शशिशेखर के बेटे की खबर और आजकल की पत्रकारिता

Sanjaya Kumar Singh : पत्रकारों और पत्रकारिता का महत्त्व लगातार कम हो रहा है। रोज नए उदाहरण सामने आ रहे हैं और इन्हीं में एक है, दैनिक हिन्दुस्तान के संपादक के बेटे के मतदाता पहचान पत्र में पिता का नाम गलत छप जाने की खबर जिसे अखबार ने प्रमुखता से छापा है। ऐसा नहीं है कि संपादक के बेटे के कार्ड में पिता का नाम गलत छपना खबर नहीं है।

आजकल तो यही खबर है कि जब संपादक और संपादक के बेटे का यह हाल है तो आम आदमी का क्या होगा। पहले आम आदमी की पूछ थी और जो काम जनसत्ता में शिकायत छप जाने से हो जाता था वो अब शायद खबर के रूप में छपने से भी नहीं होता है।

जनसत्ता में संपादक के बेटे की तो छोड़िए, संपादक की भी कोई खबर छापने की साफ मनाही थी। बाद के समय में संपादक से संबंधित खबरें छपीं लेकिन बहुत कम और इनमें ज्यादातर उनके अपने कॉलम में। 1990 के आस-पास मैं जनसत्ता अखबार में नौकरी करता था और मयूर विहार के हिन्दुस्तान टाइम्स अपार्टमेंट में रहता था।

उन दिनों मेरा गैस कनेक्शन प्रीत विहार के एक डीलर के जरिए था और किसी काम से मैं वहां गया, एजेंसी की मालकिन से शिकायत की तो पता देखकर उन्होंने पूछा आप हिन्दुस्तान टाइम्स में हैं। मैंने कहा कि नहीं मैं जनसत्ता में हूं। इससे पहले उनसे काफी कहा-सुनी हो चुकी थी और मुझ पर रौब गांठने के लिए उन्होंने कहा कि प्रभाष जोशी के यहां सिलेंडर हमारे यहां से ही जाता है। मैं उन्हें जानती हूं। मैंने कहा, जानती होंगी पर मैं जनसत्ता में जो शिकायत लगाउंगा उसे वो नहीं देखते और वो शिकायत छप जाएगी तो आपका बचाव भी नहीं करेंगे। ना वो अपनी समस्या शिकायत में छपवाएंगे। वो भी मैं ही करूंगा। अब ठीक से याद नहीं है कि क्या कैसे हुआ पर जितने जिन मेरा सिलेंडर वहां से जाता रहा मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई। ऐसा था जनसत्ता का शिकायत कॉलम। अब देखिए हालत। क्लिक करिए..

'हिन्दुस्तान' ने खबर तब लगाई जब प्रधान संपादक के बेटे का वोटर कार्ड गलत बना

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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