शशि शेखर द्वारा बनाए गए कुछ संपादकों की वजह से उनकी छवि खराब हुई

फिर एक सफर पर लेकिन यह सफर यात्रा नहीं सफर (suffer) ही है। मुझे लगा कि कुछ दिनों के लिए जगह बदलनी ठीक रहेगी। मुझे जानने वाले, पहचानने वाले और जलने वाले बस एक पोस्ट का जिक्र करते हैं जो भड़ास में आजकल दिख रही है और जिसमें मैंने कहा है कि शशि शेखर ने अधिकांशत: उन लोगों को प्रमोट कर संपादक बना दिया जो निराकार और विचारशून्य हैं। इसमें मैंने गलत कुछ नहीं कहा। वे एक बड़े पत्रकार और संपादक हैं। अच्छी समझ वाले हैं और इंसान के तौर पर भी बहुत सॉफ्ट और भावुक दिल वाले हैं।

यह मैं इसलिए कह सकता हूं क्योंकि मैंने उनके साथ काफी साल तक न सिर्फ काम किया है बल्कि उन क्षणों का भी साक्षी हूं जब वे अपने निंदकों के बारे में भी पूछते थे कि वह ठीक तो है। उनके दोस्त और दुश्मन, प्रशंसक और निंदक बहुत हैं लेकिन किसी ने उनके अंदर के इंसान को जानने की कोशिश नहीं की। मैंने उनको बहुत ही भावुक मौकों पर भी देखा है इसलिए जो समझते हों कि मेरी उनके साथ खटक गई वे अपना मुंह धो रखें। लेकिन मैं अपनी इस बात पर आज भी कायम हूं कि उनके द्वारा बनाए गए कुछ संपादकों की वजह से उनकी छवि खराब हुई।

वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ल के फेसबुक वॉल से साभार.

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