शशांक शेखर से संबंधित याचिका क्यों न सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित कर दी जाए

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। शीर्ष कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न शशांक शेखर की कैबिनेट सचिव पद पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित कर दी जाए। न्यायमूर्ति एचएल दत्तू व न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने ये नोटिस गैरसरकारी संगठन 'लोकप्रहरी' की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किए।

मालूम हो कि शशांक शेखर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली लोकप्रहरी की याचिका करीब तीन साल से इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में लंबित है। इसी बीच हरीश चंद्र पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर शशांक शेखर की नियुक्ति को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने पांडेय की याचिका उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और शशांक शेखर को पहले ही नोटिस जारी कर दिया है। उन लोगों ने कोर्ट में अपना जवाब भी दाखिल कर दिया है।

लोकप्रहरी ने सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण याचिका दाखिल कर इसी मामले में उनकी इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित याचिका की सुनवाई भी सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुप्रीम कोर्ट में ही सुनवाई हो। लोकप्रहरी का यह भी कहना है कि हाई कोर्ट में उनकी याचिका पिछले ढाई साल से लंबित है लेकिन उसमें सुनवाई ज्यादा आगे नहीं बढ़ी है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने हरीशचंद्र पांडेय के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि जब एक मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है तो फिर इस मामले को भी वहीं स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। इस पर सिंघवी ने विरोध करते हुए कहा कि वहां जल्दी सुनवाई नहीं हो पाएगी, क्योंकि उस मामले में हाई कोर्ट से नोटिस जारी होने के ढाई साल बाद शशांक शेखर ने अपना जवाब दाखिल किया।

सिंघवी ने कहा कि शशांक शेखर न आईएएस अधिकारी हैं और न आईपीएस, फिर भी राज्य सरकार ने सारे नियम-कानूनों को ताक पर रख कर उन्हें कैबिनेट सचिव नियुक्त कर रखा है। वह 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, लेकिन राज्य सरकार के चहेते हैं। अगर चुनाव के बाद माया सरकार आई तो हो सकता है उनका कार्यकाल दो साल के लिए और बढ़ा दिया जाए। पीठ ने दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी करते हुए प्रतिपक्षियों को दो सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी। साभार : दैनिक जागरण

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