam Aadmi Party सरकार बनाने के फैसले में जनता की राय शामिल करना चाहती है। कर रही है। यह भारतीय जनतंत्र का हैरान कर देने वाला दृश्‍य है, क्‍योंकि ऐसा कभी देखा नहीं गया था। मतदान के बाद जनता और जन-प्रतिनिधि के बीच सीधा रिश्‍ता लगभग अदृश्‍य जैसा हो जाता रहा है।

दिल्‍ली में उन कुछ लोगों से बात कीजिए, जिन्‍होंने आम आदमी पार्टी को वोट दिया था। वह नये तेवर में हैं। नये आत्‍मविश्‍वास में हैं। उन्‍हें लगता है कि अगर अभी वो सरकार खो भी दें, तो एक राजनीतिक समूह उनकी मुट्ठी में आ गया है, जिसे वह अपने इशारों पर नचा सकते हैं, उसे हड़का सकते हैं और अपनी बुनियादी चीजें उसे डांट-डपट कर ले सकते हैं।

जनता और एक राजनीतिक दल के बीच के इस गंठजोड़ पर वे लोग ज्‍यादा खीझ रहे हैं, जिन्‍होंने आम आदमी पार्टी को वोट नहीं दिया था। पारंपरिक अदल-बदल और यथास्थितिवाद के मोह में जो लोग अब भी बीजेपी और कांग्रेस पर भरोसा कर रहे हैं – उन्‍हें अपनी आलोचना जारी रखते हुए आने वाले कुछ महीनों सालों तक हिंदुस्‍तान के राजनीतिक परिदृश्‍य को तमाशबीन की तरह देखते रहना चाहिए।

पत्रकार और फिल्म समीक्षक अविनास दास के फेसबुक वॉल से.

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