शशिजी, कब तक कम तनख्‍वाह वालों को झकझोरते रहेंगे?

दैनिक हिंदुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर गुरुवार को फिर आगरा में थे। उनकी शहर से यह मोहब्बत कर्मचारियों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। शशि शेखर की तरफ से फिर वही मीटिंग बुलाई गई और फिर वही प्रश्न उछला- आगरा में अखबार कैसे बढ़े। कुछ ने जवाब दिया कि रीडर्स कनेक्ट खबर हो तो किसी ने आगरा के लोगों की आवाज बनने को कहा। शशि शेखर बोले कि ये तो अन्य अखबार भी कर रहे हैं। हम क्या अलग करें।

शशि जी वैसे तो यह प्रश्न आपको खुद से या दिल्ली में भरे अपने चमचों से पूछना चाहिए जो मोटी तनख्वाह इसी बात की ले रहे हैं। फिर भी आपने पूछा है तो हिंदुस्तानी आपको बताना चाहेंगे कि जब तक दलालों की भर्ती, चमचों का प्रमोशन और उन्हें अच्छे पद देना बंद नहीं होगा, अखबार गर्त में ही जाएगा। सिटी रिपोर्टिंग टीम जब रात को आठ बजे आफिस से गायब होकर आसपास के मयखानों में पहुंच जाएगी तो अखबार कैसे बढ़ेगा।

जब एक वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी की कृपा से एक पार्टी विशेष का जिलाध्यक्ष और उसकी एक खास नेत्री (ये दोनों पहले अमर उजाला में भी खूब छपते थे) ही छपेंगे तो आप स्थानीय लोगों के बीच क्या विश्वास पाएंगे। जब तक आप जैसे वरिष्ठ संपादक पैर छूने वालों, महिला स्ट्रिंगर का शोषण करने वालों और मय का गिलास भरकर देने वालों को बढ़ावा देते रहेंगे तो अखबार कैसे बढ़ेगा। आप इसी बात का दावा करते रहे हैं कि मेरी वजह से अखबार बिकता है तो फिर अदने से लोगों से यह सवाल क्यों पूछते हैं। जिन संपादक को आप बड़े जोश से लेकर आते हैं उनसे यह सवाल क्यों नहीं। कब तक आप उन लोगों को झकझोरते रहेंगे जो पहले से ही कम तनख्वाह के कारण और प्रमोशन न मिलने से बेहद परेशान हैं।

आगरा से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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