वो लोग भी बोल रहे हैं जो हर महिला के चरित्र पर सवाल उठाया करते थे

Pashyanti Shukla : तेजपाल के व्यक्तित्व का पोस्टमॉर्टम आज कुछ वो लोग भी कर रहे हैं जिन्हें खुद नहीं पता होगा कि दिल्ली की जिन सड़कों पर खड़े होकर आज वो लाइव दे रहें है उन्ही सड़कों पर उन्होंने अपने ही साथ काम करने वाली कितनी महिलाओं के चरित्र का कैसा कैसा अध्ययन किया होगा… कितना चरित्र हनन किया होगा… मुझे आश्चर्य लगा एक ऐसे रिपोर्टर को इस मुद्दे पर बोलते हुए जिसने मेरे ही सामने कभी कांग्रेस ऑफिस 24, अक़बर रोड पर खड़े होकर किसी और महिला पत्रकार के लिए कहा था कि ''लटके झटके दिखाकर मैडम को खबर मिल जाती है..अरे इनके रिश्तों की चर्चा तो प्रमोद महाजन से थी..सफलता की सीढियां इन्होने उसी के ज़माने में चढ़ी..'' … धन्य है दोगलापन.. (पत्रकार रह चुकीं पश्यंती शुक्ला के फेसबुक वॉल से.)

Mukesh Kumar :  तमाम चैनलों, अख़बारों और दूसरे दफ़्तरों में यौन उत्पीड़न को रोकने के मक़सद से कमेटी बनाने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए। हालाँकि ये कानूनन ज़रूरी किया जा चुका है मगर अधिकांश जगह ये हैं ही नहीं या फिर इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। अगर ये बन जाएं और सक्रिय रूप से काम करने लगें तो कुछ भी करके बच निकलने की नीयत रखने वालों में थोड़ा डर पैदा होगा और प्रबंधन को अपनी जि़म्मेदारी का एहसास भी। क्या पत्रकारों का कोई संगठन इसकी शुरूआत कर सकता है या हम कुछ पत्रकार ही मिलकर इसमें लग सकते हैं? (वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.)

Sanjay Tiwari : ऐसा लगता है तेजपाल के बहाने तहलका को खत्म करने की गहरी साजिश चल रही है। यह मीडिया की सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ईश्वर तहलका की रक्षा करें। (वेब जर्नलिस्ट संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.)

Dinesh Choudhary : नंगे विज्ञापन परोसने वाले समाचार चैनलों को स्त्रियों की अस्मिता की क्या सचमुच इतनी ही चिंता है? एक मालिक द्वारा पत्रकार के यौन-शोषण की खबर सभी समाचार चैनलों में है। हजारों मालिकों द्वारा लाखों पत्रकारों के शोषण की खबर किसी समाचार चैनल में चल रही हो तो बताने की किरपा बरसायें। (सोशल एक्टिविस्ट दिनेश चौधरी के फेसबुक वॉल से.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *